रीटा बोली- नहीं, थोड़ा ऊपर करिये तो बताती हूँ. बहादुर ने हाथ थोड़ा ऊपर सरका दिया- बेबी, अब कुछ आराम आया? रीटा सरसराते स्वर में बोली- नहीं, थोड़ा सा और ऊपर करिये तो बताती हूँ. बहादुर ने हाथ ओर ऊपर सरका दिया- अब? मस्ती में रीटा स्कर्ट उलटती बोली- नहीं, जरा सा और ऊपर करिये […]
रीटा अपनी ठुकाई से पूरी तरह सन्तुष्ट थी. भयंकर ऐतिहासिक चुदाई के बाद रीटा की प्यासी जवानी तरोतर हो उठी और वह कली फूल बन गई. इस तरह रीटा और राजू का चौदम चुदाई का सिलसिला जारी रहा और रीटा को तो सही मायनों में चुदाई की लत लग गई थी. कई कई बार तो […]
चूसी और चुदी हुई रीटा बुरी तरह शरमा कर अपना चेहरा अपने हाथों में ढांप कर राजू की छाती में छिपने की कोशिश करने लगी. रीटा को लुत्फ़ तो बहुत आया पर पूरी सन्तुष्टि नहीं हुई. बेचैन रीटा को लगा कि अगर उसने आज चूत नहीं मरवाई तो वह पागल हो जायेगी. दूसरी तरफ से […]
क्या अदा थी लौंडिया की, चूत भी दिखा रही थी और शरमा भी रही थी. राजू सम्मोहित सा फ़ैली हुई गोरी चिट्टी रीटा की बला सी खूबसूरत लबालब रस से भरी नन्ही सी सुडौल आमन्त्रण देती फुद्दी और रबड़ बैंड सी कसी गुलाबी गाण्ड का आँखों ही आँखों में चोदने लगा. रोमविहीन फुद्दी के रक्तिम […]
मेरा नाम राजवीर कपूर है। यह मेरी अन्तर्वासना की पहली कहानी है। प्यार से लोग मुझे राज कहते हैं। मैं जालंधर का रहने वाला हूँ। यहाँ मेरे मम्मी, पापा मेरी बहन रहती है जो मुझसे दो साल छोटी है। मेरी उम्र 19 साल है। उम्मीद है कि यह कहानी आप को अच्छी लगेगी क्यों कि […]
प्रेषक : शमशेर कुमार दोस्तो, मेरा नाम शमशेर कुमार है, मैं हरियाणा से हूँ। मेरी उम्र 18 साल है, सन् 2011 में 10+2 पास की हैँ बल्कि प्रथम आया हूँ। बात उस समय की है जब मेरी अध्यापिका एक टैस्ट ले रही थी मैंने सबसे पहले टैस्ट दे दिया और क्लासरुम के दरवाजे के आगे […]
सभी को मेरा नमस्कार! मेरा नाम आदित्य है(बदला हुआ नाम) आज मैं अपनी पहली कहानी लेकर आपके सामने आया हूं। मैं बहुत दिनों से इसे लिखने की कोशिश कर रहा हूँ मगर आज मैंने लिख ही दी किसी की मदद से। सीधे मुद्दे पर आता हूँ। मैं दिखने में स्मार्ट हुँ और सेक्सी भी, मेरे […]
उसके बाद तो हम दोनों ही पहरों आपस में एक दूसरे का हाथ थामें बतियाते रहते। पता नहीं एक दूजे को देखे बिना हमें तो जैसे चैन ही नहीं आता था। धीरे धीरे हमारा प्रेम परवान चढ़ने लगा। अब सिमरन ने अपने बारे में बताना चालू कर दिया। उसके माँ बाप ने प्रेम-विवाह किया था, […]
उसका पूरा नाम तो था सिमरन पटेल पर स्कूल में उसे सभी केटी (काली टोपी) और घरवाले निक्की या सुम्मी कहते थे पर मेरी बाहों में तो वो सदा सिमसिम या निक्कुड़ी ही बनी रही थी। एक नटखट, नाज़ुक, चुलबुली और नादान कलि मेरे हाथों के खुरदरे स्पर्श और तपिश में डूब कर फूल बन […]
पिछले भाग में आपने पढ़ा कि कैसे मैंने अपनी बीवी की विधवा सहेली की तड़प को शान्त किया। एक बार किसी काम के सिलसिले में दो हफ़्तों के लिए मुझे मुंबई जाना पड़ा और बिना किसी को बताये मैं घर लौट आया। नहा धोकर तरो-ताजा हुआ तो मुझे ना संजना नजर आई और ना ही […]
योनि खाली हुई लेकिन सिर्फ थोड़ी देर के लिए। उसकी अगली परीक्षाएँ बाकी थीं। सुरेश को दिया वादा दिमाग में हथौड़े की तरह बज रहा था,‘जो इज्जत केले को मिली है वह मुझे भी मिले।’ समस्या की सिर्फ जड़ खत्म हुई थी, डालियाँ-पत्ते नहीं। काश, यह सब सिर्फ एक दु:स्वप्न निकले। मां संतोषी ! लेकिन […]
वह फिर मुझ पर झुक गई। कम से कम आधा केला अभी अन्दर ही था। ‘खट खट खट !’… दरवाजे पर दस्तक हुई। मैं सन्न। वे दोनों भी सन्न। यह क्या हुआ? ‘खट खट खट’… ‘सुरेश, दरवाजा खोलो।’ निर्मल उसके हॉस्टल से आया था। उसको मालूम था कि सुरेश यहाँ है। किसी को समझ में […]
नेहा ने जब एक उजला टिशू पेपर मेरे होंठों के बीच दबाकर उसका गीलापन दिखाया तब मैंने समझा कि मैं किस स्तर तक गिर चुकी हूँ। एक अजीब सी गंध, मेरे बदन की, मेरी उत्तेजना की, एक नशा, आवेश, बदन में गर्मी का एहसास… बीच बीच में होश और सजगता के आते द्वीप। जब नेहा […]
ओ ओ ओ ओ ओ ह… खुद को शर्म में भिगोती एक बड़ी लहर, रोशनी के अनार की फुलझड़ी… आह.. एक चौंधभरे अंधेरे में चेतना गुम हो जाती है। ‘यह तो नहीं हुआ? वैसे ही अन्दर है !’… मेरी चेतना लौट रही है- अब क्या करोगी?’ कुछ देर की चुप्पी ! निराशा और भयावहता से […]
मैं कुछ नहीं सुन पा रही थी, कुछ नहीं समझ पा रही थी। कानों में यंत्रवत आवाज आ रही थी- निशा… बी ब्रेव…! यह सिर्फ हम तीनों के बीच रहेगा…..!’ मेरी आँखों के आगे अंधेरा छाया हुआ है। मुझे पीछे ठेलकर तकिए पर लिटा रही है। मेरी नाइटी ऊपर खिंच रही है… मेरे पैर, घुटने, […]
क्षितिज कहीं पास दिख रहा था। मैंने उस तक पहुँचने के लिए और जोर लगा दिया… कोई लहर आ रही है… कोई मुझे बाँहों में कस ले, मुझे चूर दे… ओह… कि तभी ‘खट : खट : खट’… मेरी साँस रुक गई। योनि एकदम से भिंची, झटके से हाथ खींच लिया… खट खट खट… हाथ […]
मैंने योनि के छेद पर उंगली फिराई। थोड़ा-सा गूदा घिसकर उसमें जमा हो गया था। ‘तुम्हें भी केले का स्वाद लग गया है !’ मैंने उससे हँसी की। मैंने उस जमे गूदे को उंगली से योनि के अन्दर ठेल दिया। थोड़ी सी जो उंगली पर लगी थी उसको उठाकर मुँह में चख भी लिया। एक […]
मुझे उसके दोस्तों को देखकर उत्सुकता तो होती पर मैं उनसे दूर ही रहती। शायद नेहा की बातों और व्यवहार की प्रतिक्रिया में मेरा लड़कों से दूरी बरतना कुछ ज्यादा था। वह नहीं होती तो शायद मैं उनसे अधिक मिलती-जुलती। उसके जो दोस्त आते वे उससे ज्यादा मुझे ही बहाने से देखने की कोशिश में […]
प्रिय पाठको, आपने मेरी पिछली कहानियों स्वीटी और पुष्पा का पुष्प को जितना तहेदिल से पसंद किया है उससे मेरे इस विश्वास को बल मिला है कि हिन्दी में परिष्कृत भाषा में सुसंस्कृत पात्रों को लेकर रची गई कहानियाँ पसंद की जा सकती हैं और उनका पाठक वर्ग कोई छोटा नहीं होगा। मेरी कोशिश इस […]
प्रेम गुरु द्बारा सम्पादित एवं संशोधित प्रेषक – जीत शर्मा दिलवाला मेरा नाम जीत शर्मा है। पर जानने वाले मुझे जीतू दिलवाला कहते हैं। इस का एक कारण है। वैसे तो मैं रोहतक हरियाणा का रहने वाला हूँ पर पिछले 7-8 साल से दिल्ली में ही जॉब करता हूँ और यहीं बस गया हूँ। गाँव […]
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