कुंवारी सीमा की चूत की चुदास

दोस्तो, कहानी शुरू करने से पहले आप सबको मेरी तरफ से नमस्ते। मेरा नाम ब्रिजेन्द्र यादव है और मैं बदायूँ से हूँ.. मैं अपनी पहली कहानी लेकर आपके सामने आ रहा हूँ।

यह बात तब की है.. जब मैं स्कूल में पढ़ता था और मेरे पड़ोस में सुन्दर दो बालाएँ रहती थीं। उनमें से एक का नाम सीमा और दूसरी का नाम नेहा था। उनमें सीमा बड़ी थी.. जो बहुत ही सेक्सी गाण्ड वाली माल थी। वह हर लड़के की तरफ बहुत ही सेक्सी नजरों से देखती थी.. उसे अपनी बाली उमर मैं ही चुदने का बहुत शौक था। वह अपनी इस उम्र के पड़ाव पर अपने आपको रोक नहीं सकती थी।

मेरी नजर पहले से ही उस पर थी। मैं उसे हर हाल में चोदना चाहता था। वह देखने में तो वैसे ही सेक्सी थी लेकिन उसके उभरे हुए दूधों को देखकर मेरा मन मचल जाता था.. लेकिन मैं क्या करता.. मैं जैसे-तैसे अपने मन को शान्त कर लेता था।

एक दिन उसके रिश्तेदार के यहाँ पर शादी होने के करण घरवालों को घर के बाहर जाना पड़ा.. उनके साथ उसकी छोटी बहन भी बाहर गई थी। जब मैं उसकी छोटी बहन को देखता था तो मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता था।

आज उसके घर मैं कोई नहीं था। मैंने देखा कि आज घर में कोई नहीं है.. तो मैं चुपके से उसके घर में जाकर छुप गया।

जब मैंने देखा कि वह नहाने के लिए गई.. तो मैं उसे चुपके से देखता रहा।

जैसा कि प्रिय पाठकों.. मैं पहले ही बता चुका हूँ.. वह चुदने को बहुत ही बेताब रहती थी.. मगर उसके लिए कोई उसकी पसन्द का चोदने वाला लड़का नहीं मिला था।

उसने धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारने शुरू किए.. तो मेरे जिस्म में करंट सा दौड़ गया। जब वह नहाने लगी.. तब उसने अपनी चूचियों को मसलना शुरू किया.. तो फिर मुझसे तो जैसे रुका ही नहीं जा रहा था। मैं फिर भी चुपके से देखता रहा। धीरे-धीरे फिर वो अपनी चूत की सफाई करने लगी। मैंने देखा कि उसे किसी की जरूरत है.. तो फि मैं उसके पास पहुँच गया।

वो मुझे देख कर पहले तो एकदम से चौंक पड़ी और चिल्लाने ही वाली थी कि मैंने उसको अपनी बाँहों में जकड़ लिया।

वह उस समय ब्रा और पैन्टी पहने हुई थी। अब तक वो संभल चुकी थी.. तब भी उसने चौंक कर मुझे देखा और कहा- यह तुम क्या कर रहे हो? उसने धीरे से ये शब्द कहे थे.. मैं समझ गया कि यह इस समय मेरा साथ देने को तैयार है।

तभी मैंने उसको किस किया उसके मीठे और गुलाबी होंठ बहुत ही रसीले थे। ऐसा लग रहा था कि जैसे इनमें से अभी रस टपक पड़ेगा। तब वह बोली- आज मेरी प्यास बुझा दो.. मैंने कहा- मैं तुम्हारी और अपनी प्यास बुझाने ही तो आया हूँ।

फिर मैंने उसके दूध को धीरे-धीरे दबाया और वह धीरे से मधुर आवाजें निकालने लगी ‘स्स्स.. फ्फ्फ्फ्फ.. ह्रहहफ्ह..’ उसकी कामुक आवाजें आने लगीं.. फिर मैंने उसकी ब्रा उतार दी और उसकी चूचियों को दबाने लगा। मैंने उसके चूचियों की चुसाई करने के बाद उसकी पैन्टी भी उतार दी। उसकी चूत बहुत ही कयामत ढहा रही थी। उसकी गुलाबी पॉव रोटी सी फूली चूत ने मुझे तो पागल बना दिया। मुझे तो ऐसा लग रहा था कि अभी इसकी चूत पर टूट पडूँ।

फिर मैंने उसके स्तनों की नोकों को अपने होंठों से पुच्ची ली उन्हें अपने होंठों में दबा लिया वह एकदम से सिसक गई। अब वह पूरी तरह से गरम हो चुकी थी और वह बार-बार कहे जा रही थी- मुझे मत तड़फाओ… मेरी चूत चोद दो..

मैं उसे उठा कर बिस्तर पर ले गया। मैंने अपना अन्डरवियर उतार दिया। वह मेरा लन्ड देख कर डर गई और बोली- जानू, यह तो मेरी नाजुक चूत को फाड़ ही देगा। मैंने कहा- डरो मत जान.. तुम्हारी चूत इसे पूरा ले लेगी.. पर पहले इसे चूसो.. फिर देखना कि कितना बड़ा हो जाता है। वह बोली- जानू और बड़ा हो जाएगा?

मैंने कहा- हाँ.. अभी तो यह सो रहा है.. जब जगाओगी.. तभी तो यह तुम्हारी चूत को मजा देगा। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

अब वह मेरे लन्ड को चूस रही थी.. मैं उसकी चूत को धीरे-धीरे मसल रहा था। अपना लन्ड उसके मुँह से बाहर निकाल कर मैंने लौड़े को उसकी चूत की दहलीज पर रख दिया।

फिर धीरे से मैंने सुपारा अन्दर किया और लौड़े को चूत में अन्दर-बाहर करना शुरू किया.. तो वह चीख उठी और बोली- मर गई रे.. छोड़ दो। मैंने फिर एक तेजी से झटका दिया तो उसकी कुँवारी सील टूट गई और उसकी चूत से खून आने लगा। वह जोर से चीखने लगी.. तब मैंने तेजी से एक झटका मारा और मेरा लन्ड उसकी चूत में पूरा जड़ तक अन्दर जा चुका था। मैंने देखा कि उसकी आँखों से आँसुओं की धार बह रही थी.. मगर मैं अपनी रफ्तार बढ़ाता चला गया। कुछ ही धक्कों के बाद उसकी पीढ़ा धीरे-धीरे कम होने लगी।

अब उसे भी मजा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी थी। अब मेरा माल निकलने ही वाला था.. मैंने उसकी चूत से अपना लन्ड बाहर निकाला और अपना सारा माल उसके मुँह में छोड़ दिया। वह सारा माल पी गई।

इसके बाद तो उसकी चूत और मेरा लण्ड मौका मिलते ही मिल जाते थे।

दोस्तो, मैं उम्मीद करता हूँ कि आपको मेरी कहानी अच्छी लगी होगी। [email protected]

Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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