जब किसी औरत का पति जवानी में चल बसे, तो उसकी जिंदगी कितनी मुश्किल हो जाती है, ये वही औरत समझ सकती है। भरी जवानी में विधवा होना ऐसा है जैसे जिंदगी का सारा रंग फीका पड़ जाए। भूख के लिए जैसे खाना जरूरी है, वैसे ही जिस्म की आग बुझाने के लिए सेक्स जरूरी है। Widow Sex Kahani
समाज विधवा को सिर्फ दुख और धर्म में डुबोना चाहता है, लेकिन मैं, निशा, 22 साल की एक जवान औरत, ने समाज की इन रूढ़ियों को ठुकरा दिया। मेरे पति की मौत को अभी छह महीने ही हुए थे, जब कोरोना ने उन्हें मुझसे छीन लिया। शादी को अभी पूरा साल भी नहीं हुआ था, और मैं अकेली रह गई। मेरी जिंदगी सूनी हो गई थी।
मेरे घर में मेरे ससुर और जेठ जी हैं। जेठ जी की पत्नी उस समय मायके गई थी, और सास तो पहले ही गुजर चुकी थी। मेरे ससुर सुबह-सुबह सत्संग के लिए निकल जाते थे, और जेठ जी आठ बजे से पहले बिस्तर से उठते ही नहीं थे। मैं बचपन से ही बिंदास थी।
मेरे पति मुझे कभी किसी बात के लिए नहीं रोकते थे। वो मुझे बहुत प्यार करते थे, मेरी हर ख्वाहिश पूरी करते थे। लेकिन ऊपरवाले को हमारा साथ मंजूर नहीं था। पति के जाने के बाद मैं मन ही मन टूट गई थी। कोई काम में मन नहीं लगता था। दिन कटते थे, लेकिन रातें भारी पड़ने लगी थीं।
हर रात मैं अकेले में अपने कमरे में बैठकर इंटरनेट पर सेक्स कहानियां पढ़ती। अपनी चूत में उंगली डालकर, अपनी चूचियों को खुद ही दबाकर किसी तरह अपनी वासना को शांत करने की कोशिश करती। लेकिन ये सब कितने दिन चलता? मेरी जिस्म की आग और बढ़ने लगी।
मैं और भी कामुक, और भी बेकरार हो गई। रोजाना कहानियां पढ़ने और सेक्सी वीडियो देखने से मेरे मन में चुदाई की तड़प और बढ़ गई। मैं सोचने लगी कि अब क्या करूं? किसे बुलाऊं? किससे अपनी ये प्यास बुझाऊं? मेरे घर में रोज सुबह छह बजे देवा भैया दूध देने आते थे।
वो एक 25-26 साल का नौजवान था, लंबा, गोरा, और कसरती जिस्म वाला। उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी, जो मुझे हमेशा अपनी ओर खींचती थी। सुबह के समय ससुर जी सत्संग में होते थे, और जेठ जी सो रहे होते थे। ये मेरे लिए सही मौका था।
मैंने सोच लिया कि देवा के साथ ही अपनी प्यास बुझाने की कोशिश करूंगी। धीरे-धीरे मैंने उसके सामने अपनी अदाएं दिखानी शुरू कीं। कभी मैं हल्के, पारदर्शी कपड़ों में दूध लेने चली जाती। कभी जानबूझकर अपनी साड़ी का पल्लू सरका देती, ताकि मेरी गहरी नाभि और भारी चूचियां उसे दिख जाएं।
मेरी 34D की चूचियां और गोल-मटोल गांड को वो चुपके-चुपके निहारता। मैं भी मटक-मटक कर चलती, उससे सेक्सी अंदाज में बात करती। उसकी आंखें मेरी नाभि पर अटक जातीं, और मैं जानबूझकर और ज्यादा नखरे दिखाती। एक दिन उसने बात शुरू की।
बोला, “भाभी जी, आप बहुत अच्छी हो। मैं तो कई घरों में दूध देता हूं, लेकिन आपके जैसी कोई नहीं। आप बहुत सुंदर, बहुत सेक्सी हो।” मैंने हंसकर पूछा, “अच्छा? मैं क्या अच्छी हूं?” वो थोड़ा शरमाया, फिर बोला, “आपका फिगर, आपके नैन-नक्श, सब कुछ मस्त है। आपकी हंसी, आपकी बातें, सब कुछ अलग है।” ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने मजाक में कहा, “बस इतना ही? और कुछ नहीं?”
वो हंसने लगा, लेकिन उसकी आंखों में वासना साफ दिख रही थी।
उसने फिर कहा, “भाभी, मुझे दुख होता है कि आप इतनी खूबसूरत हो, फिर भी अकेली हो। आपको शादी कर लेनी चाहिए। ये जिंदगी अकेले काटना मुश्किल है।”
मैंने गंभीर होकर कहा, “शादी? मेरे लिए अब ये मुमकिन नहीं। मेरे मायके में कोई नहीं है। पापा गुजर चुके हैं, मम्मी किसी और के साथ भाग गई थीं। मेरी शादी चाचा और गांव वालों ने कराई थी। अगर वो न होते, तो मैं कुंवारी ही रह जाती।”
मेरी बात सुनकर देवा का चेहरा उदास हो गया।
वो भावुक होकर बोला, “भाभी, आपने इतना दुख देखा है। अब अगर आपको किसी चीज की जरूरत हो, तो मुझे बता देना।”
उस दिन के बाद वो और करीब आने लगा। उसकी बातें मुझे अच्छी लगने लगीं। वो हर सुबह कुछ न कुछ कहकर मेरा मन बहलाता। एक दिन मैंने हिम्मत जुटाई और उसे अंदर बुला लिया। मैंने साफ-साफ कह दिया, “देवा, मुझे तुमसे सेक्स चाहिए। मेरी जिस्म की आग बुझा दो।” वो पहले तो हड़बड़ा गया।
बोला, “भाभी, मैं आपको बहुत चाहता हूं, लेकिन ये ठीक नहीं। आपकी कहानी सुनकर मेरा दिल पिघल गया था। मैं चाहूं तो आपका भाई बन सकता हूं, लेकिन ये… ये गलत है।”
मैंने उसकी बात अनसुनी की और अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए। मैंने अपनी साड़ी खींचकर फेंक दी। मेरी भारी चूचियां ब्रा में कैद थीं, और मेरी पतली कमर और गहरी नाभि नंगी थी। देवा की आंखें फट गईं। उसका लंड पैंट में तन गया, जो साफ दिख रहा था। मैंने उसकी पैंट की तरफ इशारा करते हुए कहा, “ये क्या, भाई बनने की बात कर रहे थे? अब ये लंड क्यों खड़ा हो रहा है?”
वो और शरमा गया, लेकिन अब उसका मन डोल चुका था। उसने अपना कुर्ता उतारा और मुझे अपनी बाहों में खींच लिया। उसका कसरती जिस्म मेरे नंगे जिस्म से टकराया। उसने मेरी ब्रा का हुक खोल दिया, और मेरी चूचियां आजाद हो गईं। वो मेरे गले पर चूमने लगा, मेरी चूचियों को जोर-जोर से दबाने लगा।
मैं सिहर उठी। उसका हर स्पर्श मेरे जिस्म में बिजली दौड़ा रहा था। “आह्ह… देवा… और जोर से… दबा मेरी चूचियों को…” मैं सिसकारियां लेने लगी। उसने मेरे निप्पल्स को मुंह में लिया और चूसने लगा। “उम्म… आह्ह… हाय… कितना मजा आ रहा है…” मैंने उसका सिर अपनी चूचियों पर दबा दिया। “Widow Sex Kahani”
उसने मुझे सोफे पर लिटा दिया और मेरी पेटीकोट को खींचकर उतार दिया। अब मैं सिर्फ पैंटी में थी। उसने मेरी जांघों को सहलाया, मेरी चूत को पैंटी के ऊपर से रगड़ा। “भाभी, तुम्हारी चूत तो गीली हो चुकी है,” उसने कहा और मेरी पैंटी भी उतार दी। मेरी चिकनी, गुलाबी चूत उसके सामने थी।
उसने अपनी उंगलियां मेरी चूत पर फिराईं, और मैं तड़प उठी। “आह्ह… देवा… चाट इसे… प्लीज…” मैंने उसका सिर अपनी चूत की तरफ धकेल दिया। उसने मेरी चूत को चाटना शुरू किया। उसकी जीभ मेरी चूत के दाने को छू रही थी, और मैं पागल हो रही थी। “उम्म… आह्ह… हाय… और चाट… ओह्ह…” मैं जोर-जोर से सिसकारियां ले रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसने पांच मिनट तक मेरी चूत चाटी, और मेरी चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी। फिर उसने अपनी पैंट उतारी। उसका लंड बाहर निकला—करीब 10 इंच लंबा, मोटा, और सख्त। मैंने उसे देखकर कहा, “हाय… कितना बड़ा है तेरा लंड… इसे चूसने दे मुझे…” मैंने उसका लंड अपने मुंह में लिया और चूसने लगी। “Widow Sex Kahani”
“उम्म… उफ्फ… कितना सख्त है…” मैं उसके लंड को चाट रही थी, उसका सुपारा चूस रही थी। वो सिसकारियां ले रहा था, “आह्ह… भाभी… तुम तो कमाल हो… और चूसो…” मैंने उसका लंड गले तक लिया, और वो पागल हो गया। उसने कहा, “बस करो भाभी, अब मुझे तुम्हारी चूत पेलनी है। तुम्हारी ये गर्मी मुझे उतारनी है।”
उसने मेरी टांगें चौड़ी कीं और अपना मोटा लंड मेरी चूत पर रगड़ा। “देवा… धीरे डाल… बहुत बड़ा है…” मैंने कहा। उसने मेरी चूत पर लंड सेट किया और धीरे से अंदर धकेला। “आह्ह… उफ्फ… हाय…” मैं सिहर उठी। उसका लंड मेरी चूत को चीरता हुआ अंदर जा रहा था।
मेरी चूत तंग थी, क्योंकि कई महीनों से मैंने चुदाई नहीं की थी। उसने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। “आह्ह… देवा… और जोर से… पेल दे मेरी चूत को…” मैं चिल्ला रही थी। वो जोर-जोर से धक्के मारने लगा। उसका लंड मेरी चूत की गहराई तक जा रहा था।
“उफ्फ… आह्ह… कितना मजा आ रहा है… और जोर से… फाड़ दे मेरी चूत…” मैं सिसकारियां ले रही थी। मेरे होंठ सूख रहे थे, मेरे हाथ-पैर कांप रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे मेरे जिस्म में आग लग गई हो। वो मेरी चूचियों को दबाते हुए, मेरे होंठों को चूमते हुए मुझे पेल रहा था।
“भाभी… तुम्हारी चूत तो जन्नत है… कितनी तंग है…” वो बोले जा रहा था।
मैंने कहा, “हां… पेल दे… मेरी चूत को और रगड़… आह्ह… उफ्फ…”
करीब बीस मिनट तक वो मुझे पेलता रहा। कमरे में सिर्फ मेरी सिसकारियां और उसकी धक्कों की आवाज गूंज रही थी—थप थप थप… आखिरकार उसने जोर से सिसकारी ली, “आह्ह… भाभी… मैं झड़ने वाला हूं…” और उसने अपना गर्म वीर्य मेरी चूत में छोड़ दिया। “Widow Sex Kahani”
“उफ्फ… आह्ह… कितना गर्म है…” मैंने महसूस किया कि उसका वीर्य मेरी चूत को भर रहा था। वो जोर-जोर से “आआआ… ओह्ह…” कर रहा था। लेकिन उसकी आवाज इतनी तेज थी कि मेरे जेठ जी की नींद खुल गई। सुबह के करीब 6:45 बजे थे। जेठ जी दौड़कर नीचे आए और देखा कि मैं नंगी सोफे पर पड़ी हूं, और देवा अपना दूध का बर्तन उठाकर भाग रहा है। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैं घबरा गई। जल्दी-जल्दी मैंने अपनी साड़ी और ब्लाउज उठाया और जेठ जी के सामने ही कपड़े पहनने लगी। उनकी आंखें गुस्से और हैरानी से भरी थीं। मैंने कुछ नहीं कहा और अपने कमरे में भाग गई। दरवाजा बंद करके मैं पलंग पर लेट गई। मेरी धड़कनें तेज थीं। मुझे डर लग रहा था कि अब क्या होगा।
तभी मैंने सुना कि जेठ जी फोन पर ससुर जी से बात कर रहे थे। “बाबूजी, जल्दी घर आओ। घर में बहुत बड़ा मुसीबत हो गया है। आप सोच भी नहीं सकते। अगर देर की, तो कुछ उल्टा-सीधा हो जाएगा।” ससुर जी शायद बोले, “ठीक है, मैं सत्संग के बाद आता हूं।”
लेकिन जेठ जी चिल्लाए, “नहीं, अभी आओ! मैं जिम्मेदार नहीं हूं अगर कुछ गलत हुआ।”
मैंने हिम्मत करके दरवाजा खोला और जेठ जी से कहा, “जेठ जी, मुझे माफ कर दीजिए। बहुत बड़ी गलती हो गई। ऐसा दोबारा नहीं होगा।” लेकिन जेठ जी गुस्से में बोले, “चुप रह! बाबूजी को आने दे, फिर बताता हूं तुझसे क्या हुआ। तुझे बहुत गर्मी चढ़ी है, अब बाबूजी आएंगे, तब देखता हूं।” मैंने फिर से दरवाजा बंद किया और पलंग पर लेट गई। मेरी सांसें तेज थीं, दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि जेठ जी और ससुर जी मेरे साथ क्या करेंगे। डर के मारे मेरा बुरा हाल था।
Subscribe to get the latest posts sent to your email.