जिस्म में तूफान

जब टिका देते हो इस जगह तुम अपनी जुबाँ मेरे जिस्म में उठा देते हो तुम इक तूफाँ

जी चाहता है बस यूँ ही तुम चूमते रहो प्यार से चाट चाट के इससे हो जाओ हलकाँ

मिटा दो इसकी खुजली चूमने के साथ करके उंगली यह तंग मुझे बहुत करती है, करती है मुझे परेशाँ

जब भी देख लेती है तुम्हें, यह फुदकने लगती है तुम से मिल के कुछ करने का बाँधने लगती है समाँ

चूमने चाटने के बाद जब यह हो जाय गीली और मस्त इसकी आग बुझा दो मेरे साजन यह तो है आतिश फिशाँ

चाट चाट के तुम बना दो इसको मदमस्त और अपनी दीवानी फिर डाल के अंदर कर दो इसके पूरे सारे अरमाँ

चिमनी की तरह गर्म है अंदर से गीली और नर्म है बहुत ही ज्यादा बेशर्म है बेहया है, है नादाँ

ढीठ है बहुत लाज आती नहीं मुझे सताते हुए तुम से करवाने के लिए इसके लबों पे रहती है हाँ…

Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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