ट्रेन के कूपे में सैटिंग संग चुदाई की मस्ती- 2

फुल न्यूड सेक्स इन ट्रेन का मजा लिया मैंने अपनी गर्लफ्रेंड के साथ. हम AC प्रथम श्रेणी के कूपे में थे. वहां हमने मस्त माहौल बनाया. पूरे नंगे होकर बढ़िया चुदाई का मजा लिया.

दोस्तो, मैं आयुष बिंदल एक बार पुनः अपनी सेक्स कहानी का अगला भाग लेकर हाजिर हूँ.

कहानी के पहले भाग ट्रेन के कूपे में सेक्स का जुगाड़ किया में अब तक आपने पढ़ लिया था कि मानसी मेरे सामने अब अपने बाथरोब को खोल कर खड़ी हुई, तो मेरी आंखें फटी की फटी रह गई थीं.

अब आगे फुल न्यूड सेक्स इन ट्रेन का मजा:

मानसी ने इतनी ज्यादा पारदर्शी सेक्सी लौंजरी पहन रखी थी कि क्या ही कहूँ. उसकी इस सेक्सी लौंजरी में से उसका पूरा तराशा हुआ बदन साफ साफ दिखाई दे रहा था. उसकी ड्रेस फिश-नेट की बनी हुई थी, जिसमें से अन्दर का उसका हर एक मादक अंग साफ साफ दिखाई दे रहा था.

उसके तने हुए स्तन, बलखाती कमर और गुलाबी चूत. उसकी कमर के पास एक डोर थी, जिससे पूरी ड्रेस बंधी हुई थी, अगर वह खोल दी जाए, तो उसकी पूरी ड्रेस एक सेकेंड से भी कम समय में नीचे सरक जाने वाली थी.

मैं उसकी इस सेक्सी ड्रेस को देख रहा था. मानसी बोली- ये है तुम्हारा सर्प्राइज़ … बताओ कैसा लगा!

मैं उसके बदन को छू छू कर देख रहा था और उसे घुमा कर पीछे उसके गुदाज़ चूतड़ भी मसलता हुआ बोला- ये तो मेरी जिंदगी का सबसे बेहतरीन सर्प्राइज़ है! मैंने पहले 2-3 बार मानसी को घुमा घुमा कर उसकी ड्रेस और अन्दर से झांकते उसके मादक जिस्म को निहारा.

मानसी खिलखिलाकर बोली- ऐसे देख रहे हो जैसे मुझे पहली बार देखा हो! मैंने कहा- जानेमन, तुमने अपनी ऐसी रंगत आज पहली बार दिखाई है.

यह कह कर मैंने उसकी ड्रेस की बेल्ट को धीरे से खोल दिया. तुरंत ही वह ड्रेस सरसराती हुई नीचे गिर पड़ी. उसके अन्दर मानसी ने कुछ भी नहीं पहना हुआ था.

अब हम दोनों ही पूर्ण रूप से नंगे थे और एक दूसरे से चिपके हुए थे.

हमारे होंठ आपस में भिड़े हुए थे मेरे दोनों हाथ मानसी के दोनों चूतड़ों को बेताबी से मसल रहे थे. मानसी का एक हाथ मेरे बालों में था और दूसरा मेरे लंड को मसलने में लगा हुआ था.

काफ़ी देर से हम दोनों खड़े होकर फ़ोरप्ले कर रहे थे इसलिए अब मैंने मानसी को नीचे गद्दे पर लिटा दिया. वहां जो गुलाब की पंखुड़ियां पड़ी हुई थीं, वे ट्रेन के एसी के कारण काफ़ी ठंडी हो चुकी थीं.

जैसे ही मानसी की पीठ उन गुलाब की पंखुड़ियों से टकराई, उसे ठंड वाली गुदगुदी हुई और उसने अपनी छाती ऊपर कर ली. मैंने तुरंत उसके होंठों को चूमना छोड़ा और उसका नर्म और मांसल स्तन अपने मुँह में भर लिया.

मेरा एक हाथ मानसी के सिर के नीचे था तथा दूसरे से मैंने उसकी गुलाबी चूत को हौले से सहलाना शुरू कर दिया. मानसी ने भी अपनी टांगें खोल कर मेरा स्वागत किया.

हालांकि ये आसन हमने ज़्यादा देर नहीं किया क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि मानसी सिर्फ़ चूत रगड़ने से स्खलित हो जाए! कुछ देर बाद मानसी को अच्छे से नीचे लेटा कर मैं उसके ऊपर चढ़ कर बैठ गया और उसके पूरे बदन को चूमने लगा.

मानसी के हाथ मेरे बालों पर चलने लगे थे. पहले मैंने उसके दोनों स्तनों को बारी बारी से निचोड़ निचोड़ कर चूसा और मसला.

अगर मानसी के मम्मों से दूध आ रहा होता तो ये मान कर चलिए कि उसकी चूचियों के अन्दर दूध की एक भी बूँद ना बचती.

फिर मैंने उसके पेट के निशाना बनाया. पर इसे मैंने चूमा नहीं और ना ही चाटा … बस अपनी जीभ बाहर निकाल कर उसे उसके पेट और नाभि पर फिराने लगा.

मानसी मेरी इस हरकत से मचल उठी और उसका पूरा बदन थिरकने लगा.

मानसी की कामुक सिसकारियों की आवाज़ थोड़ी तेज हो चुकी थी. चूंकि ट्रेन चल रही थी, इसलिए हमें कोई परेशानी नहीं थी.

उसके पेट को अच्छे से अपनी जीभ से गीला करने के बाद मैं नीचे सरका और मानसी की गुलाबी और एकदम चिकनी चूत को निहारा. आज मानसी ने चूत को शेव नहीं किया था बल्कि वैक्स करवाया था.

मैंने पूछा तो वह बोली- शेव करने से आखिरी के बाल साफ नहीं हो पाते और चुभते हैं. मैंने पूछा- किसे चुभेंगे? वह हंस कर बोली- तुम्हें ही चुभेंगे, जब अपनी जीभ लगाओगे! मैंने कहा- वाह आज तो तुम पूरी तैयारी से आई हो और एक से बढ़कर एक सर्प्राइज़ दे रही हो!

फिर मैंने उसकी धधकती चूत को अपनी नाक घुसा कर सूँघा. आआह दोस्तो! वह मादकता आज भी मेरे नकुओं में बसी हुई है.

मीनाक्षी की चूत थोड़ी काली थी, पर रचना और मानसी की चूत एकदम गुलाबी थी. मैं मानसी की चूत को सिर्फ़ सूंघ कर नीचे सरक गया और उसकी जांघों को चाटने लगा.

मानसी ने कहा- नीचे कहां जा रहे हो, जल्दी से मेरी चूत में जो आग लग रखी है … उसे अपनी जीभ से बुझाओ न! मैंने कहा- रूको तो सही, सारी प्यास और आग बुझा दूँगा आज … पर सब तसल्ली से होगा.

अब मैंने मानसी को पलट दिया और पेट के बल लेटा कर उसकी जांघों को चाटते हुए ऊपर सरकने लगा. उसके नर्म चूतड़ों पर पहुंच कर मैंने उसे ज़ोर से चाब दिया, जिससे मानसी ज़ोर से चीख पड़ी.

वह बोली- आह! पूरा काट कर मांस निकाल दोगे क्या? मैंने कहा- क्या करूं जान, अगर हो पाता तो सच में तुम्हें पूरा चबा कर खा ही जाता!

इस बात को सुन कर हम दोनों ही हंस पड़े और मैं दोबारा अपने पसंदीदा काम में लग गया.

मैं यहां बताना चाहूँगा कि कई लोग बोलते हैं कि उन्होंने अपने पार्ट्नर की गांड का छेद भी चाटा है. मैं ये मानता हूँ कि सेक्स में कुछ गंदा नहीं होता … पर मुझे गांड चाटना पसंद नहीं है. इसलिए आज तक मैंने ऐसा किसी के साथ कभी भी नहीं किया.

तो मानसी के चूतड़ों को चबाने और जीभ से चाटने के बाद मैं उसकी पतली बलखाती कमर की तरफ बढ़ा.

मेरा फनफनाता लंड उसकी गांड में रगड़ खाने लगा था. हम दोनों की मदभरी सिसकारियां लगातार निकलती ही जा रही थीं.

मैं आगे पीछे होकर मानसी की पीठ को चाट रहा था और मेरा लंड उसके गांड में घुसने को बेताब हो रहा था. पीठ को चाटने की वजह से मानसी ज़्यादा उत्तेजित होने लगी और पीठ के बल होकर ऊपर को उठने लगी.

अब मेरा एक हाथ उसके एक स्तन को मसल रहा था और जीभ उसकी पीठ को भिगो रही थी. जब मानसी ने अपनी पीठ को पूरी मोड़ दी, तो मैंने उसके स्तन को मसलते हुए उसके कान को हल्के से चाब दिया.

मेरी इस हरकत से मानसी की उत्तेजना हद से बाहर हो गई. वह घिघियाती हुई बोली- आयुष प्लीज़ मुझे इतना मत तड़पाओ यार … डाल दो अपना मूसल मेरे अन्दर … मेरी चूत की गर्मी शांत कर दो प्लीज़!

मैंने उसे सीधी किया और उसकी गर्दन को थोड़ा इतने ज़ोर से चाबा कि मेरे प्यार की निशानी बन जाए … यानि लव बाइट का निशान रह जाए.

उधर से मैं तुरंत नीचे को खिसका और गप्प से एक झटके में उसकी गुलाबी चूत को अपने मुँह में भर लिया. मानसी के मुँह एक तृप्ति भरी आह निकली, जैसे कई दिन से प्यासे को पानी मिल गया हो.

पर नीचे तो उसकी चूत इतनी गीली हो रखी थी, जैसे किसी ने काफ़ी सारा पानी गिरा रखा हो! मैं मानसी की चूत को भर भर कर चाट रहा था और मेरे हाथ उसके स्तन को मसल रहे थे.

जबकि मानसी के हाथ मेरे बालों को खींच रहे थे और वह ज़ोर और ज़ोर से ‘आह चाटो मेरी चुत आह.’ चिल्ला रही थी.

जब मानसी का बदन अकड़ने को हुआ, तो मैंने अपना मुँह उसकी चुत से बाहर निकाल लिया. वह एकदम गुस्सा होकर बोली- साले सिर्फ़ एक मिनट और चाट लो, मेरा काम हो जाएगा!

मैंने उससे कहा- आज बहुत हड़बड़ी कर रही हो तुम? वह बोली- यार मैं इतने महीनों से तड़प रही हूँ … और आज मौका मिल रहा है तो तुम और तड़पा रहे हो!

मैंने उसे 69 की अवस्था में किया और फिर से हम दोनों एक दूसरे में खो गए.

मैंने दोनों हाथों से मानसी की चूत को खोल रखा था और अपनी जीभ उसकी नर्म गुलाबी चूत में अन्दर तक घुसा कर उसकी क्लिट को चूस चूस कर बाहर खींच रहा था. उधर मानसी भी पूरे जोश में लंड को एकदम ज़ोर ज़ोर से रगड़ कर, जितना हो सकता था … मुँह के अन्दर लेकर चूस रही थी.

मैं जितनी ज़ोर से उसकी चूत को चाटता, वह उससे दोगुने जोश से मेरे लंड को चूसने लगती. सिर्फ़ पांच मिनट बाद ही मानसी ने लंड को मुँह से बाहर निकाला और ज़ोर ज़ोर से सिसकारियां लेने लगी.

उसका पूरा बदन अकड़ने लगा और चुत का कामरस मेरे मुँह में आने लगा. उसके हाथ और पैर दोनों कांपने लगे थे और वह सीधी होकर बैठ गई थी, जिस वजह से मेरा चेहरा उसकी गांड से दब गया था.

जब मुझे सांस लेने में तकलीफ़ होने लगी, तो मैंने मानसी के गांड में थपकी मारी … जिससे वह साइड होकर मेरे बगल में चिपक कर लेट गई. उसकी सांसें धौंकनी की तरफ तेज तेज चल रही थीं.

मानसी बोली- सच में तुमने तो मेरी जान ही निकाल दी थी … इतनी ज़ोर से भी कोई चूत चाटता है क्या? मैं बोला- क्या करूं, तुम सामने रहती हो तो कुछ भी कंट्रोल नहीं हो पाता!

फिर मैंने घड़ी में समय देखा तो साढ़े आठ बज रहे थे. कोई एक बड़ा स्टेशन आने वाला था, जहां ट्रेन बीस मिनट रुकती थी.

मैंने कहा- जल्दी से कुछ खाने का ले आता हूँ वरना आगे रात में कुछ नहीं मिलेगा.

जल्दी से मैंने अपने कपड़े पहने और बाहर निकल गया. मानसी ने दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया.

बाहर निकल कर मैंने दो प्लेट खाना पैक कराया और एक बड़ी कोल्ड ड्रिंक की बोतल ले ली. वहां मुझे वही लड़की मिल गई जो हमारे बाजू वाले केबिन में थी.

मैंने औपचारिकता वश उसे स्माइल देकर हैलो बोला. तो वह मुस्कुराकर बोली- लगता है आप दोनों की आवाजों की वजह से मुझे रात भर नींद नहीं आएगी! ये सुनकर मैं थोड़ा हड़बड़ा गया, फिर बोला- गर्लफ्रेंड साथ हो और स्पेस भी हो तो कौन बेवकूफ़ रात को सोएगा!

वह बोली- उसके पास तो आप हो, पर मैं तो अकेली ही ट्रॅवेल कर रही हूँ. ये कह कर उसने अर्थपूर्ण तरीके से अपनी आंख मारी.

इतने में हम दोनों का दुकान से हिसाब हो गया और वापस ट्रेन की तरफ बढ़ चले.

मैं उससे और ज़्यादा बात करके अपने लिए मुसीबत मोल नहीं लेना चाहता था क्योंकि वह लड़की तो बिछने के लिए तैयार थी, बस मेरी तरफ से हां कहने की देर थी.

मैं अभी सिर्फ़ मानसी के साथ सफ़र का आनन्द लेना चाहता था.

वैसे ही मानसी को रचना के बारे में कुछ पता नहीं था, पहले तो उसी बात पर वह मुझसे काफ़ी गुस्सा होने वाली थी.

अब हम दोनों ट्रेन के अन्दर थे.

मेरा कूपे पहले था, बाद में उस लड़की का. मैंने दरवाजा नॉक किया और मानसी से कहा- मैं हूँ, दरवाजा खोलो. उसने सोचा कि मैं अकेला हूँ, इसलिए उसने एकदम से दरवाजा खोल दिया.

इतने में उस लड़की ने जल्दी से अन्दर झांक कर देखा, तो वह मुस्कुराकर बोली- ओह्ह, आप दोनों ने तो इसे हनीमून रूम बना दिया है. वह खिलखिला कर हंसने लगी.

इधर मानसी बिल्कुल नंगी उसके सामने खड़ी थी. मैं और मानसी उस लड़की की इस हरकत से एकदम हड़बड़ा गए.

मैं जल्दी से अन्दर घुसा और दरवाजा बंद कर लिया. उस लड़की ने बाहर से चिल्ला कर कहा- आराम से करना, आप लोगों की आवाज़ बाहर तक बहुत ज्यादा आती है.

इधर मानसी मुझे गुस्से से देखने लगी, तब मैंने उसे बताया कि बाजू वाले केबिन में वह अकेली ट्रॅवेल कर रही है और हमारी आवाज़ सुन कर हॉर्नी फील कर रही थी. खैर … मानसी भी ज़्यादा गुस्सा करके अपना मूड खराब नहीं करना चाहती थी, तो हम दोनों ने ही वह बात वहीं छोड़ दी.

कुछ पल बाद मानसी बोली- पहले खाना खा लेते हैं.

यह सुनकर मेरे दिमाग़ में एक ख्याल आया. मैंने फटाफट अपने कपड़े उतार कर ट्रेन की खिड़की के पास जो टी टेबल सा बना होता है, उस पर मानसी को बैठा कर किस करने लगा. मैंने कहा- एक राउंड के बाद खाना खाएंगे.

उसने भी ज़िद नहीं की और मेरा साथ देने लगी. पांच मिनट के बाद ट्रेन का हॉर्न बजा तो समझ आया कि अब ट्रेन चलने वाली है.

मैंने तुरंत खिड़की का परदा साइड कर दिया.

मानसी बोली- ये क्या कर रहे हो? मैंने कहा- घबराओ नहीं, ट्रेन चलने वाली है.

जैसे ही ट्रेन चलना शुरू हुई, मैंने फट से लौड़े पर कंडोम पहना और मानसी की चूत में लंड पेलना शुरू कर दिया. मानसी की चूत आज भी वैसे ही कसी हुई थी जैसे पहली बार सेक्स के वक़्त थी.

अब धीरे धीरे ट्रेन और मैं अपनी अपनी रफ़्तार बढ़ाने लगे. हमारी मदभरी सिसकारियों की गूँज फिर से बढ़ने लगी.

ट्रेन स्टेशन को पार करके शहर के बीच से गुजर रही थी, कई जगह रेलवे क्रॉसिंग भी आ रही थीं. मैं मानसी की चुदाई के साथ साथ बाहर भी देख रहा था, क्या पता किसी ने हमें चुदाई करते देखा भी या नहीं.

आगे जब मेरा पैर दर्द देने लगा, तो मैं नीचे गद्दे पर लेट गया और मानसी मेरे ऊपर आकर मेरे लंड की सवारी करने लगी. मानसी सीधी बैठ कर अपने चूतड़ आगे पीछे कर रही थी.

मैं उसके स्तन अपनी गिरफ़्त में लेकर उनका मर्दन कर रहा था.

फिर मानसी सामने झुकी और उसने मेरे होंठों को अपने मुँह में भर लिया. वह मेरे होंठ ज़ोर ज़ोर से चबाने सी लगी.

मैं भी उसके दोनों चूतड़ों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी ताक़त लगा कर ऊपर नीचे करके चुदाई करने लगा. मैं अपना लंड पूरा बाहर निकालता और फिर एक झटका मार कर पूरा लंड अन्दर चूत में उतार देता.

मानसी इस तरह के हमलों से कांपने लगी. उसका मुँह मेरे मुँह में फंसा हुआ था … इस वजह से उसकी चीख भी नहीं निकल पा रही थी.

कुछ देर बाद जब हमें सांस लेने की दिक्कत होने लगी तो मैं जाकर सीट पर बैठ गया और मानसी को अपने ऊपर चढ़ा लिया.

दोस्तो, चलती ट्रेन में जब ट्रेन हिलती है उस वक़्त की चुदाई के जैसा मज़ा आपको कहीं भी नहीं मिलेगा.

मैंने मानसी को कमर से पकड़ कर झटके मारना शुरू किए. मानसी अपने घुटने मोड़ कर मेरे ऊपर चढ़ी हुई थी, तो वह भी गांड उछाल उछाल कर झटके मार रही थी.

दस मिनट बाद मानसी की सिसकारियां तेज होने लगीं और वह मुझसे लता सी लिपट गई. उसका शरीर अकड़ने लगा तथा उसकी चूत से अमृत धारा निकलने लगी. उसकी सांसें भारी हो चुकी थीं और दो बार झड़ने के कारण उसके शरीर की ताक़त खत्म हो चुकी थी.

वह मेरी बांहों में लिपटी हुई थी और मैं नीचे से धक्के लगाए जा रहा था. मानसी के झड़ने के कारण उसकी चुत काफ़ी गीली हो गई थी, जिसकी वजह से लंड आसानी से अन्दर बाहर हो रहा था.

मेरे हर झटके के साथ उसकी ‘आह’ निकल रही थी. कुछ देर बाद जब मेरा होने वाला था तो मैंने अपनी रफ़्तार और बढ़ा दी.

जल्द ही ज़ोर ज़ोर से झटके मारता हुआ मैं मानसी की चूत में झड़ गया. हालांकि मैंने कंडोम लगाया हुआ था तो ख़तरे की कोई बात नहीं थी.

लेकिन बाद में मानसी ने यह कह कर कंडोम लगाने के लिए मना कर दिया था कि वह दवा ले लेगी.

कुछ देर तक हम बिना कुछ कहे ऐसे ही पड़े रहे. फिर दस मिनट बाद मानसी मेरे ऊपर से हटी और मैंने भी कंडोम को एक खाली झिल्ली में भर कर किनारे रख दिया.

चलती ट्रेन में मानसी के साथ पहली चुदाई की कहानी को पढ़ कर आपको मजा आया होगा. फुल न्यूड सेक्स इन ट्रेन कहानी पर प्लीज अपने विचार मुझे जरूर लिख कर भेजें. अगले भाग में आपको आगे की सेक्स कहानी से रूबरू कराता हूँ. [email protected]

फुल न्यूड सेक्स इन ट्रेन कहानी का अगला भाग: ट्रेन के कूपे में सैटिंग संग चुदाई की मस्ती- 3

Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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