पति ने दिलवाया पत्नी को आशिक- 2

फ्री वाइफ पोर्न स्टोरी में मैंने अपनी गर्म पत्नी की अन्तर्वासना संतुष्टि के लिए उसकी सेटिंग अपने एक दोस्त से इस प्रकार करवाई कि दोस्त को मुझ पर शक भी ना हो!

कहानी के पहले भाग पत्नी की कामवासना पूर्ति की चाह में आपने पढ़ा कि परमीत हमारे घर आया हुआ था. मैं बहाने से अपनी बीवी को उसके साथ अकेली छोड़ गया था ताकि उन दोनों के बीच कुछ हो पाए.

अब आगे फ्री वाइफ पोर्न स्टोरी:

मैंने प्रिया से कहा बस यहीं तक? मैंने तो सोचा था कि तुम्हें तो वह पूरी तरह नंगी करके मसल चुका होगा. प्रिया बोली- तुम भी ना … मुझे परमीत से चुदवा कर ही छोड़ोगे. इसलिए परमीत को घर बुला आए हो! मैंने कहा- हां, आगे आगे देखो परमीत क्या क्या करता है तुम्हारे साथ!

प्रिया अब मुझे कहने लगी- तुम तो शांत कर दो मुझे! मैंने कहा- नहीं, अब तुम्हें परमीत ही शांत करेगा.

मैं प्रिया को तड़पती हुई छोड़ना चाहता था. और हुआ भी यही … उस रात मैंने प्रिया के साथ कुछ नहीं किया.

दूसरे दिन सुबह जब मैं उठा तो मैंने प्रिया से कहा- आज के दिन मैं ड्यूटी जा रहा हूँ. तुम एक काम करो, परमीत के साथ सेंट्रल मॉल घूम लो और उसके साथ फ्री हो जाओ ताकि आगे की परेशानी न हो! प्रिया ने हंसते हुए कहा- तुम नहीं मानोगे?

फिर प्रिया ने परमीत को मेरे सामने फोन किया और सेंट्रल मॉल आने को कहा और कहा- मैं 11 बजे मिलूंगी!

मैंने प्रिया से कहा- कुछ सेक्सी ड्रेस पहनकर जाना ताकि वह पागल हो जाए! फिर मैं अपने ड्यूटी को निकल गया.

शाम को जब मैं ड्यूटी से आया तो प्रिया घर पर तभी ही पहुंची थी, उसने कपड़े भी नहीं बदले थे.

प्रिया ने गुलाबी रंग की फ्रॉक पहनी थी जो उसके घुटनों तक आती थी. और उसने अपने बालों को खुला रखा था.

फिर मैंने उससे परमीत की मुलाकात के बारे में पूछा.

तो प्रिया की जबानी सुनिए उनकी मुलाकात:

मैं सेंट्रल मॉल पहुंची. मैंने परमीत को फोन किया.

उसने कहा कि 5 मिनट से पहुंच रहा हूं. मैंने उसे बताया कि मैं ग्राउंड फ्लोर पर हूं.

वह ग्राउंड फ्लोर आया, मैंने उसे देखा और परमीत के आते ही मैं उसके गले लगी और उसका वेलकम किया. परमीत ने भी इस मौके का फायदा उठाया और मुझे पीछे से टाइट पकड़ा. मेरे बूब्स उसके सीने से पूरे धंस गए.

फिर परमीत ने मेरा हाथ पकड़ा और हम लोग ऊपर मूवी देखने गए.

मूवी देखते वक्त परमीत ने बहुत शैतानियां की जैसे कभी वह मेरे कंधे पर हाथ रख देता, तो कभी मेरी जांघ सहला देता तो कभी मेरे चेहरे पर किस दे देता. कई बार उसने मेरे बूब्स को भी दबाया.

एक बार तो परमीत ने मेरे फ्रॉक के अंदर हाथ डाल मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी चूत भी सहला दी. मेरा तो उसी वक्त पानी निकल आया.

परमीत ने मुझसे कहा- तुम काफी हॉट लग रही हो! मैंने उससे कहा- तुम एक बार तो घर आओ और रुको रात को! तुम्हें प्रिया पूरी तरह मिलेगी. मैं मेरा असली रंग दिखाती हूं कि प्रिया क्या चीज़ है!

परमीत ने कहा- और राज? मैंने कहा- तुम राज की चिंता मत करो, वह मैं देख लूंगी!

फिर हमने कुछ खाना खाया मॉल में! उसके बाद परमीत ने मेरे लिए एक हॉट ब्रा पैंटी सेट खरीदा और कहा- इसमें तुम काफी हॉट लगोगी.

मैंने परमीत को कल शाम को आने के लिए बोल दिया और कहा- कल मैं यही पहनूंगी. और उसने चिढ़ते हुए कहा- लेकिन दिखाओगी नहीं? मैं मुस्कुरा दी.

फिर मैं घर की ओर निकल आई.

मैंने कहा- अच्छा किया जो परमीत को शाम को बुलाया!

प्रिया ने मुझसे रात को फिर से कहा- आज तो मुझे शांत कर दो! मैंने कहा- नहीं, तुम्हें तो परमीत ही शांत करेगा.

प्रिया ने मुझे काफी सिड्यूस करना चाहा लेकिन मैं उसे परमीत से ही चुदवाना चाहता था तो मैंने कुछ नहीं किया और उसे तड़पती हुई छोड़ दिया.

अगली सुबह मैं ड्यूटी के लिए निकला और जाते जाते मैंने प्रिया को पूरा प्लान बताया. जो आप लोग आगे कहानी में देखेंगे.

परमीत का फोन मुझे 2 बजे आया कि वह शाम 6 बजे तक फ्री हो जाएगा. मैंने परमीत से कहा- तुम 6:30 बजे तक घर आ जाना. मैं भी तब तक पहुंचता हूँ.

मैं फिर 5 बजे ही घर के पास एक नुक्कड़ पर आ गया जहाँ से मेरे घर साफ दिखता था. करीब 06:15 बजे परमीत टैक्सी से उतरा और घर पर पहुंच गया.

आगे की कहानी प्रिया की जबानी:

राज के बताए मुताबिक मैंने एक बहुत ही हॉट साड़ी ब्लाउज पहनी. काले रंग की साड़ी और काला ब्लाउज सामने से खुले गहरे गले का और पीछे से बैकलेस था जिसमें मेरी पूरी पीठ नंगी सी दिख रही थी. और मेरे बूब्स तो आधे से ज्यादा बाहर आ चुके थे.

मैंने बालों का जूड़ा बना रखा था, होंठों पर लिपस्टिक लाल रंग की साड़ी मेरे नाभि से दो इंच नीचे बांध रखी थी.

मेरी और राज की बातें फोन पर चल रही थी. परमीत जब गाड़ी से उतर रहा था, तभी राज ने मुझे फोन करके बता दिया कि परमीत नीचे आ गया है.

तभी परमीत ने आकर बेल बजाई. मेरी धड़कनें तेज हो गई क्योंकि मैं जानती थी कि हमारे प्लान के मुताबिक अब अगले 2 दिनों में मेरे साथ बहुत कुछ होने वाला था.

मैंने परमीत के लिए दरवाजा खोला, परमीत के हाथों में बैग था.

वह अंदर आया, उसने बैग रखा, तब तक मैंने दरवाजा बंद कर दिया.

परमीत ने मेरी तरफ देखा और बोला- तुम हर बार मुझसे मिल रही हो तो कुछ ज्यादा ही हॉट लग रही हो! मैंने कहा- तुम देखो, आगे आगे कैसे रंग दिखाती हूँ.

फिर मैंने कहा- बैठो, मैं पानी लेकर आती हूँ. मैं पानी लेकर गई और परमीत को पानी देने के लिए झुकी.

मैंने अपनी साड़ी का पल्लू नीचे जानबूझकर गिराया, परमीत की नजर मेरे बूब्स पर एकटक टिक गई. तो मैंने कहा- पानी तो पीओ. आगे जो देख रहे हो, वह भी पिलाऊंगी.

फिर मैं टेबल पर ट्रे रखकर परमीत की टांगों पर ही बैठ गई और परमीत के दोनों हाथ पकड़कर आगे कर लिए ताकि वह कुछ शैतानी न कर पाए.

अब परमीत अपने हाथों से मेरे पेट को सहला रहा था और मेरी लगभग नंगी पीठ, जो एक हुक से बंधी बैकलेस ब्लाउज में थी, उसके सामने थी. मेरी पीठ पर वह हल्के हल्के किस करने लगा.

बीच बीच में परमीत मेरी गर्दन पर भी किस कर लेता. मुझे मेरी चूत में अजीब सी गुदगुदी हो रही थी.

फ़िर परमीत से मेरी बात भी हो रही थी. परमीत अब आगे बढ़ने लगा था, उसने पीछे से मेरे बैकलेस ब्लाउज के ऊपर के बंद कर को अपने दांतों से खींच कर खोल दिया.

इससे पहले वह आगे बढ़ता, मैंने परमीत को रोका और कहा- रुको, राज के आने का समय भी हो रहा है. समय का इंतजार करो. अब तो तुम 2 दिन मेरे साथ हो. लेकिन परमीत अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, उसने मेरे बूब्स पर हाथ जमा लिया और हल्के हल्के दबाने लगा और साथ ही मेरी मेरे मेरी नंगी पीठ पर किस कर रहा था.

तभी राज का फोन आ गया और उसने फोन पर मुझसे पूछा- परमीत आया या नहीं? मैंने परमीत की ओर घूमकर उसके चेहरे को सहलाते हुए कहा- हां, भाई साहब आ चुके हैं, जस्ट अभी आए हैं! इतने में राज ने कहा- मैं भी नीचे ही पहुंच गया हूं जस्ट, 5 मिनट में ऊपर आ रहा हूँ.

फिर मैंने परमीत को एक स्मूच दिया और बताया- राज नीचे आ गया है.

यह सुनकर परमीत ने जल्दी से मेरे ब्लाउज के पीछे के बंद को बांधा. और मैंने अपनी साड़ी ठीक की.

फिर राज आ गए और परमीत से मिले और बातें करने बैठ गए.

करीब 7:15 बजे राज ने मुझ कुछ ठंडा गर्म लाने को कहा. मैं दो बॉटल्स लाई, एक परमीत और एक राज के लिए!

फिर दोनों की पार्टी शुरू हो गई हाल में ही!

राज के तीन पैग हो चुके थे लेकिन परमीत का एक पैग ही हुआ था. मैं खाना बनाने किचन में आ गई और जल्द ही खाना भी बना लिया.

पहले तो कुछ लेने राज आए … लेकिन बाद में परमीत आया जब उसे लगा की राज को चढ़ गई है.

परमीत ने मुझे पीछे से पकड़ा और मेरे गले पर किस किया, मेरे बूब्स भी दबाए और अपना खड़ा लन्ड मेरी गांड में दबाया. मैंने कहा- अभी नहीं! पर मैंने रिप्लाई में उसे किस दी.

मेरे किस देने के दौरान परमीत ने मेरी गान्ड को भी दबाया और मुझे उत्तेजित कर दिया. फिर परमीत वापिस चला गया.

खाना बनाने के बाद मैं भी उन दोनों के पास चली गई और सोफे पर राज के साइड में बैठ गई. वे दोनों अपनी बातों में मशहूर हैं.

लेकिन परमीत का ध्यान मेरी ओर ही था. मैं भी उसके सामने बैठे राज के बगल में कभी अंगड़ाई लेती … तो उसे अपनी कमर दिखाती … कभी साड़ी का पल्लू हल्का-हल्का गिरा कर उसे अपनी क्लीवेज के दर्शन करा देती!

परमीत मेरी ओर देखता और मुस्कुरा देता. आंखों ही आंखों में हमारा खेल चलता रहा.

एक दो बार मैं अपने होंठों पर जीभ फिराकर उसे ललचा देती. लेकिन मैं जानती थी कि राज की नजर कि हम दोनों पर है. आखिर राज ने ही मुझे सपोर्ट किया था इश्क करने के लिए!

कुछ देर बाद मैंने राज और परमीत से कहा- चलो आप दोनों ने बहुत पी ली है, अब खाना खा लो और सो जाओ!

फिर परमीत और राज ने गिलास खाली किया पर राज ने एक गिलास और भी लिया.

अब राज तो मानो आउट ऑफ कंट्रोल लग रहा था. मैं जानती थी कि राज एक्टिंग कर रहा है.

फिर मैंने दोनों के लिए खाना परोसा. डाइनिंग टेबल पर राज और मैं साथ साथ बैठे थे और परमीत मेरे सामने वाली कुर्सी पर था.

परमीत ने अपनी शैतानियां चालू कर दी. वह टेबल के नीचे से अपने पैर मेरे पैरों पर रखता और सहला देता. मुझे यह सब काफी अच्छा लग रहा था. मैं अब राज को आँखों ही आँखों से चिड़ा रही थी कि देखो कोई और तुम्हारी बीवी पर चांस मार रहा है. और परमीत की ओर देख मैं मुस्कुरा देती.

राज यह सब देख रहा था. मैं परमीत से हंस हंस कर बातें कर रही थी और राज समझ रहा था.

खाना खत्म होने के बाद राज और परमीत दोनों बेडरूम में चले गए और बातें करने लगे.

जब राज उठकर फ्रेश होने गया तो मैं परमीत के पास गई और उसे कहा- राज कुछ ही देर में गहरी नींद में सो जाएगा क्योंकि मैंने उसकी दाल में बेहोशी वाली दवा डाली है. लेकिन तुम जागे रहना, मैं आ रही हूं.

मैंने परमीत की दाल में सेक्स की गोली डाली थी ताकि रात का मजा दुगना हो जाए.

तभी मैं किचन में आ गई और सारा काम खत्म कर लिया.

मैंने बेडरूम में जाकर देखा तो राज लेट चुका था परमीत बैठा था. दोनों अभी भी बात कर रहे थे.

हमारे प्लान के मुताबिक 10 से 15 मिनट में राज सोने की एक्टिंग करने लगेगा. मैंने समय ना गंवाते हुए अपने कपडे बदले.

मैंने पहले से लहंगा चुन्नी निकाल कर रखी थी, साड़ी उतार के लहंगा चुन्नी पहन ली. लहंगा गोल्डन रंग का था और ब्लाउज वेलवेट डार्क ब्लू रंग का था, जिस पर चुन्नी पिंक रंग की थी.

मैंने अपने बालों को खोलकर स्ट्रेट कर लिया, हल्की लिपस्टिक पिंक रंग की लगा ली.

अपने सारे गहने तो मैंने उतार ही दिए थे पहले ही!

मेरा बैकलेस ब्लाउज आकर्षण का केंद्र था. सालों बाद मैंने यह ब्लाउज पहना था इसलिए ब्लाउज काफी तंग था. पर यह काफी ओपन था जिससे मेरे बूब्स लगभग बाहर निकलने को तैयार थे.

मैं अब तैयार थी. मैंने पहले बेडरूम में झांका तो राज सो चुके थे, यानि सोने की एक्टिंग कर रहे थे.

फिर मैंने परमीत को फोन किया कि राज को हिला कर देख लो.

उसने राज को हिलाया लेकिन राज की कोई प्रतिक्रिया ना मिलने पर परमीत ने कहा- राज तो गहरी नींद में है! मैंने कहा- वह नीद में नहीं, वह बेहोशी में है. वह अब 5-6 बजे से पहले नहीं उठेगा, मैं आ रही हूँ!

इस पर परमीत ने कहा- यहीं बेडरूम में? मैंने हाँ कहा- तुम चिंता मत करो, समझो राज है ही नहीं वहाँ पर! और वैसे भी बेड एक ही है घर में!

मैं चुनरी को एक कंधे पर रखकर बेडरूम में चली गई. बेडरूम में जाते वक्त मैंने मिरर में मेरा फिगर देखा … मैं एकदम से कयामत लग रही थी.

जैसे ही मैं बेडरूम के अंदर गई, परमीत बेड से उतर कर खड़ा हो गया और मेरी ओर बढ़ने लगा. मैं भी उसकी और बढ़ी और हम दोनों एक दूसरे के गले लग गए.

परमीत ने मुझे कसकर अपने गले लगाया. उसके दोनों हाथ मेरी पीठ पर थे.

हम लोग 2 मिनट एक दूसरे के गले लगे खड़े रहे. वहीं राज आंखें खोलकर हमें देख रहे थे, अपनी फ्री वाइफ पोर्न का मजा लेने को तैयार था.

परमीत अपने हाथों को मेरे कमर मेरे पीठ पर लगाकर मुझे अपने सीने से लगाए हुए खड़ा था, मेरे बूब्स परमीत की छाती से दब रहे थे.

मैंने कहा- इतने दिनों से मुझे तुमसे मिलने का इंतजार था. और मैं राज की ओर देखकर मुस्कुरा दी.

फ्री वाइफ पोर्न स्टोरी के 4-5 भाग होने वाले हैं. आप हर भाग पर अपने विचार मुझे भेजते रहिये. [email protected]

फ्री वाइफ पोर्न स्टोरी का अगला भाग: पति ने दिलवाया पत्नी को आशिक- 4

Priya Sharma

हैंलो जी! मैं प्रिया शर्मा हूँ - दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में डिग्री पकड़ने वाली और पिछले 5 साल से कहानी लेखन में अपना जलवा दिखाने वाली लेखिका। मुझे मानव मनों की चाहतें और इच्छाएँ पढ़ना बड़ा मज़ा आता है। मैं उस तरह की कहानियाँ लिखती हूँ जो आपके मन में छुपे हुए जज़्बातों को बाहर निकाल दें। मेरी कहानियाँ सैकड़ों पाठकों की गर्म रातों को और भी गर्म कर चुकी हैं। चलो, एक साथ मज़े करते हैं - पढ़ते हैं, महसूस करते हैं और जीते हैं!

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