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गुसलखाने का बंद दरवाज़ा खोला-3

प्रिय अन्तर्वासना के पाठकों आप सब को टी पी एल का हार्दिक अभिनन्दन! आशा करती हूँ कि आप सब अन्तर्वासना की रोचक रचनाएँ पढ़ कर अपनी वासना को जागृत एवं उसमे लगातार वृद्धि कर रहे होंगे! अन्तर्वासना की रचनाओं के इस विशाल सागर रूपी संग्रह की वृद्धि के लिए मैं एक रचना और ले कर आई हूँ! sexy story

आशा करता हूँ की आपने इसके पहले का भाग पढ़ा होगा, अगर नहीं पढ़ा तो ज़रूर पढ़िए..

antarvasnasexstories.org par sexy hindi story jaise mast antarvasna free sex kahaniSexy Hindi Story > गुसलखाने का बंद दरवाज़ा खोला-2

मैंने स्टूल को भी उठाया और बालकनी लांघ कर अपने घर पहुँच गया!

घर के अन्दर जाने से पहले मैंने नेहा को एक बार पीछे मुड कर देखा और फिर उसे ‘बाई’ कह कर घर के अन्दर चला गया!

घर पहुँचते ही मैंने अपनी टी-शर्ट उतारी और उसमे से नेहा की महक को सूंघने लगा।

उस टी-शर्ट में जहाँ जहाँ पर नेहा स्तन छुए थे उन जगहों को चूमा!

फिर मैंने उस टी-शर्ट को दोबारा पहन लिया ताकि मुझे ऐसा एहसास होता रहे कि मैंने नेहा को अपने साथ चिपका लिया है!

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मैं नेहा की बातें सुन कर अब अपना संयम खो चुका था इसलिए गुसलखाने में जा कर हस्त-मैथुन किया और मानसिक एवं शारीरिक तनाव को ढीला किया।

अगले दिन सुबह जब मैं उठा तो मौसम बहुत ही सुहावना था क्योंकि धूप निकली हुई थी और आकाश में छोटे छोटे बादलों के टुकड़े हल्की हवा में टहल रहे थे।

मैं जब बालकनी में आया तो मैंने नेहा को अपनी बालकनी में बैठे देखा।

मुझे देखते ही उसके मुस्करा कर कहा- शुभ दिवस, रवि!

मैंने भी उत्तर में कहा- शुभ दिवस, नेहा! तुम कैसी हो?

उसने कहा- मैं तो बिल्कुल ठीक हूँ तुम कैसे हो?

मैंने हँसते हुए कहा- मैं भी ठीक हूँ! आज तुम कौन से गुसलखाने को बंद कर रही हो?

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नेहा ने मेरी बात सुन कर मुझे घूरते हुए कहा- क्या मतलब? क्या मैं रोज़ ही गुसलखाने बंद करती रहती हूँ?

मैंने कह दिया- नहीं, मैंने तो वैसे ही पूछ लिया था! आज तो तुम अपने गुसलखाने में बंद होने से पहले अपने कपड़े साथ ले लेना क्योंकि आज मदद के लिए मेरी सेवायें उपलब्ध नहीं होंगी।

वह गंभीर हो कर बोली- क्यों, क्या कहीं जा रहे हो? मैंने तो सोचा था कि आज बालकनी में बैठ कर तुमसे पूरा दिन बातें करती रहूंगी।

मैंने उसकी गंभीरता पर हंसते हुए बोला- घर गृहस्थी का सामान लेने! आज सुबह काम पर जाने से पहले भाभी बाज़ार से सामान लाने की एक सूची बना कर दे गई है! मुझे समझ नहीं आ रहा कि यह सामान कहाँ से मिलता है।

मेरी बात सुन कर नेहा ने पूछा- क्या क्या सामान लाना है?

तो मैंने कमरे में जाते हुए उसे कहा- इधर अंदर आकर देख लो।

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मेरे कहने पर नेहा बालकनी लांघ कर मेरे कमरे में आ गई और बोली- सामान की सूचि दिखाओ।

मैंने भाभी की लिखी हुई सूचि उसके हाथ में दे दी और वह उसे पढ़ने में मग्न हो गई।

क्योंकि मुझे मूत्र आया था इसलिए मैं उसे कमरे में छोड़ कर गुसलखाने में चला गया!

मूत्र विसर्जन से निपट कर मैं कमरे में आया तो नेहा से पूछा- क्या तुमने सामान की सूचि पढ़ ली है? यह सब सामान कहाँ मिलेगा?

मेरी बात सुन कर नेहा तुरंत बोली- हाँ पढ़ ली है! यह सभी सामान यहाँ से लगभग पांच किलो मीटर दूर एक मॉल और एक मेगा स्टोर है वहाँ से मिल जायेगा।

मैंने उससे कहा- क्या तुम मेरे साथ यह सामान खरीदने के लिए चल सकती हो? वापसी में हम दोपहर का खाना किसी अच्छे से रेस्टोरेंट में ही खा लेंगे।

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