माँ बेटी एक साथ चुदवाने गई

मैं एक पवित्र परिवार की कुलवधू हूँ. मेरी उम्र ३७ वर्ष की है, मेरे एक बच्ची है, १८ साल की. मैं आपसी मर्जी से अपने पति से अलग रह रही हूँ. मेरी बच्ची निशाबाला भी मेरे साथ रहती है. अलग रहने का कारण मेरे सेक्स सम्बन्धी स्वतंत्र विचार हैं. मैं पुरुषों को कामसुख देने में विश्वास रखती हूँ, विशेष कर प्रौढ़ और वृद्ध मर्दों को. Desi Randi Chudai Story

मेरा मानना है कि यह उनकी आर समाज की सच्ची सेवा है. मुझे यह भी पता है कि ऐसे पुरुषों से मैं ज्यादा धन हासिल कर सकती हूँ. धन के बदले परुष की तन-मन से सेक्स-सेवा मेरा धर्म है. मेरी बेटी भी इस काम को करना अच्छा समझती है. मेरी एक फ्रेंड है लिज्जत रानी, वह भी मेरी उम्र की है.उसकी दो जवान बेटियाँ, एक १८ की व दूसरी १९ साल की है.

उसने मुझे बताया की वो एक एस्कोर्ट क्लब में काम करती है, यह खास किस्म का एस्कोर्ट है जो राजनेताओं, सरकारी मंत्रियों, जज, पुलिस अफसर, और मिलिटरी के लोगों को कामुक लडकियां, शादीशुदा औरतें सप्लाई करता है. मेरी एक दूसरी फ्रेंड जो ३३ वर्ष की है , वह वेब सीरीज पोर्न में काम करती है.

इंटरनेट पर उसने मुझे अपने काम की दो फ़िल्में ऐसी दिखाई जिसे देख मेरे होश उड़ गए. बदन में सेक्स का करेंट दौड़ गया.उसने अपनी पहली प्पहली फिल्म ”बहूरानी का नखरा” दिखाई जहां एक मोटा ५८ साल का मर्द उसे चोद रहा था. इसमें मेरी फ्रेंड बहुत कीमती वस्त्र व गहने पहने हुए थी, मांग में सिंदूर, वेणी में फूलों का गजरा था.

वह मस्ती में हुमक-हुचक हो चुदवा रही थी. दूसरी फिल्म ” माल मलाला लब-लब लबाब” थी जो उसकी बेटी पर फिल्माई गई थी. मैंने लिज्जत रानी से बात की ताकि उसके बताए एस्कोर्ट क्लब में मुझे भी भद्र पुरुषों को संग सुख, काम-सख, रति-सुख देने का मौका मिले.

मैं अपने साथ अपनी बच्ची को भी ले गई थी. सौभाग्य से उस समय मिलिटरी के एक आला अफसर ताज़ा माल देखने आए हुए थे. उनके हाथ में एक डंडा था, सामने एस्कोर्ट क्लब में नई-नई आई दो लड़कियां व एक नवविवाहिता औरत भी थी.

कर्नल भोमसिंह, सीनियर मिलिटरी अफसर, अपने डंडे से इस ताज़ा माल की परख कर रहे थे. अचानक उनकी नजर मुझ पर और में री बच्ची पर पड़ी.. एस्कोर्ट क्लब की संचालिका ने हम दोनों के बारे में उनको बताया कि हम दो अभी-अभी दाखिल हुई हैं. मेरी बच्ची स्कर्ट-टॉप्स में थी, मैं जीन्स में.

भोमसिंह ने जब हम दो मां-बेटी को कामुक लालसा से देखा, उनके मुंह में पानी आ गया; जीभ अपने ओठों पर फिराई, मुझे व मेरी बच्ची को ताकते हुए वो क्लब -संचालिका ले बोले – “मैं दो दिन के लिए अपने फार्म हाउस जा रहा हूँ सैर सपाटे को, ये दोनों मेरे साथ मुझे आराम देने चल सकती है?? दोनों को समझा देना मैं क्या चाहता हूँ.”

इस पर क्लब संचालिका ने मुझे बताया कि कर्नल तुम्हारी बिटिया को मज़ा ले-ले चोदेंगे. मैंने कहा, ‘ मेरी बच्ची एकदम कच्ची-कुंवारी है, सेक्सी है, नखरे के साथ कर्नल को मज़ा देगी. अब हम फ़ार्म हांउस पहुंचे. मेरी बच्ची तंग स्कर्ट टॉप्स में थी. उसने भीतर ब्रा नहीं पहनी थी, पर स्कर्ट के भीतर एक झीनी पेंटी जरूर थी.

गले में टाई थी. उसके मम्मे छोटे व कच्चे थे. गांड छोटी थी पर उठी हुई. चूत बहुत ही नन्ही और संकरी थी, बिना बाल की.गाल भरे-भरे थे, सेब की तरह लाल. फार्म हाउस के बड़े हॉल में सब सुविधा थी. एक बड़ा सोफे था, एक तख़्त, कुछ अलग तरह की कुर्सियां, इनमें एक झूलेवाली कुर्सी भी थी, फर्श पर कालीन था, एक जगह गद्दा भी. . . फार्म हाउस एक तरह का रंगमहल था.

आज के दिन मैं खुद अपनी बच्ची को मोटे, बलिष्ट मर्द से चुदवाने चली थी. कर्नल बच्ची के सामने आ गए थे. उन्होंने उसके सर के बालों पर हाथ फिराया, फिर गाल सहलाए, फिर उन पर चुटकी काटी. वे अभी निर्वस्त्र नही हुए थे. वे पेंट पहने थे. मैंने उनकी पेंट की ज़िप पर हाथ फिराया, और कर्नल का लंड टटोला.

कर्नल ने मेरी बच्ची की टाई उतारी, फिर टॉप्स. भीतर ब्रा नहीं थी. अब वे बच्ची की छोटी कम उठी छातियाँ रगड़ मसल रहे थे. इसी वक्त मैंने सर को नंगा करना शुरू किया, सर ने अब एक हाथ मेरी बिटिया के स्कर्ट में डाल उसकी पेंटी टटोलनी शुरू की.

मैंने अपनी बिटिया निशाबाला का स्कर्ट खींच कर खोल दी. बड़ी छोटी गांड थी, बेटी की, पर फर्म, .गुदाज, गोरीगट्ट, चिकनी .सर ने आनन् फानन में मेरी बेटी कीई चड्डी भी खोल अलग की. वे उसकी नन्ही गांड को चाट रहे थे. बच्ची नखरे के साथ ‘ आह, आह” करने लगी. मैंने अपनी बच्ची को उलटाया ताकि सर उसकी नन्ही चूत देख लें.

उनका मोटा ८ इंच का लंड इतनी नन्ही चूत में कैसे फंसेगा, यह मैं सोच रही थी. मैंने उसकी, अपनी बच्ची की टंगे भरपूर चौड़ी की और सर से कहा पहले वे अंगुली फंसा कर चूत चोदें. उन्होने अंगुल मारी, मैंने भी दोनों हाथों की अँगुलियों से चूत चौड़ी की, फिर सर ने मेरी बिटिया रानी की चूत में अपना लंड ठोका, घपाक घपाक, फच-फच. कर्नल सर ने नन्ही-नाजुक निशाबला को ४५ मिनट चोदा.

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Ritu Agarwal

हैलो दोस्तों! मैं ऋतु अग्रवाल हूँ - कानपुर विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में मास्टर डिग्री पाने वाली और पिछले 5 साल से हिंदी में वो कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी रूह को छू लें और तन को तड़पा दें। मैं मानव व्यवहार और इंसानी इच्छाओं पर गहरा रिसर्च करती हूँ ताकि हर कहानी असली और दिलकश हो। मेरी कहानियाँ लाखों पाठकों ने पढ़ी हैं और हर कोई वापस आता है। मैं समझती हूँ आप क्या चाहते हैं - और वही लिखती हूँ जो आपको पागल कर दे। तो चलो, मेरी कहानी से आज की रात को खास बनाते हैं!

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