पिछला भाग पढ़े:- साक्षी दीदी और मेरी सेक्स कहानी-6
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
साक्षी दीदी सच में मेरे लिए किसी पहेली की तरह थी। मैं कभी समझ ही नहीं पाता था कि उनके मन में क्या चल रहा है और शायद उनकी यही बात मुझे उनके लिए और भी ज़्यादा पागल कर रही थी। उस दिन जो कुछ हमारे बीच हुआ था, वह मेरे दिमाग से निकल ही नहीं रहा था। उन्होंने मेरे लंड को अपने गर्म मुँह में लिया था और उसके बाद ऐसे आराम से घर में घूम रही थी, जैसे हमारे बीच कुछ हुआ ही ना हो। उन्हें इस तरह देख कर कभी-कभी तो मुझे खुद समझ नहीं आता था कि वह आखिर चाहती क्या थी।
ऊपर से उनके हाथ की चोट की वजह से माँ हर समय उनके आस-पास रहती थी। वह क्या कर रही थी, कहाँ जा रही थी, उन्हें किसी चीज़ की ज़रूरत तो नहीं—माँ का पूरा ध्यान उन्हीं पर था। इसी वजह से मुझे कई दिनों से उनके साथ अकेले रहने का एक भी मौका नहीं मिल रहा था। जितना ज़्यादा मैं उनसे दूर रह रहा था, उतना ही ज़्यादा उनके करीब जाने के लिए पागल होता जा रहा था।
घर में जब भी वह अपनी सफेद फिट टी-शर्ट पहन कर मेरे सामने आती, मेरी नज़रें अपने आप उनकी तरफ चली जाती थी। उन्होंने उसके अंदर ब्रा नहीं पहनी होती थी और पतले कपड़े के ऊपर से उनके सख्त निपल्स साफ दिखाई देते थे। उन्हें इस तरह अपने सामने देख कर मेरे दिमाग में फिर से वही सब चलने लगता था जो उस दिन हमारे बीच हुआ था।
उन्हें देख कर मेरे पूरे शरीर में एक अलग-सी गर्मी दौड़ने लगती थी। मैं बार-बार उस पल के बारे में सोचता था जब उनका तंग और गर्म नाज़ुक हिस्सा मेरे लंड को अपने अंदर कस कर पकड़ चुका था। साथ ही मुझे उनके होंठों की वह गीली गर्माहट याद आती थी, जिसे मैं एक बार महसूस कर चुका था। मेरी आँखों के सामने बार-बार यही तस्वीर आती कि मेरा लंड उनके नाज़ुक हिस्से के अंदर जा रहा है, वह धीरे-धीरे गीली होती जा रही हैं और उनके मुँह से आहें निकल रही हैं।
मुझे इस बात पर बहुत गुस्सा आ रहा था कि मैं चाह कर भी उनके करीब नहीं जा पा रहा था। माँ की वजह से वह लगभग हर समय मेरी नज़रों के सामने होती थी, लेकिन फिर भी मैं उनके साथ अकेला नहीं रह सकता था। यह बात मुझे और भी ज़्यादा बेचैन कर रही थी। मैं बस किसी ऐसे मौके का इंतज़ार कर रहा था जब माँ कुछ समय के लिए उनके आस-पास ना हों और मैं साक्षी दीदी के साथ अकेला रह सकूँ।
फिर अचानक एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने सब कुछ बदल दिया। साक्षी दीदी के फोन पर एक ईमेल की नोटिफिकेशन आई। एक बड़ी कंपनी ने उन्हें जॉब इंटरव्यू के लिए बुलाया था। उन्होंने करीब एक महीने पहले उस नौकरी के लिए अप्लाई किया था, इसलिए अचानक इंटरव्यू का ईमेल देख कर पूरे घर में हलचल मच गई।
माँ और पिता जी दोनों बहुत खुश थे, लेकिन एक परेशानी थी। पिता जी को ऑफिस का ज़रूरी काम था, इसलिए वह उनके साथ नहीं जा सकते थे। माँ के लिए भी उनके साथ जाना मुश्किल था। ऊपर से साक्षी दीदी के हाथ की चोट अभी पूरी तरह ठीक नहीं हुई थी, इसलिए उन्हें अकेले इतनी दूर भेजना भी सही नहीं था।
हम सब हॉल में बैठ कर इसी बारे में बात कर रहे थे कि अब क्या किया जाए। तभी पिता जी की नज़र मुझ पर पड़ी। उन्होंने कहा, “तुम साक्षी को इंटरव्यू के लिए लेकर क्यों नहीं चले जाते?”
उनकी बात सुनते ही मैं कुछ पल चुप रहा, लेकिन अंदर ही अंदर मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। मैं गाड़ी चला सकता था और इंटरव्यू खत्म होने के बाद उन्हें सुरक्षित वापस घर भी ला सकता था। माँ को भी यह बात सही लगी, क्योंकि उन्हें मुझ पर पूरा भरोसा था। आखिर मैं साक्षी दीदी का छोटा भाई था, इसलिए किसी के मन में कोई सवाल आने की वजह ही नहीं थी।
कुछ देर की बात के बाद तय हो गया कि मैं ही साक्षी दीदी के साथ जाऊँगा। माँ-पिता जी के लिए यह बस अपनी बेटी को सुरक्षित इंटरव्यू के लिए भेजने का सबसे आसान तरीका था। लेकिन मेरे लिए इसका मतलब कुछ और ही था। कई दिनों से मैं साक्षी दीदी के साथ अकेले रहने के जिस मौके का इंतज़ार कर रहा था, वह मौका आखिर मुझे मिल गया था।
इंटरव्यू सुबह जल्दी था और जिस शहर में जाना था, वह हमारे घर से कई घंटे दूर था। इसलिए तय हुआ कि हम आधी रात को ही घर से निकल जाएँगे, ताकि सुबह समय पर वहाँ पहुँच सकें। रात करीब बारह बजे मैं तैयार होकर कार में बैठ गया और साक्षी दीदी का इंतज़ार करने लगा। कुछ ही मिनटों बाद घर का दरवाज़ा खुला और वह बाहर निकली। उन्हें देखते ही कुछ पल के लिए मेरी साँसें जैसे रुक गई। मेरा गला सूखने लगा और पैंट के अंदर मेरा लंड बुरी तरह सख्त होकर फड़कने लगा।
उन्होंने सफेद रंग की शर्ट और घुटनों तक आने वाली लाल स्कर्ट पहनी थी। उनके होंठों पर गहरी लाल लिपस्टिक लगी थी, जिससे उनके होंठ और भी ज़्यादा रसीले और चूमने लायक लग रहे थे। उन्होंने अपने बालों को पीछे की तरफ कस कर बाँध रखा था, जिससे उनकी गर्दन और कान पूरी तरह दिखाई दे रहे थे।
जैसे-जैसे वह कार की तरफ आ रही थी, मेरी नज़रें उनसे हट ही नहीं रही थी। उन्होंने अपनी सफेद शर्ट को लाल स्कर्ट के अंदर कस कर टक किया हुआ था। शर्ट उनके भारी स्तनों पर इतनी टाइट थी कि उनका पूरा उभार साफ दिखाई दे रहा था और उनके हर कदम के साथ हल्का-हल्का हिल रहा था।
टाइट शर्ट और स्कर्ट की वजह से उनके शरीर का हर उभार साफ दिखाई दे रहा था। उनकी पतली कमर, भारी स्तन और चलते समय हिलता हुआ पिछवाड़ा देख कर मैं कार में बैठे-बैठे ही बेचैन हो गया। मेरा लंड पैंट के अंदर पत्थर की तरह सख्त हो चुका था।
वह जितना मेरे करीब आ रही थी, मेरे लिए खुद पर काबू रखना उतना ही मुश्किल होता जा रहा था। मेरा मन कर रहा था कि मैं उसी समय कार से बाहर निकलूँ, उन्हें अपनी बाँहों में कस कर पकड़ लूँ और उनकी गर्दन से लेकर उनके लाल होंठों तक चूमता चला जाऊँ।
लेकिन मैं चुप-चाप अपनी जगह बैठा उन्हें अपनी तरफ आते हुए देखता रहा। मेरे दिमाग में बस यही बात घूम रही थी कि कुछ ही देर बाद हम घर और माँ-पिता जी से मीलों दूर होंगे। कई दिनों से मैं साक्षी दीदी के साथ अकेले रहने के जिस मौके का इंतज़ार कर रहा था, वह आखिर मेरे सामने था।
मैंने गाड़ी स्टार्ट की और धीरे-धीरे उसे सड़क पर ले आया। आधी रात का समय था और चारों तरफ घना अंधेरा छाया हुआ था। सड़क पर भी बहुत कम गाड़ियाँ दिखाई दे रही थी। हमारी कार की खिड़कियाँ काली थी, इसलिए बाहर से अंदर देख पाना भी आसान नहीं था। रात का अंधेरा, खाली सड़क और कार के अंदर सिर्फ हम दोनों का होना मुझे एक अलग ही एहसास दे रहा था।
कुछ देर तक साक्षी दीदी चुप-चाप खिड़की से बाहर देखती रहीं। शायद इंटरव्यू की वजह से उन्हें सुबह जल्दी उठना पड़ा था और अभी कई घंटों का सफर बाकी था। थोड़ी देर बाद उन्होंने सीट पर आराम से सिर टिकाया और अपनी आँखें बंद कर ली।
कुछ ही मिनटों में उनकी साँसें धीमी और गहरी होने लगी। वह शायद झपकी लेने लगी थी। कार के अंदर अब पूरी तरह चुप्पी थी। बस इंजन की हल्की आवाज़ और उनकी साँसें सुनाई दे रही थी। वह सीट पर आराम से सो रही थी और हर साँस के साथ उनका सीना धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हो रहा था।
मैं गाड़ी चला रहा था, लेकिन बीच-बीच में मेरी नज़र अपने आप उनकी तरफ चली जाती थी। उनकी सफेद शर्ट के बटन मेरी आँखों के सामने थे और टाइट कपड़े के नीचे उनके शरीर की हर हलचल साफ दिखाई दे रही थी।
झपकी लेते समय वह सीट पर थोड़ा और आराम से फैल कर बैठ गई थी। उनके पैर हल्के-से एक तरफ हो गए थे और बैठने की वजह से उनकी लाल स्कर्ट भी घुटनों से थोड़ा ऊपर खिसक गई थी। स्कर्ट के नीचे उनकी मुलायम जाँघों का पहले से ज़्यादा हिस्सा दिखाई देने लगा था। कार के डैशबोर्ड से आती हल्की रोशनी कभी उनकी सफेद शर्ट पर पड़ती, तो कभी उनकी खुली जाँघों पर।
मैंने एक नज़र उनकी तरफ देखा और फिर तुरंत अपना ध्यान सड़क पर लगाने की कोशिश की। लेकिन कुछ ही देर बाद मेरी नज़र फिर उनकी तरफ चली गई। वह बिना किसी बात से अनजान आराम से सो रही थी और हर साँस के साथ उनका सीना धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हो रहा था। उनकी थोड़ी ऊपर खिसकी हुई स्कर्ट और उसके नीचे दिखाई देती मुलायम जाँघों ने मेरे लिए अपनी नज़रें उनसे हटाना और भी मुश्किल कर दिया था।
करीब एक घंटे तक लगातार गाड़ी चलने के बाद साक्षी दीदी ने धीरे-धीरे अपनी आँखें खोली। वह अभी भी नींद में थी। उन्होंने कुछ पल आँखें आधी बंद रख कर बाहर देखा, जैसे उन्हें समझने में थोड़ा समय लग रहा हो कि हम कहाँ थे।
सोते समय उनके बाल थोड़े बिखर गए थे और उनकी शर्ट का ऊपर का एक बटन भी हल्का-सा खुल गया था, जिससे उनके स्तनों का उभार पहले से ज़्यादा दिखाई दे रहा था। उन्होंने अपने ठीक हाथ से आँखें मली, फिर सीट पर थोड़ा सीधा होकर बैठ गई। सोने की वजह से उनके शरीर में हल्की अकड़न आ गई थी, इसलिए उन्होंने सावधानी से अपनी गर्दन और कंधे को थोड़ा घुमाया, जबकि प्लास्टर वाला हाथ आराम से अपनी जगह रखा रहा।
फिर उन्होंने अपने ठीक हाथ से बिखरे हुए बालों को पीछे किया और नींद से भरी धीमी आवाज़ में मुझसे कहा, “गोलू… क्या तुम गाड़ी रोक सकते हो? मुझे बहुत तेज़ पेशाब लगी है।”
मैंने बिना कुछ पूछे सड़क के आस-पास कोई जगह देखनी शुरू कर दी। उस समय सड़क लगभग पूरी तरह खाली थी और दोनों तरफ बस अंधेरा दिखाई दे रहा था। कुछ दूर जाने के बाद मुझे सड़क के किनारे एक खाली जगह दिखाई दी। मैंने गाड़ी की रफ्तार कम की और उसे वहीं रोक दिया।
गाड़ी रुकते ही साक्षी दीदी ने दरवाज़ा खोला और नीचे उतर गई। लेकिन बाहर निकलते ही वह वहीं रुक गई। उन्होंने पहले सड़क के एक तरफ देखा और फिर दूसरी तरफ। चारों तरफ घना अंधेरा था। दूर-दूर तक कोई घर या दुकान दिखाई नहीं दे रही थी।
साक्षी दीदी कुछ पल वहीं खड़ी आस-पास देखती रही। फिर वह वापस मेरी तरफ मुड़ी। उन्होंने थोड़ी घबराई हुई आवाज़ में कहा, “गोलू… क्या तुम भी बाहर आ सकते हो? यहाँ बहुत अंधेरा है और मुझे डर लग रहा है।”
मैं गाड़ी से बाहर निकला और अंधेरे में उनके पास जाकर खड़ा हो गया। वह काफी परेशान लग रही थी। एक हाथ में प्लास्टर होने की वजह से वह अपने ठीक हाथ से बार-बार स्कर्ट की ज़िप और बटन खोलने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उनसे वह ठीक से खुल नहीं रहा था। ऊपर से उन्हें बहुत तेज़ पेशाब लगी थी, इसलिए उनकी बेचैनी और बढ़ती जा रही थी।
कुछ देर कोशिश करने के बाद उन्होंने मेरी तरफ देखा और बहुत झिझकते हुए धीमी आवाज़ में कहा, “गोलू… क्या तुम मेरी मदद कर सकते हो? मुझसे ये खुल नहीं रहा है।”
उनकी आवाज़ सुन कर मेरे अंदर की बेचैनी और बढ़ गई। मैंने एक गहरी साँस ली और उनके थोड़ा और करीब जाते हुए कहा, “बिल्कुल दीदी, इसमें शर्माने वाली कोई बात नहीं है।”
मैं उनके बिल्कुल करीब पहुँच गया। हमारे बीच अब इतनी कम दूरी थी कि उनकी साँसों और शरीर की गर्माहट को महसूस कर सकता था। मैंने अपने हाथ उनकी कमर के पास ले जाकर धीरे से स्कर्ट का बटन खोला और फिर ज़िप नीचे कर दी। जैसे ही स्कर्ट ढीली हुई, मैंने उसे धीरे-धीरे नीचे सरका दिया। उसके नीचे पहनी हुई बैंगनी रंग की पैंटी साफ दिखाई देने लगी। मैंने बिना देर किए उसे भी धीरे से नीचे खिसका दिया।
बहुत दिनों के इंतज़ार के बाद उनका नाज़ुक और रसीला हिस्सा एक बार फिर सीधे मेरी आँखों के सामने था। अंधेरे में भी उसकी गुलाबी बनावट और हल्की-सी नमी साफ दिखाई दे रही थी। पिछली बार मेरा लंड उसके अंदर था, लेकिन आज मैं बस वहीं खड़ा उसे घूर रहा था। उसे इस तरह अपने इतने करीब देख कर मेरा लंड पैंट के अंदर बुरी तरह सख्त हो गया था, जैसे अब वह किसी भी पल बाहर निकलने को तैयार हो।
मेरे लिए अपनी नज़रें हटाना मुश्किल हो गया। साक्षी दीदी ने मुझे इस तरह देखते हुए पकड़ लिया। वह शर्मीली आवाज़ में बोली, “गोलू… इस तरह मत देखो ना… मुझे बहुत शर्म आ रही है।”
इतना कह कर वह धीरे से नीचे बैठ गई। अपने ठीक हाथ से उन्होंने सहारे के लिए कार का दरवाज़ा पकड़ लिया, जबकि प्लास्टर वाला हाथ सावधानी से अपने पास रखा। उनकी लाल स्कर्ट और बैंगनी पैंटी नीचे पैरों के पास थी। वह मेरे सामने इस हालत में बैठी थी और मैं कुछ दूरी पर खड़ा था।
जैसे ही उन्होंने पेशाब करना शुरू किया, उनका नाज़ुक हिस्सा—जो कुछ देर पहले से ही मेरी नज़रों के सामने था—हल्का-सा खुलने लगा। पेशाब की धार उनकी जाँघों के बीच से होती हुई नीचे गिर रही थी।
मैं उनके ठीक सामने खड़ा था और चाह कर भी अपनी नज़रें वहाँ से नहीं हटा पा रहा था। उनका नाज़ुक हिस्सा उस समय और भी साफ दिखाई दे रहा था। वह बार-बार अपनी नज़रें दूसरी तरफ कर रही थी। उनके चेहरे से साफ पता चल रहा था कि मेरे इतने पास खड़े होने की वजह से वह बहुत अजीब महसूस कर रही थी। कुछ देर बाद उन्होंने झिझकते हुए मेरी तरफ देखा और धीमी आवाज़ में कहा, “गोलू… कम से कम दूसरी तरफ तो देखो।”
मैं बस उन्हें देखता रहा। मेरी नज़रें बार-बार उनके नाज़ुक हिस्से और उनके शरीर पर जा रही थी। जब उनका काम पूरा हो गया, तो मैं आगे बढ़ा और उनकी बैंगनी पैंटी ऊपर करने के बाद स्कर्ट ठीक करने में उनकी मदद की। उसके बाद हम दोनों वापस कार में आकर बैठ गए।
कार के अंदर पूरी तरह चुप्पी थी, लेकिन मेरे अंदर की बेचैनी कम होने का नाम नहीं ले रही थी। मैं गाड़ी स्टार्ट करने के लिए आगे बढ़ा ही था कि अचानक साक्षी दीदी ने मेरा हाथ पकड़ लिया।
मैंने हैरानी से उनकी तरफ देखा। वह कुछ पल चुप-चाप मेरी आँखों में देखती रही और फिर बोली, “गोलू, मैं जानती हूँ कि तुम्हारी पैंट के अंदर तुम्हारा लंड कितना सख्त हो चुका है और तुम अभी मेरे साथ क्या करना चाहते हो। लेकिन क्या तुम थोड़ा इंतज़ार कर सकते हो? मैं पहले बिना किसी परेशानी के अपना इंटरव्यू पूरा करना चाहती हूँ।”
मैंने कुछ नहीं कहा। बस धीरे से अपना सिर हिला दिया। लेकिन मेरे चेहरे और मेरी आँखों से साफ दिखाई दे रहा था कि मेरे लिए इंतज़ार करना कितना मुश्किल हो रहा था।
मेरी हालत देख कर उनके चेहरे पर हल्की-सी शरारती मुस्कान आ गई। वह कुछ पल मुझे देखती रही और फिर धीमी आवाज़ में बोली, “अपनी पैंट नीचे करो, गोलू। मुझे दिखाओ कि तुम्हारा लंड अभी कितना सख्त है।”
मैंने बिना एक पल की देरी किए अपनी पैंट नीचे सरका दी और अपना सख्त, फड़कता हुआ लंड उनके सामने कर दिया। इतने समय से पैंट के अंदर दबे रहने के बाद बाहर आते ही वह पूरी तरह तन कर खड़ा हो गया था। मेरी साँसें तेज़ चल रही थी और मेरा दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि मुझे उसकी धड़कन साफ महसूस हो रही थी। साक्षी दीदी की नज़र सीधे मेरे लंड पर जाकर टिक गई। वह कुछ पल बिना कुछ बोले बस उसे देखती रही, जबकि मैं उनकी आँखों में आने वाले बदलाव को ध्यान से देख रहा था।
उन्होंने मेरे लंड को कुछ पल तक देखा। फिर थोड़ी शरारत और थोड़ी गंभीरता के साथ बोली, “गोलू, यह तो बहुत ज़्यादा सख्त हो गया है। हमें अभी इसका कुछ करना पड़ेगा, वरना इंटरव्यू तक पहुँचने के पूरे रास्ते तुम इसी हालत में बैठे रहोगे और हम दोनों का ध्यान बस इसी पर रहेगा।”
उनकी बात सुनते ही मेरे अंदर की बेचैनी और बढ़ गई। जिस तरह वह बिना नज़रें हटाए मेरे लंड को देख रही थी, उससे मेरे लिए खुद पर काबू रखना और मुश्किल हो रहा था। मैंने उनकी तरफ देखते हुए तड़पती आवाज़ में कहा, “तो फिर कुछ करो ना, दीदी।”
उन्होंने मुझे एक शरारती मुस्कान दी और धीरे-धीरे मेरी तरफ खिसक कर आई। अगले ही पल उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और मुझे गहराई से चूमने लगी। उनका किस इतना अचानक था कि कुछ पल के लिए मैं बाकी सब भूल गया।
फिर वह मुझसे अलग हुई और धीरे-धीरे नीचे झुकने लगी। कार की छोटी सीट और कम जगह की वजह से उनके लिए ठीक से बैठना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने अपने घायल हाथ का ध्यान रखते हुए जैसे-तैसे खुद को संभाला और मेरे करीब आ गई।
उन्होंने पहले मेरे सख्त लंड की नोक पर बहुत धीरे से अपने होंठ रखे और उसे चूमा। फिर वह धीरे-धीरे नीचे की तरफ बढ़ते हुए मेरे पूरे लंड पर छोटे-छोटे किस्स करने लगी। उनके गर्म होंठों का हर स्पर्श मेरे पूरे शरीर में सिहरन पैदा कर रहा था।
वह कभी उसकी नोक पर किस्स करती, तो कभी नीचे की तरफ बढ़ते हुए अपने होंठों से उसे छूती। धीरे-धीरे उनके किस्स मेरे लंड से होते हुए नीचे मेरी गेंदों तक पहुँच गए। उनकी हर छोटी-सी हरकत मुझे और भी ज़्यादा बेकाबू कर रही थी। मैं सीट पर बैठा उनकी तरफ देख रहा था और तेज़ साँसें ले रहा था। कुछ देर पहले तक उनके होंठों पर लगी गहरी लाल लिपस्टिक अब हल्की-सी मेरे शरीर पर भी लग गई थी।
उन्होंने एक पल के लिए अपना सिर उठाया और सीधे मेरी आँखों में देखा और धीमी आवाज़ में कहा, “मैं कर रही हूँ गोलू… तुम बस आराम से बैठो।”
इतना कह कर वह दोबारा नीचे झुकी और अपने गर्म होंठों को मेरे लंड के चारों तरफ लपेट लिया। उनके मुँह की गर्माहट और गीलापन महसूस होते ही मेरे पूरे शरीर में एक तेज़ सिहरन दौड़ गई। कुछ पल बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपना सिर आगे-पीछे करना शुरू कर दिया।
उनकी हर हरकत के साथ मेरा लंड उनके मुँह के अंदर-बाहर हो रहा था। कार के अंदर की चुप्पी में उनकी साँसों और गले से निकलती हल्की आवाज़ें साफ सुनाई दे रही थी। जैसे-जैसे उनकी रफ्तार बढ़ रही थी, मेरे लिए खुद पर काबू रखना मुश्किल होता जा रहा था। मैंने अपना सिर पीछे सीट पर टिका दिया और आँखें बंद कर ली। मेरी साँसें लगातार तेज़ होती जा रही थी और मैं बस उनके गर्म मुँह और होंठों की हर हरकत को महसूस कर रहा था।
साक्षी दीदी की ये लगातार हरकतें मेरी बर्दाश्त की हद तोड़ रही थी। जैसे-जैसे वह अपने सिर को तेज़ी से आगे-पीछे कर रही थी, मेरे लंड पर उनके होंठों का दबाव और जीभ की तेज़ हरकत मुझे पागल कर रही थी। उनका चेहरा मेरी जाँघों के बेहद करीब था।
मैंने अपना एक हाथ उनके रेशमी बालों के बीच डाल दिया और हल्के से उन्हें अपने और करीब खींचने लगा। उनकी हर हरकत के साथ मेरे लंड की नोक पर होने वाली रगड़ मेरे पूरे शरीर में करंट की तरह दौड़ रही थी। उन्होंने एक बार फिर अपनी नज़रें ऊपर उठा कर मेरी हालत देखी और फिर अपनी रफ्तार और भी तेज़ कर दी।
अब उनके होंठों की पकड़ पहले से ज़्यादा कस गई थी। हर बार जब वह अपना सिर पीछे ले जाती और फिर आगे आती, तो मेरा लंड उनके गर्म मुँह में और गहराई तक चला जाता। उनके मुँह की गर्माहट और जीभ की तेज़ हरकतों की वजह से मेरे अंदर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था।
अब मैं पूरी तरह बेकाबू होने लगा था और मेरा पूरा शरीर बुरी तरह तन गया था। मैं खुद को और ज़्यादा रोक नहीं पा रहा था। तेज़ी से हाँफते हुए मैंने किसी तरह कहा, “दीदी… मैं… मैं आने वाला हूँ!”
मेरी आवाज़ सुनते ही साक्षी दीदी ने एक पल के लिए भी अपनी हरकत नहीं रोकी। उल्टा उन्होंने अपने सिर की रफ्तार और तेज़ कर दी। उनकी आखिरी कुछ हरकतें इतनी तेज़ और गहरी थी कि मेरा बचा हुआ काबू भी पूरी तरह टूट गया।
मैंने अपनी कमर को हल्का-सा ऊपर उठाया और अगले ही पल मेरा सारा सफ़ेद पानी उनके मुँह के अंदर निकलने लगा। मेरा पूरा शरीर झटके ले रहा था और मेरी साँसें बेकाबू हो चुकी थी। वह तब तक नहीं रुकी, जब तक आखिरी बूंद बाहर नहीं निकल गई। मैं अपनी आँखें बंद किए सीट पर पड़ा तेज़ साँसें लेता रहा। धीरे-धीरे मेरे शरीर की अकड़न कम होने लगी और मैं थककर वापस सीट पर फैल गया।
साक्षी दीदी ने अपना सिर पीछे किया और अपने होंठों के किनारों पर लगे सफ़ेद पानी को धीरे से हाथ से पोंछ लिया। उन्होंने एक गहरी साँस ली और फिर मेरी तरफ देख कर हल्की-सी मुस्कान दी। कुछ पल खुद को संभालने के बाद वह बिल्कुल आम आवाज़ में बोली, “अब गाड़ी चलाओ, गोलू। मुझे समय पर इंटरव्यू के लिए पहुँचना है।”
मैं उनकी तरफ देखता ही रह गया। कुछ पल पहले जो कुछ हुआ था, उसके बाद उनका इतनी आसानी से आम हो जाना मुझे फिर से हैरान कर रहा था।
उन्होंने मुझे इस तरह देखते हुए देखा तो उनके चेहरे पर फिर वही शरारती मुस्कान आ गई। वह थोड़ा मेरे करीब आई और धीमी आवाज़ में बोली, “और हाँ… मेरा इंटरव्यू खत्म हो जाने दो। उसके बाद मैं तुम्हें और भी बहुत खुशी दूँगी।” [email protected]
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