मौसी को चोद कर सेक्स करना सिखा

10वीं कक्षा के बाद, प्रतिक ने दूसरे स्कूल में दाखिला लिया क्योंकि उसका पुराना स्कूल केवल 10वीं तक था। परीक्षा समाप्त होने के बाद, छुट्टियों में वह अपनी नानी के घर गया। उसकी मौसी, जो लगभग 21 साल की थीं, भी वहीं रहती थीं। उनका फिगर 36-28-38 का था, और उनका लुक कटरीना कैफ जैसा था, जो बेहद आकर्षक लगता था। Mausi Bhanja Porn Kahani

प्रतिक अक्सर मौसी की खूबसूरती और जवानी को देखकर मचल उठता, लेकिन कुछ कहने या करने की हिम्मत नहीं कर पाता। धीरे-धीरे मौसी और उसके बीच हल्की-फुल्की बातें होने लगीं, जिससे वे दोनों एक-दूसरे के साथ सहज हो गए। मौसी जब घर में काम करतीं, तो अपनी चुन्नी उतार देतीं।

ऐसे में जब वे नीचे झुकतीं, तो उनके उभरे हुए दूध साफ दिखाई देते, और प्रतिक की नजरें उन पर टिक जातीं। कुछ दिन ऐसे ही गुजर गए। फिर एक दिन की बात है, घर के सभी लोग किसी रिश्तेदारी में शादी के लिए हफ्ते भर के लिए बाहर जाने वाले थे। मौसी की तबीयत ठीक नहीं थी, तो उन्होंने जाने से मना कर दिया।

मौसी ने कहा कि वो यहीं रुकेंगी और यह भी जोड़ा कि प्रतिक भी तो यहाँ है, तो कोई परेशानी नहीं होगी। घर वाले जाते-जाते प्रतिक और मौसी को एक-दूसरे का ख्याल रखने की बात कहकर चले गए। शाम को मौसी ने खाना बनाया और फिर नहाने चली गईं। मौसी को रोज शाम नहाने की आदत थी।

जब वो बाथरूम में थीं, तभी उन्होंने बाहर से आवाज लगाई और कहा, “प्रतिक, ज़रा मेरे कपड़े देना। शायद बाहर ही भूल गई हूँ।” प्रतिक उनके कपड़े लेकर बाथरूम के पास गया और दरवाजे के बाहर से आवाज लगाई। मौसी ने दरवाजा थोड़ा सा खोला, और प्रतिक ने जो देखा, उससे उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं।

मौसी उस समय सिर्फ काली ब्रा और लाल पैंटी में खड़ी थीं। उनकी खूबसूरत और रसीली बॉडी को देखकर प्रतिक जैसे मंत्रमुग्ध हो गया। उसके हाथ में कपड़े थे, लेकिन वो उन्हें मौसी की ओर बढ़ाने के बजाय बस उन्हें देखता रह गया। मौसी ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा, “क्या देख रहे हो?”

प्रतिक ने हड़बड़ाते हुए कहा, “कुछ नहीं,” और वहाँ से हट गया। लेकिन उसकी नजरों में मौसी की वह छवि बस चुकी थी। वह वापस टीवी देखने लगा, पर उसका ध्यान पूरी तरह से भटक चुका था। थोड़ी देर बाद मौसी बाथरूम से बाहर आईं। उन्होंने अपने गीले बाल झटकते हुए कहा, “प्रतिक, मुझे पता है कि तुम मुझसे क्या चाहते हो। और सच कहूँ, अब मुझसे भी सहन नहीं होता। अगर कुछ नहीं किया, तो मैं तड़पकर मर जाऊँगी।”

मौसी की बात सुनकर प्रतिक का चेहरा लाल हो गया। वह कुछ कह नहीं पाया। मौसी ने उसके पास आकर उसके होठों पर एक गहरी किस कर दी। इसके बाद उन्होंने कहा, “अब और इंतजार मत कराओ। आओ, मुझे राहत दो।” प्रतिक ने धीरे-धीरे अपने लंड को मौसी की चूत के करीब लाकर उनके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

उसने अपना लाल टोपा उनकी चूत की लकीर पर रगड़ते हुए अंदर धक्का दिया। इस पर मौसी की एक तेज़ चीख निकल गई, “आह्ह्ह उई माँ…!” प्रतिक ने मौसी के होंठों को चूसते हुए उन्हें शांत किया। जैसे ही मौसी थोड़ी सहज हुईं, प्रतिक ने इस बार एक ही बार में पूरा लंड चूत के अंदर डाल दिया।

मौसी कसमसाईं, पर उन्होंने अपनी चीख को दबा लिया। अब कमरे में सिर्फ उनकी सिसकारियाँ गूँजने लगीं, “आह्ह… ओह्ह… हाँ… और जोर से!” मौसी मस्त होकर कह रही थीं, “चोदो मुझे, प्रतिक बाबू! जी भर के चोदो! आज मेरी इस गर्म चूत को फाड़ डालो।”

अब प्रतिक ने अपनी स्पीड और बढ़ा दी। मौसी के मुँह से लगातार आवाजें निकल रही थीं, “आह… उई माँ… मर गई रे… पूरा पेलो… फाड़ दो मेरी चूत को!” प्रतिक ने मौसी के होंठ अपने मुँह में भर लिए और उन्हें चूसते हुए चुदाई करता रहा। साथ ही अपने हाथों से उनके बड़े, रसीले दूधों को कसकर दबाने लगा।

पूरे कमरे में चुदाई की आवाजें, “पच-पच, थप-थप,” गूँज रही थीं। मौसी भी अपनी गांड को बार-बार ऊपर उठाकर चुदाई का पूरा आनंद ले रही थीं। कभी वह प्रतिक को रोककर अपनी चूत को घुमातीं, तो कभी उसके होंठों को जोर से चूसतीं। उनके चूतड़ उछल-उछलकर लंड को जड़ तक खा रहे थे।

करीब 20 मिनट की जोरदार चुदाई के बाद प्रतिक झड़ने को हुआ। उसने मौसी से पूछा, “अपनी मलाई किधर निकालूँ?” मौसी ने धीरे से मुस्कुराते हुए उसके कान में कहा, “मेरे जानू, मेरे दूधों पर छोड़ दो।” यह सुनते ही प्रतिक ने बेधड़क होकर अपना सारा वीर्य मौसी के रसीले दूधों पर छोड़ दिया।

वीर्य उनके गोरे-गोरे मम्मों पर बहने लगा, और उनके चेहरे पर संतुष्टि की एक चमक आ गई। इसके बाद प्रतिक मौसी के ऊपर ही लेट गया। दोनों काफ़ी देर तक इसी अवस्था में पड़े रहे। मौसी ने मुस्कुराते हुए कहा, “प्रतिक, आज तुमने मुझे पूरी तरह से संतुष्ट कर दिया।”

उस दिन प्रतिक ने मौसी को चार बार चोदा। दोनों के बीच की तड़प हर बार और बढ़ जाती। इसके बाद जब भी उन्हें मौका मिलता, वे चुदाई का यह खेल जरूर खेलते। मौसी प्रतिक के लंड से बहुत खुश थीं, और प्रतिक को भी ऐसा लगा जैसे वह अपनी पहली चुदाई के बाद किसी सपने की दुनिया में पहुँच गया हो।

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Ritu Agarwal

हैलो दोस्तों! मैं ऋतु अग्रवाल हूँ - कानपुर विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में मास्टर डिग्री पाने वाली और पिछले 5 साल से हिंदी में वो कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी रूह को छू लें और तन को तड़पा दें। मैं मानव व्यवहार और इंसानी इच्छाओं पर गहरा रिसर्च करती हूँ ताकि हर कहानी असली और दिलकश हो। मेरी कहानियाँ लाखों पाठकों ने पढ़ी हैं और हर कोई वापस आता है। मैं समझती हूँ आप क्या चाहते हैं - और वही लिखती हूँ जो आपको पागल कर दे। तो चलो, मेरी कहानी से आज की रात को खास बनाते हैं!

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