भांजी ने घर में नथ खुलवाई -1

अन्तर्वासना के पाठक पाठिकाओं को चूतेश का नमस्कार!

आपकी सेवा में मेरी एक नई घटना का वर्णन प्रस्तुत है। आशा है पिछली घटना-वर्णनों की भांति ये भी आपको पसंद आएगा।

मेरी एक पाठिका का मेल आया कि चूतेश जी मेरा नाम रीना है और मैंने आपको पहचान लिया है। मैं आपकी पत्नी जूसी रानी के सगे भाई की बेटी हूँ और अपने असली नाम से ही यह मेल लिख रही हूँ।

मैंने एक साल पहले ही आपको लिखा था लेकिन अपने उत्तर नहीं दिया।

मैंने लिखा कि रीना मैंने भी तुमको पहचान लिया था और इसी लिए उत्तर नहीं दिया कि तुम मेरी रिश्तेदार हो। अब जब तुमने भी मुझे पहचान लिया है तो फिर तुम मुझे लिख क्यों रही हो।

उत्तर आया कि मैं आपकी चुदाई से बहुत प्रभावित हूँ और मैंने तय कर लिया है कि मैं आपसे ही चुदवा कर अपनी चूत की सील तुड़वाऊँगी।

मैंने लिखा कि ‘यह जानते हुए भी कि तुम मेरे सगे साले की बेटी हो तुम मुझी से चूत क्यों फड़वाना चाहती हो?’

जवाब आया कि ‘मैंने तो तय कर लिया है आप से ही चुदूँगी क्योंकि आप लड़कियों को बहुत अधिक मज़ा देते हो। मैंने अपनी कई चुदवा चुकी सहेलियों से बात की है लेकिन कोई भी अपने बॉय फ्रेंड से इतना मज़ा नहीं पा रही जैसा आपकी कहानियों में बताया गया है। और रिश्तेदारी है तो इसमें सुरक्षा भी तो है। कोई ब्लैकमेल का रिस्क नहीं है। कोई गर्भ ठहरने के खतरा नहीं है। इसलिए राजे, बहन के लौड़े तू ही मेरी चूत का उद्घाटन करेगा।’

अपना नाम, तू तड़ाक की भाषा और गाली सुन कर मैं समझ गया कि यह लड़की तो चुदवाये बिना मानेगी नहीं। मैं नहीं चोदूँगा तो कोई और इस लण्ड की प्यासी की चूत के मज़े ले लेगा। मैंने लिखा कि ‘रीना रानी, ठीक है बहनचोद, कमीनी कुतिया, कर दूंगा तेरी चूत का कल्याण!’

यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं ! रीना रानी कानपुर में रहती है, उम्र 19-20 वर्ष और M.Sc.(BOTANY) प्रथम वर्ष की छात्रा है। इसे मैंने करीब दो साल पहले एक शादी में देखा था और याद आ रहा था कि रीना रानी काफी सुन्दर लड़की थी। उस समय तक उसके चूचे छोटे छोटे थे लेकिन वैसे फिगर मस्त थी। तब मैंने उसे कोई ज़्यादा ध्यान से नहीं देखा था इसलिए ठीक से याद नहीं था कि उसके हाथ, पैर, चूतड़, गर्दन इत्यादि कैसे थे।

मैंने शताब्दी एक्सप्रेस से कानपुर का टिकट बुक करवाया। तीन दिन बाद का आने जाने का पक्का टिकट हो गया। मार्च 16 को कानपुर जाने का और 18 का वापिसी का रिजर्वेशन करवा लिया। जूसी रानी से बताया कि कानपुर काम से जा रहा हूँ और तेरे भाई के घर पर ही ठहरूँगा। जूसीरानी ने फोन पर अपने भाई रितेश को बता भी दिया।

यहाँ मैं ये बता देना चाहता हूँ कि इस कहानी में किसी पात्र अथवा स्थान का नाम बदला नहीं गया है। ऐसा इसलिए कि मेरे बार बार समझने पर भी रीना रानी ज़िद पकड़े रही कि कहानी या तो मेरे असली नाम से ही छपेगी नहीं तो छपेगी ही नहीं।

मैंने कहा- ठीक है, माँ चुदवा बहनचोद।

मेरा काम था सुरक्षा की दृष्टि से सही बात बताना। तुझे नहीं माननी है तो जा मरा गांड! हरामज़ादी बड़ी झाँसी की रानी बनती है तो बन!

रीना रानी की माँ चुदवाने पर ध्यान आया कि मेरे साले की पत्नी भी बहुत सुन्दर और सेक्सी है और बहनचोद मेरे पर लाइन भी मारती आई है। क्यों न माँ बेटी दोनों को ही चोद दूँ एक दूसरे के सामने। लेकिन फिर ध्यान आया कि उस कमबख्त के पैर तो बेहद बदसूरत हैं- बेढंगे, फटी हुई एड़ियाँ। बहनचोद खड़ा हुआ लौड़ा बैठ जाय उसके बदशक्ल पैर देख कर।

तीन दिन के बाद मैं सुबह साढ़े ग्यारह बजे शताब्दी एक्सप्रेस से कानपुर पहुंच गया। स्टेशन पर मुझे लेने के लिए मेरा साला, उसकी बीवी, बेटा ऋषि और रीना रानी आये थे।

अब मैंने रीना रानी को अच्छे से देखा… मज़ा आ गया यारों ! मस्त अल्हड़ जवानी। ठीक ठीक साइज के 32C के चूचे, सुन्दर प्यारे प्यारे हाथ पैर और लाजवाब टाँगें। बहनचोद एक घुटनों तक का निकर पहन के आई थी। रीना रानी की मक्खन सी मस्त टाँगें देखते ही वहीं लण्ड अकड़ने लगा। उसकी अम्मा, माँ की लोड़ी, बार बार अपने चूचुक दिखाने में लगी थी।

खैर घर पहुँचकर मैंने कहा- मुझे 3 बजे होटल लैंडमार्क में मीटिंग के लिए जाना है। मैंने यह भी कहा कि रीना को साथ ले जाता हूँ और मीटिंग में कह दूंगा कि यह मेरी सेक्रेटरी है। इसलिए मुझे 2 बजे तक लंच से फारिग कर दिया गया और ढाई बजे मैं और रीना रानी साले की टोयोटा ऑल्टिस कार में होटल के लिए रवाना हो गए।

कार ड्राइवर चला रहा था और हम पीछे की सीट पर थे। कहानी जारी रहेगी। [email protected]

Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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