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दीपा मेडम

काश यह संभव हो पाता। मुझे ग़ालिब का एक शेर याद आ रहा है :

बाद मुर्दन के जन्नत मिले ना मिले ग़ालिब क्या पता

गाण्ड मार के इस दूसरी जन्नत का मज़ा तो लूट ही ले !

शाम को हम सभी साथ बैठे चाय पी रहे थे। दीपा तो पूरी मुटियार बनी थी। गुलाबी रंग की पटियाला सलवार और हरे रंग की कुर्ती में उसका जलवा दीदा-ए-वार (देखने लायक) था। दीपा अपने साथ मुझे डांस करने को कहने लगी।

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मैंने उसे बताया कि मुझे कोई ज्यादा डांस वांस नहीं आता तो वो बोली “यह सब तो मधुर की गलती है।”
“क्यों ? इसमें भला मेरी क्या गलती है ?” मधु ने तुनकते हुए कहा।

“सभी पत्नियाँ अपने पतियों को अपनी अंगुली पर नचाती हैं यह बात तो सभी जानते हैं !”

उसकी इस बात पर सभी हंसने लगे। फिर दीपा ने “ये काली काली आँखें गोरे गोरे गाल … देखा जो तुम्हें जानम हुआ है बुरा हाल” पर जो ठुमके लगाए कि मेरा दिल तो यह गाने को करने लगा “ये काली काली झांटे … ये गोरी गोरी गाण्ड …”

बाद मुर्दन के जन्नत मिले ना मिले ग़ालिब क्या पता

गाण्ड मार के इस दूसरी जन्नत का मज़ा तो लूट ही ले !

शाम को हम सभी साथ बैठे चाय पी रहे थे। दीपा तो पूरी मुटियार बनी थी। गुलाबी रंग की पटियाला सलवार और हरे रंग की कुर्ती में उसका जलवा दीदा-ए-वार (देखने लायक) था। दीपा अपने साथ मुझे डांस करने को कहने लगी।

मैंने उसे बताया कि मुझे कोई ज्यादा डांस वांस नहीं आता तो वो बोली “यह सब तो मधुर की गलती है।”
“क्यों ? इसमें भला मेरी क्या गलती है ?” मधु ने तुनकते हुए कहा।

“सभी पत्नियाँ अपने पतियों को अपनी अंगुली पर नचाती हैं यह बात तो सभी जानते हैं !”

उसकी इस बात पर सभी हंसने लगे। फिर दीपा ने “ये काली काली आँखें गोरे गोरे गाल … देखा जो तुम्हें जानम हुआ है बुरा हाल” पर जो ठुमके लगाए कि मेरा दिल तो यह गाने को करने लगा “ये काली काली झांटे … ये गोरी गोरी गाण्ड …”

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सच कहूँ तो उसके नितम्बों को देख कर तो मैं इतना उत्तेजित हो गया था कि एक बार तो मेरा मन बाथरूम हो आने को करने लगा। मेरा तो मन कर रहा था कि डांस के बहाने इसे पकड़ कर अपनी बाहों में भींच ही लूँ !

वैसे मधुर भी बहुत अच्छा डांस करती है पर आज उसने पता नहीं क्यों डांस नहीं किया वरना तो वो ऐसा कोई मौका कभी नहीं चूकती।

खाना खाने के बाद रात को कोई 11 बजे दीपा और मिक्की अपने कमरे में चली गई थी। मैं भी मधु को दूध पिला जाने का इशारा करना चाहता था पर वो कहीं दिखाई नहीं दे रही थी।

मैं सोने के लिए ऊपर चौबारे में चला आया। हालांकि मौसम में अभी भी थोड़ी ठंडक जरुर थी पर मैंने अपने कपड़े उतार दिए थे और मैं नंगधडंग बिस्तर पर बैठा मधु के आने का इंतज़ार करने लगा। मेरा लण्ड तो आज किसी अड़ियल टट्टू की तरह खड़ा था।

मैं उसे हाथ में पकड़े समझा रहा था कि बेटा बस थोडा सा सब्र और कर ले तेरी लाडो आती ही होगी। मेरे अन्दर पिछले 10-15 दिनों से जो लावा कुलबुला रहा था मुझे लगा अगर उसे जल्दी ही नहीं निकाला गया तो मेरी नसें ही फट पड़ेंगी। आज मैंने मन में ठान लिया था कि मधु के कमरे में आते ही चूमाचाटी का झंझट छोड़ कर एक बार उसे बाहों में भर कर कसकर जोर जोर से रगडूंगा।

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मैं अभी इन खयालों में डूबा ही था कि मुझे किसी के आने की पदचाप सुनाई दी। वो सर झुकाए हाथों में थर्मस और एक गिलास पकड़े धीमे क़दमों से कमरे में आ गई। कमरे में अँधेरा ही था मैंने बत्ती नहीं जलाई थी।

जैसे ही वो बितर के पास पड़ी छोटी स्टूल पर थर्मस और गिलास रखने को झुकी मैंने उसे पीछे से अपनी बाहों में जकड़ लिया। मेरा लण्ड उसके मोटे मोटे नितम्बों की खाई से जा टकराया। मैंने तड़ातड़ कई चुम्बन उसकी पीठ और गर्दन पर ही ले लिए और एक हाथ नीचा करके उसके उरोजों को पकड़ लिया और दूसरे हाथ से उसकी लाडो को भींच लिया।

उसने पतली सी नाइटी पहन रखी थी और अन्दर ब्रा और पेंटी नहीं पहनी थी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि उसके नितम्ब और उरोज इन 10-15 दिनों में इतने बड़े बड़े और भारी कैसे हो गए। कहीं मेरा भ्रम तो नहीं। मैंने अपनी एक अंगुली नाइटी के ऊपर से ही उसकी लाडो में घुसाने की कोशिश करते हुए उसे पलंग पर पटक लेने का प्रयास किया। वह थोड़ी कसमसाई और अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करने लगी। इसी आपाधापी में उसकी एक हलकी सी चीख पूरे कमरे में गूँज गई ……

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“ऊईईई… ईईईई … जीजू ये क्या कर रहे हो…….? छोड़ो मुझे … !”

मैं तो उस अप्रत्याशित आवाज को सुनकर हड़बड़ा ही गया। वो मेरी पकड़ से निकल गई और उसने दरवाजे के पास लगे लाईट के बटन को ऑन कर दिया। मैं तो मुँह बाए खड़ा ही रह गया। लाईट जलने के बाद मुझे होश आया कि मैं तो नंग धडंग ही खड़ा हूँ और मेरा 7 इंच का लण्ड कुतुबमीनार की तरह खड़ा जैसे आये हुए मेहमान को सलामी दे रहा है। मैंने झट से पास रखी लुंगी अपनी कमर पर लपेट ली।

“ओह … ब …म… दीपा तुम ?”

“जीजू … कम से कम देख तो लेना था ?”

“वो … स .. सॉरी … मुझे लगा मधु होगी ?”

“तो क्या तुम मधु के साथ भी इस तरह का जंगलीपन करते हो?”

“ओह .. सॉरी …” मैं तो कुछ बोलने की हालत में ही नहीं था।

वो मेरी लुंगी के बीच खड़े खूंटे की ओर ही घूरे जा रही थी।

“मैं तो दूध पिलाने आई थी ! मुझे क्या पता कि तुम मुझे इस तरह दबोच लोगे ? भला किसी जवान कुंवारी लड़की के साथ कोई ऐसा करता है?” उसने उलाहना देते हुए कहा।

“दीपा … सॉरी … अनजाने में ऐसा हो गया … प्लीज म … मधु से इस बात का जिक्र मत करना !” मैं हकलाता हुआ सा बोला।

मेरे मुँह से तो आवाज ही नहीं निकल रही थी, मैंने कातर नज़रों से उसकी ओर देखा।

“किस बात का जिक्र?”

“ओह… वो… वो कि मैंने मधु समझ कर तुम्हें पकड़ लिया था ना ?”

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“ओह … मैं तो कुछ और ही समझी थी ?” वो हंसने लगी।

“क्या ?”

“मैं तो यह सोच रही थी कि तुम कहोगे कि कमरे में तुम्हारे नंगे खड़े होने वाली बात को मधु से ना कहूं ?” वो खिलखिला कर हंस पड़ी।

अब मेरी जान में जान आई।

“वैसे एक बात कहूं ?” उसने मुस्कुराते हुए पूछा।

“क … क्या ?”

“वैसे आप बिना कपड़ों के भी जमते हो !”

“धत्त शैतान … !”

“हुंह … एक तो मधु के कहने पर मैं दूध पिलाने आई और ऊपर से मुझे ही शैतान कह रहे हो ! धन्यवाद करना तो दूर बैठने को भी नहीं कहा ?”

“ओह… सॉरी ? प्लीज बैठो !” मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि यह विचित्र ब्रह्म दीपा मेम साब इतना जल्दी मिश्री की डली बन जायेगी। यह तो नाक पर मक्खी भी नहीं बैठने देती।

“जीजू एक बात पूछूँ?” वो मेरे पास ही बिस्तर पर बैठते हुए बोली।

“हम्म … ?”

“क्या वो छिपकली (मधुर) रोज़ इसी तरह तुम्हें दूध पिलाती है?”

“ओह … हाँ … पिलाती तो है !”

“ओये होए … होर नाल अपणा शहद वी पीण देंदी है ज्या नइ ?” (ओहो … और साथ में अपना मधु भी पीने देती है या नहीं) वो मंद मंद मुस्कुरा रही थी। सुधा भाभी और दीपा पटियाला के पंजाबी परिवार से हैं इसलिए कभी कभी पंजाबी भी बोल लेती हैं।

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अजीब सवाल था। कहीं मधु ने इसे हमारे अन्तरंग क्षणों और प्रेम युद्ध के बारे में सब कुछ बता तो नहीं दिया? ये औरतें भी बड़ी अजीब होती हैं पति के सामने तो शर्माने का इतना नाटक करेंगी और अपनी हम उम्र सहेलियों को अपनी सारी निजी बातें रस ले ले कर बता देंगी।

शेष अगले अंक में…