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चाची की सम्पूर्ण यौन आनन्द कामना पूर्ति

अन्तर्वासना और चुदाई की कहानी के मनचले श्रोताओँ का मैं हमारे वेबसाइट पर स्वागत करता हूँ. चाची की चुदाई किसको नहीं भाती, वो मनचली चुत और मस्त बूब्स, सबको दीवाना बना दे.. आज ऐसी ही एक मस्त सेक्स कहानी पेश है… chachi ki jawani

सुबह दस बजे मेरी नींद खुली तो देखा कि चारों ओर सुनहरी धूप फैली हुई थी और खुली हुई खिड़कियों में से हल्की हल्की हवा कमरे में आ रही थी।

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मैं बिस्तर पर उठ कर बैठा ही था कि बड़ी चाची ने मुझे उठाने के लिए आवाज़ लगाते हुए कमरे में प्रवेश किया।

मुझे जागे हुए तथा बिस्तर पर बैठा देख कर चाची चुप हो गई और बिल्कुल मेरे पास आ कर मेरे गालों तथा होंठों को चूम लिया।

मुझसे रहा नहीं गया और मैंने भी चाची को अपने बाहुपाश में ले लिया तथा उनके गालों और होंठो पर चुम्बनों की बौछार कर दी।

चुम्बनों के बाद जब मैंने चाची के दोनों उरोजों को अपने हाथों से मसलने लगा तब कुछ क्षणों के लिए वह वैसे ही खड़ी रही और मुझे अपने उरोजों को मसलने दिया।

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उसके बाद उन्होंने झुक कर मेरे होंठों का एक बार फिर से चुम्बन लिया और मेरे दोनों हाथों को पकड़ कर अपने उरोजों से अलग कर दिया।

मैंने जब उनकी ओर वासना भरी प्यासी आँखों से देखा तो उन्होंने बड़े प्यार से मेरी गालों को थप-थपया और मुझे समझाते हुए कहा- विवेक, यौन क्रिया में अधिक उतावलापन अच्छा नहीं होता।

उसकी हर गतिविधि और क्रिया का एक निर्धारित समय होता है।

तुम्हें उस समय तक प्रतीक्षा करनी होगी और अपनी वासना पर सयम भी रखना होगा।

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जब चाची की बात को समझते हुए मैं उनसे अलग हुआ तब उन्होंने कहा– नाश्ता तैयार है इसलिए तुम शीघ्र ही हाथ मुँह धोकर के नीच भोजनकक्ष में आ जाओ।

दस मिनट में ही मैं शौच एवं हाथ मुँह धोने आदि की क्रिया से निवृत हो कर जब भोजनकक्ष पहुँचा तब चाची को खाने की मेज पर मेरी प्रतीक्षा में बैठी देख कर मैं तुरंत नाश्ता करने बैठ गया।

नाश्ता करते हुए जब मैंने चाची से पूछा- चाची आपने अभी तक नाश्ता क्यों नहीं किया?

तो उन्होंने बताया- दो कारण है जिससे आज घर का काम करते करते मुझे देर हो गई और नाश्ता करने का समय ही नहीं मिला।

मैंने झट से पूछ लिया- चाची, वह दो कारण कौन से है?

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तब चाची बोली- एक तो तुम्हारी छोटी चाची बाहर गई हुई है और घर का काम करने वाली मैं अकेली ही हूँ।

दूसरा कारण तुम हो जिसकी वजह से मुझे आज सुबह उठने में देर हो गई थी।

मैंने तुरंत विरोध जताया- चाची, देर से आप खुद उठी थी और दोषी मुझे क्यों बना रही हो? क्या मैंने आपको जल्दी उठने से रोका था?

मेरी बात सुन कर चाची ने कहा- मैंने कब कहा कि तुमने रोका था? लेकिन तुम्हारे ही कारण मैं रात को इतना थक गई थी कि सुबह मेरी नींद बहुत देर से खुली और पूरे शरीर में आलस के कारण मुझसे फुर्ती से काम भी नहीं हुआ।

उनकी बात को सुन कर मुझ से रहा नहीं गया और मैंने कहा- चाची, रात को मैंने ऐसा क्या किया था जो आप मुझे अपनी थकावट का कारण बना रही हैं?

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मेरी बात सुन कर चाची ने मेरी गाल पर एक प्यार की हल्की सी चपत लगाते हुए कहा- आजकल तुम बहुत घुमा कर बातें बनाने लगे हो। जो मैं कह रही हूँ उसे तुम बखूबी समझ रहे हो लेकिन फिर भी मुझ से पूछ रहे हो कि रात को तुमने मुझे कैसे थकाया था।

उनकी बात सुन कर मैं चुपचाप नाश्ता करता रहा और चाची की खुले गले वाली नाइटी में से उनके दो प्यारे से मौसंबी जैसे गोल, सख्त और कसे हुए उरोजों को देखता रहा।

नाश्ता समाप्त करने के बाद जब चाची मुझे उनके उरोजों को देखने में मग्न पाया तब वह मुस्कराते हुए उठ खड़ी हुई और मुझे जीभ दिखा कर चिढ़ाते हुए मेज़ से बर्तन समेट कर रसोई में चली गई।

मैं वहीं बैठा रहा और मेरी आँखों के सामने थोड़ी देर पहले देखे चाची के उरोजों तथा रात को उसके साथ किये यौन संसर्ग के दृश्य एक चलचित्र की तरह घूमने लगे।

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