मामा की बेटी निशा की चुत चुदाई

मेरा नाम आकाश है, मैं उदयपुर में रहता हूँ, मैं नौकरी और पढ़ाई दोनों करता हूँ, मैं दिखने में सांवला हूँ, सेहत भी ज्यादा नहीं है. लम्बाई 5 फ़ुट 6 इन्च है,लण्ड 8 इन्च का है. मेरे पिताजी यहाँ एक फ़ाइव स्टार होटल में काम करते हैं.

बात आज से सात साल पहले की है जब मेरे पिताजी का ऑपरेशन हुआ था. मेरी माँ उनके पास अस्पताल में ही रहती थीं और घर पर खाना बनाने वाला भी कोई नहीं था. तो उन्होंने मेरे मामा की लड़की निशा को हमारे पास बुला लिया. निशा दिखने में सुन्दर है, नाक में नथनी पहनती है, उसका फिगर सामान्य ही है.

तो वो हमारे लिए खाना बनाती थी और फ़िर मैं और निशा अस्पताल टिफ़िन देने जाते थे, उधर से रात को देर से घर आते थे.

उसके बहुत सारे लड़के दोस्त थे और अक्सर ही वो उनसे फ़ोन पर बातें करती रहती थी. मुझे सिर्फ़ शक़ था, पर मेरा शक़ धीरे-धीरे यकीन में बदल गया.

मैं और निशा रात को एक ही पलंग पर सोते थे. एक रात जब हम दोनों सो रहे थे तब रात को मेरी नींद खुली और मैंने देखा कि निशा का चेहरा मेरे चेहरे के बिल्कुल सामने था. मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसके होंठों को चूम लिया और उसके पीठ पर हाथ घुमाने लगा.

उस वक्त मुझे कुछ भी नहीं दिख रहा था. बस यही ख्याल आ रहा था कि बस अभी इसकी चुदाई कर दूँ.

फ़िर शायद उसकी नींद खुल गई और वो भी साथ देने लगी. मुझे बहुत मजा आ रहा था और शायद उसे भी आ रहा होगा. फ़िर मैंने उसके मम्मों पर अपना हाथ रख दिया और धीरे-धीरे उन्हें दबाने लगा. वो ‘अम्म… अम्म्ह्ह्ह’ की आवाज निकाल रही थी.

फ़िर वो अपना हाथ मेरे बालों में घुमाने लगी और एक हाथ मेरी चड्डी में डाल दिया और मेरा लण्ड सहलाने लगी. मैंने भी देर ना करते हुए उसकी टी-शर्ट उतार दी. उसने काले रंग की ब्रा पहन रखी थी, जो बहुत ही सेक्सी लग रही थी. मैंने ब्रा के ऊपर से ही उसके मम्मों को दबाना शुरु किया और थोड़ी-थोड़ी देर में उनको चूम भी रहा था.

वो सेक्सी आवाजें निकाल रही थी ‘आह्ह ह्ह अम्म म्म्म आकाष्ह अब और मत तड़पा.. मेरी जान्न्न..!

मैंने धीरे से उसकी जीन्स का बटन खोल दिया और धीरे-धीरे जीन्स की जिप खोलने लगा. वो लगातार ‘आहें’ भर रही थी. फ़िर मैंने उसकी जीन्स उतार दी और अब वो मेरे सामने सिर्फ़ पेंटी में थी. जो कि हद से भी ज्यादा सेक्सी लग रही थी.

फिर मैंने उसकी चड्डी में हाथ डाला तो वो पूरी गीली हो चुकी थी और रह-रह कर पानी निकाल रही थी.

मैंने देर ना करते हुए अपने कपड़े भी उतार दिए और 69 की पोजिशन में आ गया और उसकी पेंटी को उतार दिया और उसकी गुलाबी चूत पर अपने होंठों को रख दिया और उसकी चूत का रसपान करने लगा.

निशा पागल हुए जा रही थी- आह्ह उह्ह, पी लेएए मेरी जान्न्न, जी भर केएए पी आज्ज, साली बोहोत्त तड़पाती है…! मैंने कहा- हाँ… मेरी जान आज तेरा सारा रस पी जाऊँगा, बहुत तड़पाती है तू मुझे..! वो- तो चोद देता ना मेरी जान..! मैं- पर तूने कभी इशारा भी किया होता तो आज का इन्तजार नहीं करना पड़ता…साली को कब का चोद देता! वो- तो अब बची-खुची कसर पूरी कर ले ना! मैं- आज तो अपनी सारी कसर निकाल दूँगा तेरी चूत में.. आज तो तेरी चूत का भोसड़ा बना कर ही छोडूँगा..! वो- हाँ हाँ… मत छोड़ना मेरी जान!

और मैंने अपना लण्ड उसके मुँह में दे दिया और मैं उसके दाने को अपने दाँतों से काटने लगा. वो सीत्कारने लगी और बोली- जान अब और मत तड़पा ना… चोद दे इस नाचीज को आज.. अपने पानी से मेरी चूत को सींच दे ना..! तो मैंने भी अब ज्यादा तड़पाना ठीक नहीं समझा और बढ़ गया मैदान की ओर…!

फ़िर मैंने अपना लन्ड उसकी चूत पर रगड़ना शुरु किया और उसकी चूत ने अपना पानी निकाला जिससे मेर लन्ड पूरा गीला हो गया. मैंने अपना लन्ड उसकी चूत के मुँह पर रखा और एक जोर से धक्का मारा. आधा लन्ड उसकी चूत में समा गया और उसने सिर्फ़ हल्की सी चीख निकाली क्योंकि वो खेली-खाई खिलाड़ी थी. मैंने एक और जोर का धक्का मारा तो मेरा पूरा लन्ड उसकी चूत में समा गया.

फ़िर मैंने धक्के लगाने शुरू किए और वो बोलने लगी- आह्ह अम्म्म उह्ह्ह और जोर से चोद राजाआआ… फ़ाड़ दे आज मेरी चूत.. ऐसा मजा पहले कभी नहीं आया.. मुझे मेरी जान.. और जोर-जोर से चोद मुझे..! मैं भी बोल रहा था- हाँ.. जान.. आज तेरी चूत मैं फ़ाड़ दूँगा.. तुझे बहुत सार प्यार करूँगा.. तू मेरा प्यार लेगी ना?? वो- हाँ.. जान तेरा सारा प्यार लूँगी.. बस तू देता जा.. आज पूरी रात चोद मुझे..!

इतनी देर में वो दो बार झड़ चुकी थी, पर मैं रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था. बस उसे जोर-जोर से पेले जा रहा था और वो तीसरी बार झड़ गई.

कुछ समय बाद अब मेरा भी होने वाला था तो मैंने उससे पूछा- कहाँ लेगी मेरी जान? वो बोली- जान आज से पहले मुझे इतना मजा किसी ने भी नहीं दिया है.. इस चुदाई को मैं एक यादगार चुदाई बनाना चाहती हूँ.. तेरा माल तो मैं अपनी चूत में ही लूँगी!

और मैं भी उसकी चूत में ही झड़ गया. फिर हम दोनों पूरी रात बिना कपड़ों के ही एक-दूसरे से चिपक कर सोते रहे.

बस दोस्तो, इसके बाद तो मेरी रोज हो चुदाई होने लगी. इसकी बाकी कहानी फिर कभी लिखूँगा..! कहानी आपको कैसी लगी जरूर बताना, मुझे आपके मेल का इन्तजार रहेगा. [email protected]

Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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