भाई की सेक्सी बात मान ली दीदी ने

मेरा नाम हेमंत है। मेरी उम्र 18 साल है। मैं पुणे में अपने मम्मी-पापा के साथ रहता हूँ। दसवीं की परीक्षा देने के बाद मैं अपने दोस्तों के घर जाने लगा। मैं अपने एक दोस्त सुखविंदर के घर उसका कंप्यूटर शेयर करता था। सुखविंदर को मुझसे ज्यादा इंटरनेट की जानकारी थी, इसलिए ज्यादातर वही साइट्स सर्फ करता था। Real Desi Incest Story

एक दिन मैं उसके घर थोड़ा देर से पहुँचा तो देखा कि सुखविंदर कंप्यूटर पर बैठा हुआ था और हमारी वासना डॉट नेट पढ़ रहा था। मैंने देखा कि वह ज्यादातर भाई-बहन की कहानियाँ पढ़ रहा था। मैंने उसी समय सुखविंदर से कहा, “यार, यह सब बंद कर दे, मुझे अच्छा नहीं लग रहा।”

सुखविंदर ने कहा, “यार, तुझे नहीं पता, एक बार अपनी दीदी के बारे में सोचकर देख, बहुत मज़ा आएगा।”

यह सुनते ही मैंने उससे कहा, “चल यार, मैं घर जाता हूँ।”

सुखविंदर ने कहा, “बैठ ना यार।”

मैंने कहा, “नहीं यार, आज शाम को दीदी मुंबई से आने वाली हैं, शादी के बाद पहली बार।”

फिर उसने कहा, “इस बार अपनी दीदी के बारे में सोचकर देख।”

मैंने उसे पागल कहते हुए वहाँ से घर की ओर निकल पड़ा। जैसे ही मैं घर पहुँचा, मैंने अपने कमरे में एक बड़ा सा बैग देखा और मेरे कमरे के बाथरूम से पानी की आवाज़ आ रही थी। मम्मी किचन में शाम का खाना बना रही थीं और पापा कहीं बाहर गए थे। मैं तुरंत किचन में गया और मम्मी से पूछा, “दीदी आई हैं क्या?”

मम्मी ने कहा, “हाँ।”

मैं अपनी दीदी के बारे में बता दूँ। मेरी दीदी का नाम अंकिता है। उनकी उम्र 28 साल है। रंग गोरा है। दीदी की शादी आठ महीने पहले हुई थी और शादी के बाद वह पहली बार बड़ौदा आई थीं। फिर अचानक किसी ने पीछे से मुझे गले लगाया और मेरे गालों को चूमा।

मैंने तुरंत पीछे देखा, अंकिता दीदी अपने गीले बालों पर तौलिया लपेटे, हरी नाइटी पहने, बिल्कुल एक औरत की तरह दिख रही थीं। मैंने दीदी से कहा, “तुम तो बिल्कुल बदल चुकी हो।” फिर दीदी ने पूछा, “तुम्हारी परीक्षा कैसी रही?” और हम लोग बातें करने लगे।

जब मैं दीदी के साथ बातें कर रहा था, तो मुझे मेरे दोस्त सुखविंदर की बातें याद आने लगीं। मुझे बहुत अजीब सी फीलिंग होने लगी। मेरे न चाहते हुए भी मैं दीदी के फिगर को देखने लगा। फिर बाहर से पापा आए और वह भी दीदी के साथ बातें करने लगे।

मैं वहाँ से सरकते हुए फोन करने चला गया। मैंने तुरंत सुखविंदर को फोन करके अपनी हालत बताई। सुखविंदर ने कहा, “मैंने कहा था ना, ऐसा मेरे साथ भी हुआ था। सुन, ऐसा सबके साथ होता है क्योंकि हम पहले इंसान हैं, बाद में रिश्तों में। कीप इट अप, यही जिंदगी है।”

फिर मैंने फोन रख दिया। फिर मैं, दीदी, मम्मी, पापा सब खाना खाने बैठे। खाना खाते समय मैंने देखा कि दीदी बिल्कुल टीवी सीरियल की प्रेरणा जैसी दिख रही थीं। पहले दीदी बहुत पतली थीं, लेकिन अब अंकिता दीदी की गांड पूरी कुर्सी की दोनों साइड से बाहर निकल रही थी।

दीदी के स्तन छाती से लंबे, बड़े आमों की तरह थे। मुझे नहीं पता कि जीजू ने दीदी को क्या किया कि दीदी इतनी भारी-भरकम हो गई थीं। खाना खाने के बाद हम लोग टीवी देखने लगे। मैं और दीदी सोफे पर बैठे थे और मम्मी-पापा बगल के सोफे पर। रात के दस बज रहे थे।

फिर मम्मी और पापा अपने कमरे में सोने चले गए। फिर दीदी ने अपने आप को सोफे की एक साइड पर रखा, अपना सिर तकिए पर रखा और अपने पैरों को मोड़कर सोफे पर ले लिया। फिर दीदी ने कहा, “हेमंत, मेरे पैर बहुत दर्द कर रहे हैं, प्लीज़ दबा दो।”

मैंने कहा, “जी दीदी।”

फिर दीदी ने अपने पैर मेरी गोद में रख दिए। मैं दीदी के पैर दबाने लगा। दीदी के पैर दबाते समय मैं अब गर्म हो रहा था। अब मेरा नज़रिया बिल्कुल बदल रहा था। फिर मैंने अपने हाथ थोड़ा ऊपर ले जाकर दीदी के घुटनों को दबाने लगा। अब मेरे हाथ कभी-कभी उनकी जांघों तक फिसलने लगे। दीदी की जांघें बहुत नरम थीं। अब मेरा लंड दीदी के पैरों से दबा हुआ खड़ा हो रहा था। मैं उसे रोक नहीं पा रहा था।

फिर अचानक दीदी ने पूछा, “हेमंत, क्या तुमने कोई गर्लफ्रेंड बनाई?”

मैं शरमाते हुए बोला, “नहीं दीदी।”

फिर दीदी ने कहा, “इसलिए तुम मेरे पैरों को घुटनों से ऊपर दबा रहे हो।”

मैं तुरंत शरमाते हुए सॉरी बोला।

दीदी ने कहा, “अरे पागल, इसमें कोई बड़ी बात नहीं। इस उम्र में ऐसा होता है।”

फिर दीदी ने कहा, “चलो, अब मेरी कमर भी दबा दो।”

दीदी को मुस्कुराते हुए यह सब बोलते देख मुझे बहुत अच्छा लगा। फिर मैं और दीदी हमारे बेडरूम में चले गए। दीदी अपनी पीठ मेरी ओर करके बेड पर लेट गईं। मैं दीदी के बगल में बैठकर उनकी कमर दबाने लगा। फिर दीदी बोलीं, “हेमंत, मैं मुंबई से आई तब से तुम मुझे कुछ अलग नज़रों से देख रहे हो। क्या तुम मुझे इतना पसंद कर रहे हो?”

मैंने कुछ जवाब नहीं दिया।

दीदी ने कहा, “शरमाओ मत, मैं अपने छोटे से भाई को डाँटूँगी नहीं।”

फिर मैंने सुखविंदर और मेरे बीच हुई सारी बातें बता दीं।

दीदी ने मुस्कुराते हुए कहा, “तो बोलो मेरे नादान भाई, मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकती हूँ?”

मैंने शर्म से सिर झुका लिया।

फिर दीदी ने कहा, “अच्छा, एक काम करो। कमरे की लाइट और दरवाज़ा बंद करके यहाँ आओ।”

मैंने लाइट और दरवाज़ा बंद किया और बेड की ओर आ रहा था। कमरे में इतना अंधेरा था कि जब मैं बेड के करीब पहुँचा, तो दीदी ने अचानक मेरा हाथ पकड़कर मुझे अपनी गोद में बिठा लिया। कमरे में इतना अंधेरा था कि जब मैंने अपने दोनों हाथ दीदी की जांघों पर रखे, तब मुझे पता चला कि दीदी ने अंधेरा होते ही अपनी नाइटी निकाल दी थी और वह सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

फिर दीदी ने मेरी टी-शर्ट निकाल दी और मेरी पैंट भी उतार दी। फिर दीदी ने अपनी ब्रा खोलकर मेरे कान में कहा, “हेमंत, एक मिनट खड़े हो जाओ, मैं अपनी पैंटी निकाल दूँ।” मैं दीदी की गोद से खड़ा हुआ और देखा कि दीदी अंधेरे में अपनी सफेद पैंटी अपनी बड़ी गांड ऊपर करके निकाल रही थीं।

अब मेरा लंड बहुत कड़क हो चुका था। फिर दीदी बेड के किनारे बैठीं और मेरा हाथ पकड़कर मुझे अपनी दोनों जांघों के बीच ले लिया। उन्होंने अपने नरम होंठों से मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया। फिर दीदी ने अपनी दोनों भारी जांघों से मेरी कमर को पकड़कर मुझे घुटनों के बल बेड के किनारे आधा खड़ा कर दिया। फिर दीदी ने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर अपनी हथेली मेरे दोनों बॉल्स और लंड पर फेरने लगीं।

अब मेरा लंड खिंचकर ऊपर-नीचे होने लगा। दीदी ने मेरे कान में कहा, “हेमंत, अच्छा लग रहा है ना?” मैं शरमाकर हँस दिया। दीदी भी हँसते हुए मेरा एक हाथ पकड़कर अपने स्तनों पर रख दिया। दीदी के स्तन बहुत नरम और मुलायम थे और उनकी निप्पल छोटे-छोटे दानों से उभरी हुई थीं। फिर दीदी ने मेरा दूसरा हाथ पकड़कर अपनी गीली चूत पर रख दिया।

दीदी की चूत का हिस्सा बहुत गर्म था और उनकी चूत के दो सूजे हुए होंठ ऐसे लग रहे थे जैसे साँस ले रहे हों। फिर दीदी ने मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत के छेद पर रख दिया और हँसते हुए बोलीं, “हेमंत, एक बात का ख्याल रखना कि जब तेरा स्पर्म निकलने वाला हो, तो उसे बाहर निकालना, क्योंकि तेरे जीजू को अभी बच्चा नहीं चाहिए।” यह कहते ही दीदी ने अपने दोनों पैरों से मेरी कमर को अपनी ओर चिपका लिया। अब मेरा पूरा लंड दीदी की चूत में चला गया था।

फिर मैंने अपने दोनों हाथों से दीदी की कमर पकड़कर अपनी कमर हिलाने लगा। दीदी ने अपनी चूत को अपने हाथों के बल मेरे लंड से दबाना शुरू कर दिया। अब मेरा लंड बहुत ज़ोर से दीदी की चूत में फिसल रहा था। जब मेरे लंड से पानी निकलने वाला था, मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और मेरी पहली चुदाई के सारे स्पर्म दीदी की जांघ पर छोड़ दिए। फिर दीदी ने भी अपनी उंगलियों को तेज़ी से अपनी चूत पर रगड़कर स्पर्म ज़र्क किया और मुझे अपने साथ नंगे बदन सुला लिया।

Kavya Singh

नमस्ते! मैं काव्या सिंह हूँ - इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री वाली और पिछले 7 साल से हिंदी में इतनी बोल्ड कहानियाँ लिख रही हूँ कि पाठक दोबारा पढ़े बिना रह नहीं सकते। मैं भारतीय समाज के हर छुपे हुए जज़्बात को शब्दों में ढालती हूँ - वो इच्छाएँ, वो चाहतें जो आप दिन में छुपाते हैं लेकिन रात में महसूस करना चाहते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर मेरी कहानियों को पुरस्कार मिले हैं और लाखों पाठकों ने मेरी कहानियों से अपनी रातों को गरमाया है। चलो, आज मेरी कहानी में डूब जाओ!

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