ममेरे भैया का लंड अपने चूत में घुसवाया

मेरा नाम रिया हैं, मैं बस्ती की रहने वाली हूँ। मैं अभी 19 साल की हूँ, रंग गोरा, बदन कच्चा एवं गठीला तथा साईज 36-28-38 है। मैं 12वीं में पढ़ती हूँ। वैसे मैंने क्लास में सहेलियों से सेक्स के किस्से तो खूब सुने पर असली काम करने की कभी सोची भी नहीं थी और खास कर इस सम्बन्ध पर। Hot Cousin Sex Pyasi

बात अभी कुछ दिन पहले की है, अभी सर्दियों की छुट्टियों में मैं अपने मामा के घर गई थी। मेरे मामा के घर में मामा, मामी और प्यारे भैया शांतनु तीन लोग रहते हैं। भैया की उम्र भी 19 साल ही है और वो भी 12वीं साईंस की पढ़ाई करते हैं। जब मैं मामा के घर गई तो घर पर मामी और भैया दोनों थे।

क्योंकि मामा दूसरे शहर में सरकारी जॉब करते थे। मेरे आने पर वे लोग बेहद खुश थे। हम लोग बैठे कुछ घर परिवार के समाचार दिये लिये, फिर मामी ने कहा- रिया तुम दोनों बैठो, मैं चाय बना कर लाती हूँ। भैया ने टी.वी. चालू किया और हम देखने लगे। उस वक्त डर्टी पिक्चर चल रही थी और देखते देखते जब हीरो ने हिरोइन के चूमा तो भैया ने मेरी तरफ देखा, तो मैं शरमा कर थोड़ा सा मुस्करा दी।

तब तक मामी चाय ले के आ गई और हमने चाय पी। उस वक्त मैंने लाल रंग की जीन्स एवं नीले रंग की टीशर्ट पहन रखी थी। उस वक्त मैंने नोट किया कि भाई मेरे उरोजों को घूर रहे थे। फिर शाम को मामी ने खाना बनाया और हम खाना खाकर सोने गये, तभी बाहर से दो औरतें आई और मामी को भी चलने को कहा।

तो मामी ने मुझे कहा- रिया पड़ोस वाले अंकल की बेटी निकिता की अभी शादी हुई है, आज उनके बेटी-दामाद वापस आये हैं, तुम भी चलोगी क्या?

तो मैंने कहा- मामी, आज तो ट्रेन का सफर करके पूरी तरह से थकी हुई हूँ।

तो मामी ने कहा- कोई बात नहीं बेटा, तुम और शांतनु यहीं सो जाओ, और मैं सुबह आ जाऊँगी।

मामी तो चली गई, मैं और भैया लेट गये।

भैया ने पूछा- रिया, कैसी चल रही है तुम्हारी पढ़ाई?

तो मैंने कहा- पढ़ाई तो अच्छी ही चल रही है। तुम्हारी कैसी चल रही है?

तो भैया ने कहा- मस्त चल रही है।

फिर कुछ इधर ऊधर की बातें की और मैंने पूछा- भैया तुम उस वक्त क्या घूर रहे थे।

भैया- वो टीशर्ट पर नाम जो लिखे हुये थे।

मैं- अच्छा, बताओ तुम्हारी क्लासमेट्स भी तो ऐसे लोगो वाली टीशर्ट पहनती होंगी न?

भैया- पर वो इतनी सैक्सी नहीं लगती!

मैं- तो मैं आपको सैक्सी लगती हूँ?

भैया- बेहद! सच बताऊँ रिया, तुम तो अच्छी अच्छी सैक्सी हिरोइनों से भी ज्यादा अच्छी लग रही हो!

मैं- बस बहुत हो गया।

पर आज पहली बार किसी लड़के से ऐसी बातें करके मैंने अपनी पेन्टी को गीला कर दिया।

भैया- रिया, एक बात बोलूँ?

मैं- बोलो !

भैया- तुम नाराज मत होना, प्लीज..

मैं- ठीक है।

भैया- रिया… ‘I LOVE YOU’.

मैं- क्या कह रहे हो भैया? मैं आपकी बहन हूँ।

और भैया अपने बैड से खड़े हुए और मेरे बैड पर आकर मेरे ऊपर आ गये तो मैंने कहा- भैया, क्या कर रहे हो? ये सब गलत है…

तब तक भैया ने मेरे लबों को छुआ और एक जबरदस्त चुम्बन कर दिया। तब मैं बोली ‘LOVE YOU TOO’ भैया चाहती तो मैं भी यही थी कि आपके साथ करूँ।

भैया ने कहा- मैं अब भैया नहीं शांतनु हूँ। प्यारी रिया मुझे भैया मत बोलो।

फिर शांतनु ने मेरे टीशर्ट के ऊपर से ही मेरे कबूतरों को मसलना शुरू कर दिया। वो पागलों की तरह मुझे चाट रहा था।

मैंने कहा- आज मैं तुम्हारी रानी हूँ इतनी जल्दबाजी मत करो।

फिर शांतनु ने मुझे खड़ा किया और मेरे सारे कपड़े अपने हाथों से उतारे और मेरी गुलाबी चूत के दर्शन करके भोग के लिये तैयार हुआ। फिर शांतनु ने मुझे कपड़े खोलने को कहा तो मैंने उसके एक एक करके सारे कपड़े उतार दिये। ज्यों ही मैंने उसकी अण्डरवियर उतारी तो मैं दंग रह गई ‘कम से कम 8 ईंच का लिंग???’ ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

मैं पहली बार किसी मर्द को नंगा देख रही थी। फिर मुझे सोफे पर लिटा कर शांतनु मेरे अंग अंग को चूमने लगा। मैं इस पहले आनन्द में किसी जन्नत की सैर कर रही थी। उसने मेरे साथ, मेरे बदन के साथ 20 मिनट तक चुम्मा-चाटी की और तब तक मेरी चूत से दो बार रस निकल चुका था।

फिर मैंने कहा- अब कुछ कर भाई ! मुझे मत तड़पा प्लीज…

फिर उसने मेरी टाँगों को अपने कंधे पर लेकर जैसे ही अपनी बंदूक को मेरी चूत पर टिकाया तो मेरे पूरे शरीर मे एक करंट दौड़ गया। मैंने सुना था कि पहली बार दर्द बहुत होता है तो मैंने कहा- शांतनु प्लीज धीरे… मुझे डर लग र्हा है, मेरा पहली बार है, दर्द होगा !

शांतनु- अरे मेरी रानी तुझे तो मैं दर्द की आँच तक नहीं आने दूँगा।

और उसने मेरी गीली चूत पर एक जोर का झटका दिया तो आधा लिंग मेरी चूत में फंस गया। मेरी आँखें भर आई और मैं जोर चिल्लाई तो मेरे शांतनु ने मेरे होठों पर किस करके दर्द को कम किया और धीरे-धीरे अपने लिंग को अन्दर बाहर करने लगा।

धीरे-धीरे मुझे भी मजा आने लगा और मैं मधुर मधुर सिसकारियाँ भरने लगी। करीब 20 मिनट हो गये थे मुझे जन्नत की सैर करते हुए, अब मैं दूसरी बार झड़ने वाली थी कि शांतनु ने पूछा- वीर्य अन्दर निकालूँ या बाहर? तो मैंने कहा- अभी कोई दिक्कत नहीं, कल ही मेरी पीरियड खत्म हुई है, अन्दर ही निकाल दो मेरे भाई राजा। और फिर हम दोनों काफी देर तक यूँ ही लेटे रहे और फिर उसी रात हमने चार बार मजे लिये।

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Ritu Agarwal

हैलो दोस्तों! मैं ऋतु अग्रवाल हूँ - कानपुर विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में मास्टर डिग्री पाने वाली और पिछले 5 साल से हिंदी में वो कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी रूह को छू लें और तन को तड़पा दें। मैं मानव व्यवहार और इंसानी इच्छाओं पर गहरा रिसर्च करती हूँ ताकि हर कहानी असली और दिलकश हो। मेरी कहानियाँ लाखों पाठकों ने पढ़ी हैं और हर कोई वापस आता है। मैं समझती हूँ आप क्या चाहते हैं - और वही लिखती हूँ जो आपको पागल कर दे। तो चलो, मेरी कहानी से आज की रात को खास बनाते हैं!

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