लॉकडाउन में पत्नी की सहेली की चूत चोदी- 2

स्लट्टी भाभी फकिंग स्टोरी में मेरी बीवी ने अपनी पड़ोसन सहेली को मेरे सेक्स के बारे में बता रखा था. मौक़ा मिलते ही उसकी तमन्ना मेरे लंड का मजा लेने की थी.

फ्रेंड्स, मैं राहुल पुनः आपको भाभी की चुदाई की कहानी के अगले भाग में मजा देने के लिए हाजिर हूँ. कहानी के पहले भाग बीवी की सहेली की अन्तर्वासना में अब तक आपने पढ़ लिया था कि भाभी मेरे साथ पकड़म पकड़ाई का खेल खेल रही थीं. इसमें यह नियम था कि एक भागेगा और दूसरा पकड़ने की कोशिश करेगा. पकड़ लिया तो वह दूसरे के जिस्म को गुदगुदी करे या कुछ ऐसा करे जिससे वह हिल जाए … तो जीत हार का फैसला हो जाता था. मैंने भाभी को पकड़ लिया था और मैं उन्हें लगातार गुदगुदी कर रहा था.

अब आगे स्लट्टी भाभी फकिंग स्टोरी:

मेरे गुदगुदी करने से भाभी को कोई फर्क नहीं पड़ा. भाभी- लो भैया 30 सेकंड हो गए, मैं फिर से जीत गई … ह्ह्ह्ह.

मेरा लंड 90 डिग्री पर तना हुआ था और भाभी की गांड की दरार की गर्मी पाकर भन्नाया हुआ था. भाभी मेरे खड़े लंड को देखकर मजे ले रही थीं.

भाभी- क्या हुआ? रेणु को भूल गए क्या? मैं- आप तो हो ना.. हह!

भाभी- लेकिन मुझसे तो हार रहे हो! ओके नेक्स्ट टाइम देखते हैं, चलिए आप दौड़िए. मैं- ओके.

मैं दौड़ा. अब की बार मैं प्रकाश की तरफ भागा था तो भाभी की पकड़ में आ गया.

मैं- अब करो! उधर लाइट में आसपास वालों को दिख जाने का डर था.

भाभी- ओके भैया.

भाभी फट से नीचे हो गईं और उन्होंने मेरा निक्कर खींच लिया. मैंने भी कंट्रोल किया.

अन्दर से मेरा 7 इंच का खड़ा लंड उनके सामने आ गया और वह फनफनाने लगा. मोटा लंड देखकर भाभी के मुँह में भी पानी आ गया.

जैसे ही उन्होंने अंडरवियर निकालने की कोशिश की कि तभी 30 सेकंड हो गए. मैंने उन्हें समय का हवाला देकर रोक लिया.

मैं- येए .. हार गईं … आप हार गईं! भाभी- आपने खुद ही मौका नहीं दिया.

मैं- अच्छा, नहीं तो क्या करतीं? भाभी- जीत जाती … और नहीं जीतती तो हारकर भी मजा ही आ जाता. मैं रेणु थोड़ी ना हूँ!

रेणु मुँह में लंड नहीं लेती, शायद ये बात भी उसने भाभी को बता दी थी.

मैं- अच्छा .. रेणु नहीं हो इसका क्या मतलब हुआ? भाभी- नेक्स्ट टाइम समझ जाएंगे .. हा हा हा.

अब उन्हें पकड़ने की मेरी बारी आ गई थी. पकड़ने से ज्यादा एक दूसरे को टच करने में मजा आ रहा था और अब तो भाभी ने मेरा सात इंच का मोटा लंड भी देख लिया था.

खैर … मैं भागा. भाभी को इस बार मैंने अंधेरे में पकड़ लिया. मैंने उन्हें पीछे से जकड़ लिया और उनके गले पर किस करने लगा. वे चुपचाप खड़ी रहीं.

मैंने अपने दोनों हाथ उनके बूब्स पर रख दिए. पर मेरी गांड फट रही थी कि कहीं ज्यादा न हो जाए.

मेरा लंड एकदम उनकी गांड के निशाने पर लगा हुआ था.

तभी भाभी ने गांड पीछे को की. मैं समझ गया कि भाभी चुदने को रेडी हैं.

लेकिन तभी भाभी बोलीं- भैया 30 सेकंड हो गए. मैं जीत गई … याह हह.

अब 12 बज गए थे.

मैंने भाभी से कहा कि मैं बाथरूम से आता हूँ. वे बोलीं- अभी नहीं … थोड़ी देर और रुको न … मुझे तो नींद ही नहीं आ रही है! वैसे भी बाथरूम में ऐसा क्या करना?

भाभी ऐसा कह कर मेरे मजे ले रही थीं … क्योंकि मेरे लौड़े की हालत देख कर वे समझ गई थीं कि मैं मुठ मारना चाहता हूँ.

भाभी- चलो आप भागो. मैं- ओके.

मैं इस बार फिर से लाइट में ही रुका.

इस बार तो भाभी ने बिना देर किए नीचे बैठ कर मेरा अंडरवियर निकाल दिया और मेरे लंड को सीधा अपने मुँह में लेकर किसी भूखी रंडी की तरह उस पर टूट पड़ीं.

मैं देखता रह गया. साला इतनी भूख तो किसी भिखारी में भी नहीं रहती.

मैं हार गया था लेकिन भाभी ने मेरा लंड मुँह से नहीं निकाला. वे लगी ही रहीं और कुछ ही मिनट में मेरे लंड ने पिचकारी छोड दी तो वे मेरा सारा माल गटक गईं.

भाभी- ये ये … जीत गई मैं … आपने तो रोका ही नहीं! मैं- आपने तो पूरा खाली कर दिया यार भाभी … कसम से बहुत मजा आया.. हह … गजब चूसती हो आप!

भाभी- इतने से ही मजा आ गया … बाप रे भैया … इतना बड़ा रखे हुए हो और! मैं अपने लौड़े को सहलाते हुए बोला- तो आपको मेरा पसंद आ गया है क्या?

भाभी- हां बहुत पसंद आया है. मैं रेणु थोड़ी ना हूँ जो चूस कर मजा ही न लूं इतनी बड़ी लॉलीपॉप की! उन्होंने मज़ाक करते हुए कहा.

मैं- अच्छा … मतलब मेरी बड़ी लॉलीपॉप पसंद आ गई आपको!

अब तक रात के एक बजे का समय हो गया था. रेणु का कॉल आने लगा. भाभी का भी कॉल आने लगा था.

मैं- चलो भाभी, आप भी बात कर लो. मैं भी बात करके सोता हूँ. भाभी- ना … मुझे तो बात करके वह सब करना है. आपको भी तो टाइम लग जाएगा! मैं- ना, वह सब तो सुबह ही हो गया था … अब नहीं.

भाभी- रेणु तो आपकी बड़ी तारीफ करती है. मैं- कैसी तारीफ?

भाभी- यही कि आपका हमेशा तैयार ही रहता है हा हा हा. मैं- चलो यार भाभी, बाय!

अब हम लोग अपने-अपने फ्लैट में आ गए.

फिर रेणु से बात करते-करते 2 बज गए. तभी व्हाट्सएप पर भाभी का मैसेज आया- हो गया .. हहह!

मैं- हां बात हो गई? भाभी- अरे बात नहीं .. वह?

मैंने कुछ नहीं कहा.

भाभी- नींद नहीं आ रही है भैया … चलो न एक एक टी हो जाए? मैं- ओके मैं बनाता हूँ. भाभी- मैं आकर दूध डालूँ या .. हा हा हा.

मैं- हां भाभी, वहीं आपके वाले फ्रिज में है. मैं आता हूँ, वहीं बनाता हूँ. आप अपना खोलो … गेट. भाभी- हा हा हा … ओके आ जाओ खोलती हूँ मैं …. अपनी! भाभी ने गेट खोला.

कसम से क्या माल लग रही थीं, उन्होंने बस एक शर्ट पहनी हुई थी जो छाती के थोड़ी सी नीचे आ रही थी. अन्दर ब्रा भी नहीं पहनी थी. पैंटी शायद थी लेकिन लोअर नहीं था.

मेरा लंड तो एकदम से 90 डिग्री पर खड़ा हो गया.

मैं- भाभी आप ऐसे सोती हो? भाभी- हां क्यों? ज़्यादा है क्या? मैं- नहीं नहीं इतना तो सही है.

भाभी- आप पूरे कपड़े पहनकर सोते हो क्या हा हा हा. मैं- हां. मैंने चाय बनाई.

भाभी ने कहा- बेडरूम में ही आ जाओ.

जैसे ही मैं अन्दर गया, बेड पर एक ब्रा और पैंटी रखी हुई थी.

भाभी- बैठ जाओ वह ब्रा-पैंटी मेरी ही है, बैठ जाओ … नो प्रॉब्लम!

भाभी ने रूही को एक साइड करके आराम से लेटने को कहा.

मैं- भाभी, मैं चलता हूँ. भाभी- क्यों? बैठो कौन सा अभी सो जाओगे?

मैं- हां सोऊंगा तो नहीं … पर …

वे मेरे लंड को बार-बार घूर कर रही थीं. मैं भी उनकी शर्ट को देखे जा रहा था, जो उनकी छाती के प्रदर्शन के लिए आतुर थी.

मैंने उठने का प्रयास किया. तभी भाभी ने एकदम से मुझे अपनी तरफ खींच लिया. वे बोलीं- मैं प्यासी हूँ. मुझे आपका लंड चाहिए!

मैंने ड्रामा किया क्योंकि मुझे एक बात बार बार खटकने लगी थी कि कहीं रेणु और इसकी मिलीभगत न हो.

मैंने कहा- मैं रेणु से धोखा नहीं कर सकता! वे हंस कर बोलीं- ये ड्रामा छत पर भी तो कर सकते थे, जब मैंने आपका लंड चूसा था? मैं चुप था.

भाभी बोलीं- आप परेशान न हो … रेणु को कुछ नहीं पता चलेगा. उनके मुँह से यह सुनते ही मैं उनकी बांहों में समा गया.

अब हम दोनों दो प्यासे प्रेमियों की भांति एक दूसरे के होंठों को चूस रहे थे और हम दोनों की जीभें एक दूसरे के अन्दर घुस कर रस पीने में लगी थीं. जल्द ही हम दोनों नग्न हो गए और मैं भाभी के ऊपर चढ़ गया. मैंने उनके दूध चूसे और उतनी देर में भाभी ने मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चुत पर लगा दिया.

मैं तो वैसे ही भाभी की लेने के लिए उतावला था तो जरा सा धक्का लगाया कि भाभी की ‘आह मर गई’ की आवाज निकल गई.

मैंने रुक कर भाभी को चूमा और पूछा- क्या हुआ? भाभी हंस कर बोलीं- आपका बड़ा साइज़ है. इसलिए दर्द सा हुआ!

मैंने उनकी एक चूची को अपने मुँह में दबाया और खींच कर चूसा, तो इस बार उनके स्तन में से दूध आ गया. मैंने पूछा- क्या रूही अभी भी पीती है? वे बोलीं- नहीं … वह तो कभी कभी जब ज्यादा परेशान करती है न तो उसके मुँह में निप्पल दे देती हूँ.

मैंने हुं कह कर वापस से निप्पल को चूसा. भाभी मीठी आह की आवाज भर कर बोलीं- सच में भैया आप चूस रहे हो न … तो नीचे चुत में बड़ा मजा आ रहा है. सुरसुरी सी हो रही है.

मैंने लंड को हल्का सा धक्का दिया तो भाभी ने मेरी छाती पर हाथ अड़ाते हुए कहा- जरा रुक कर करना … लंड को सैट तो हो जाने दो!

कुछ देर तक हम दोनों यूं ही मस्ती करते रहे. उसी बीच भाभी ने अपनी कमर हिलाई तो मैं समझ गया कि अब भाभी की चुत मेरा लंड लेने के लिए रेडी हो गई है.

मैंने पुनः धक्का दिया तो इस बार भाभी ने आवाज नहीं निकाली, बल्कि वे आह करके कराहीं. मैंने पूछा- रेल चला दूँ? वे हंस कर हां बोलीं.

बस हम दोनों के बीच ताबड़तोड़ चुदाई का मंजर चलने लगा था.

करीब बीस मिनट की स्लट्टी भाभी फकिंग के बाद वे झड़ गईं और उनके ठीक बाद मैं भी झड़ने को हुआ, भाभी ने मुझे चेताया और मैंने लंड बाहर निकाल कर उनके मुँह में दे दिया.

भाभी ने रंडी के जैसे मेरे लंड का वीर्य चूस लिया.

कुछ देर के बाद हम दोनों वापस गर्म हो गए और इस बार भाभी घोड़ी बन कर चुदीं. कुछ देर तक चुदने के बाद वे बोलीं- मुझे राइड करने दो!

मैंने ओके कहा और चित लेट गया. वे अपनी दोनों टांगें मेरे दोनों बाजू डालती हुई लंड पर चुत फंसा कर धीरे धीरे बैठने लगीं.

कुछ ही पलों में मेरा लंड भाभी की चुत में गुम हो गया.

इस बार भाभी ने झुक कर मुझे एक दूध चूसने को दे दिया और खुद कमर हिलाती हुई लंड से चुत रगड़वाने लगीं.

करीब बीस मिनट बाद हम दोनों झड़ गए और थाक कर नंगे ही लिपट कर सो गए.

उसके बाद से तो जब तक लॉकडाउन चला, भाभी मेरे लंड से चुद चुद कर मजा देती रहीं और मुझसे मजा लेती रहीं.

बाद में भाभी के पेट में बात न पची और मेरी वाइफ रेणु को सब पता चल गया. फिर उसने एक बार थ्री-सम सेक्स किया और उसी दौरान सोना भाभी ने फ़ोर-सम सेक्स के लिए कहा. रेणु ने मेरी तरफ देखा और मैंने हामी भर दी.

दोस्तो वह सब कैसे हुआ, यदि आपको जानना है तो प्लीज मुझे लिखें.

आपको मेरी इस पड़ोसन स्लट्टी भाभी फकिंग स्टोरी में मजा आया होगा … प्लीज अपने कमेंट्स व मेल जरूर भेजें. [email protected]

Priya Sharma

हैंलो जी! मैं प्रिया शर्मा हूँ - दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में डिग्री पकड़ने वाली और पिछले 5 साल से कहानी लेखन में अपना जलवा दिखाने वाली लेखिका। मुझे मानव मनों की चाहतें और इच्छाएँ पढ़ना बड़ा मज़ा आता है। मैं उस तरह की कहानियाँ लिखती हूँ जो आपके मन में छुपे हुए जज़्बातों को बाहर निकाल दें। मेरी कहानियाँ सैकड़ों पाठकों की गर्म रातों को और भी गर्म कर चुकी हैं। चलो, एक साथ मज़े करते हैं - पढ़ते हैं, महसूस करते हैं और जीते हैं!

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