सविता भाभी और पार्टी

दोस्तो.. आज आप सबकी प्यारी हॉट एंड सेक्सी सविता भाभी का एक और रंगीन किस्सा बयान कर रहा हूँ।

आपको तो मालूम ही कि सेक्सी कार्टून की दुनिया की बेताज चुदक्कड़ सविता भाभी अपने नशीले हुस्न को किस तरह आप जैसे अपने देवरों के सामने परोसती हैं।

उनके पति अशोक पटेल ने एक दिन सविता भाभी से बताया कि शाम को वे दोनों उनके ऑफिस में साथ में काम करने वाली लता जी के घर एक पार्टी में जाएंगे।

यह पार्टी सिर्फ चार लोगों की थी जिसमें थुलथुल सी दिखने वाली लता जी, उनके पति मनोज और सविता भाभी व अशोक ही शामिल होने वाले थे।

शाम को घर आते ही अशोक ने सविता भाभी से कहा- अरे जल्दी तैयार हो जाओ, हमें उनके घर खाने पर समय पर पहुँचना चाहिए.. कहीं देर न हो जाए।

सविता भाभी को इस तरह की खाने पर दी जाने वाली पार्टी बड़ी बोरिंग लगती थीं।

खैर.. सविता भाभी ने अपना सुडौल जिस्म हमेशा की तरह बड़े ही आकर्षक तरीके से तैयार किया। उनकी पसंदीदा नेट वाली साड़ी, जो उनकी नाभि के नीचे से बंधती थी और बड़े खुले गले का ब्लाउज.. उनकी कंचन सी काया पर बहुत फब रहा था। खुले गले के ब्लाउज से उनके मम्मों की हालत पिंजड़े में बंद कबूतरों के जैसी दिखती थी।

अशोक और सविता भाभी जल्द ही मनोज और लता के घर पहुँच गए।

अशोक ने दरवाजे पर लगी घन्टी को दबाया और कुछ ही पलों में लता जी बाहर आ गईं।

‘आओ अशोक.. तुम लोग एकदम सही समय पर आए हो।’

सविता भाभी ने भी हंस कर औपचारिकता निभाई।

लता- अशोक इनसे मिलो.. ये मेरे पति मनोज हैं और मनोज, ये मेरे ऑफिस के कुलीग अशोक पटेल और उनकी बीवी सविता हैं।

बस पार्टी शुरू हो गई मेल मुलाक़ात के बाद इधर-उधर की गप्पें.. इन सबसे सविता भाभी को बड़ी बोरियत होने लगी। वे सोचने लगीं कि ये बोरिंग पार्टी कब खत्म होगी।

इसी के बाद उनके दिमाग में मनोज और और लता जी के लिए बात आई और सविता भाभी ने सोचा कि ये मोटी और थुलथुल लता जी से मनोज जैसे स्मार्ट और हैण्डसम आदमी का क्या कैसे चलता होगा.. मनोज की जिस्मानी भूख तो मिटती ही नहीं होगी। मनोज की जिन्दगी तो एकदम ठंडी और नीरस ही होगी।

यह सोचने के बाद उन्होंने एक बार फिर मनोज की ओर देखा और उसकी आकर्षक देहयष्टि को देख कर सविता भाभी जैसी चूत से दयालु औरत की कामुक सोच ने अंगड़ाई ली और सोचा कि सविता मुझे यकीन है कि तुम मनोज की जिन्दगी में कुछ रंगीनी अवश्य घोल सकती हो।

बस सविता भाभी की चूत भी मचलने लगी और उन्होंने अपने पल्लू को गिराते हुए अपने मादक अंदाज में मनोज की ओर देखा और कहा- मनोज जी क्या आप मेरे एक गिलास ठंडा और ला सकते हैं।

सविता भाभी को मालूम था कि थुलथुल लता उठेगी ही नहीं और वही हुआ भी।

मनोज ने तुरंत उठते हुए कहा- जी जरूर मिसेज पटेल मैं आपके लिए अभी किचन से ठंडा लाता हूँ। मनोज इतना कह कर किचन की तरफ जाने लगा।

तो पीछे से सविता भाभी ने कहा- चलिए मैं भी आपके साथ हाथ बंटाती हूँ। अब मनोज के साथ सविता भाभी भी रसोई में आ गईं।

उन्होंने अपनी साड़ी को अपने मम्मों पर से हटा दिया और एक तरफ बैठकर अपनी तनी हुई चूचियों से मनोज को अपने जाल में फंसाते हुए पूछा- हाँ तो मनोज, अब बताओ लता तो हरदम व्यस्त रहती होगी, तुम अपना वक्त कैसे काटते हो?

सविता भाभी की भाषा में ‘आप’ और ‘जी’ जैसे संबोधन खत्म हो चुके थे।

मनोज ने पलट कर सविता भाभी की ओर देखा तो वो सविता भाभी की पहाड़ सी उठी हुई चूचियों से अपनी नजरों को ही नहीं हटा पाया।

उसने सविता भाभी के प्रश्न का मर्म समझ लिया था, सो उसने जबाव दिया- ओह्ह.. मुझे उसकी कोई परवाह नहीं है.. मेरे पास और भी बहुत कुछ है करने को..

सविता भाभी ने मनोज की नजरों को ताड़ लिया था। उन्होंने अपनी चूचियों का प्रदर्शन करते हुए एक बर्फ का टुकड़ा बड़े ही अश्लील भाव से चूसते हुए कहा-दिलचस्प.. शायद मैं भी कभी इन ‘बहुत कुछ’ में हिस्सा बन सकूँ?’ अभी मनोज कोई जबाव देता, तभी सविता भाभी ने अपना कामास्त्र छोड़ते हुए कहा- मनोज जी लोगे..?

इतना कह कर उन्होंने अपने चूचों को अपने हाथों से दबा कर और उभार दिया।

अब मनोज समझ चुका था कि सविता भाभी क्या ‘लेने’ के लिए कह रही हैं।

इधर सविता भाभी ने आगे बढ़ कर उसके मुँह से बर्फ का टुकड़ा लगा दिया और मनोज ने भाभी को अपने करीब खींचते हुए उनके चूतड़ों पर अपना हाथ फेर दिया।

बस अब मामला गर्म हो चला था मनोज ने बर्फ के टुकड़े को मुँह में दबा कर सविता भाभी की चूचियों पर फिराना चालू कर दिया और सविता भाभी की आँखें वासना से बंद हो गईं।

अब सविता भाभी और मनोज के बीच चूमा चाटी होने लगी। चूंकि दोनों किचन में थे और बाहर सविता के पति और मनोज की पत्नी इन दोनों के खाने पर साथ आने का इन्तजार में बात-चीत में मशगूल थे।

सविता भाभी ने इस छोटे से अंतराल में किस तरह मनोज के साथ चुदाई की इस पूरी कहानी को आप सविता भाभी की कार्टून कथा में देखने लिए आमंत्रित हैं।

Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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