देवर भाभी ने ट्यूबवेल पर चुदाई की

अक्टूबर का आखिरी हफ्ता था, ठंडी हवा बाजार की गलियों में सिहरन पैदा कर रही थी। संध्या और उसका देवर पवन बाजार की ओर जा रहे थे। संध्या 5 फुट 6 इंच की स्लिम बॉडी वाली औरत थी, पतली कमर जो उसके साड़ी के नीचे लहरा रही थी। Open Bathroom Sex Story

पवन का एथलेटिक बॉडी था, मजबूत कंधे और छुपी हुई ताकत जो उसे आकर्षक बनाती थी। बाजार के रास्ते में एक ट्यूबवेल बह रहा था, ठंडा पानी जमीन पर बहता हुआ चमक रहा था। पवन ने हंसते हुए कहा, ‘भाभी, अगर कोई इस ठंडे पानी में नहा ले तो मैं 1000 रुपये दूंगा। इतनी ठंड में कौन पागल होगा?’

संध्या ने एक पल सोचा, फिर शरारती मुस्कान के साथ बोली, ‘ठीक है, मैं नहा लूंगी। लेकिन कपड़े कैसे उतारूंगी? सबके सामने तो नहीं।’ पवन ने आंखें चमकाईं, ‘नंगे होकर नहाओ भाभी, कोई देखेगा नहीं यहां।’ संध्या का दिल धड़कने लगा, लेकिन 1000 रुपये और पवन की चुनौती ने उसे उकसा दिया।

वह पास के झाड़ियों के पीछे चली गई और साड़ी, ब्लाउज, सब उतार दिया। उसकी स्लिम बॉडी नंगी हो गई – छोटे-छोटे स्तन, पतली कमर और चिकनी चूत जो ठंड से सिकुड़ रही थी। वह पानी के टैंक में उतरी, ठंडा पानी उसके नंगे बदन पर गिरा और वह सिहर उठी। ‘ओह… कितना ठंडा है!’

लेकिन वह नहाने लगी, पानी उसके बालों से टपक रहा था। पवन ने चुपके से उसके कपड़े उठा लिए। संध्या ने देखा तो चिल्लाई, ‘पवन! मेरे कपड़े कहां?’ पवन ने कपड़े छिपाते हुए कहा, ‘भाभी, मत करो ये। लेकिन एक शर्त है – मैं तुम्हें चोदूंगा। वरना कपड़े नहीं मिलेंगे।’

संध्या की आंखें फैल गईं, लेकिन ठंड और नंगापन उसे मजबूर कर रहा था। ‘ठीक है… लेकिन जल्दी।’ पवन ने अपनी पैंट उतारी, उसका 6 इंच का मोटा लंड खड़ा हो चुका था। वह नंगा होकर पानी में कूदा, ठंडा पानी उसके लंड पर लगा तो और सख्त हो गया।

दोनों ने नहाना खत्म किया और बाहर निकले। संध्या का बदन भीग रहा था, उसके निप्पल सख्त हो चुके थे। पवन ने उसे टैंक के किनारे खींचा। ‘भाभी, पहले मेरा लंड चूसो।’ संध्या घुटनों पर बैठ गई, ठंडी हवा में कांपते हुए पवन के लंड को मुंह में लिया।

उसकी जीभ लंड की चोटी पर घूमी, चूसने लगी। पवन ने उसके बाल पकड़े, ‘हां भाभी, ऐसे ही… गहराई तक लो।’ संध्या ने जोर-जोर से चूसा, लंड पर थूक लग गया, आवाजें आने लगीं – चपचप। पवन का लंड उसके गले तक चला गया, वह खांस रही थी लेकिन रुक नहीं रही।

फिर पवन टैंक के किनारे बैठ गया, पैर फैलाए। ‘अब चढ़ो भाभी, मेरे लंड पर सवार हो जाओ।’ संध्या ने एक पैर उठाया, अपनी चूत लंड पर सेट की और नीचे बैठ गई। ‘आह्ह… कितना मोटा है!’ लंड पूरी तरह अंदर चला गया, उसकी पतली कमर हिलने लगी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

वह ऊपर-नीचे होने लगी, स्तन उछल रहे थे। पवन ने उसके कूल्हे पकड़े, नीचे से धक्के मारने लगा। ‘चोदो मुझे पवन… जोर से!’ संध्या चीखी, चूत में गर्मी फैल रही थी। ठंडे मौसम में ये गर्मी और उत्तेजक थी। वे दोनों पसीने से तर हो गए, लंड चूत में अंदर-बाहर हो रहा था।

पहला राउंड खत्म होने के बाद पवन ने उसे घुमाया। ‘अब डॉगी स्टाइल भाभी।’ संध्या चारों हाथ-पैरों पर झुक गई, गांड ऊपर की। पवन ने पीछे से लंड चूत में घुसेड़ दिया। ‘हां… मारो धक्के!’ पवन ने कमर पकड़ी, जोर-जोर से चोदने लगा। आवाजें गूंज रही थीं – प्लाप प्लाप।

उसकी गांड लाल हो गई, चूत गीली होकर लंड को चूस रही थी। पवन ने एक हाथ से उसके स्तन मसले, निप्पल चूसे। संध्या की चीखें बाजार की शांति भंग कर रही थीं, लेकिन कोई नहीं था आसपास। तीसरा राउंड में पवन ने संध्या को खड़ा किया, एक पैर उठाकर अपनी कमर पर लटका दिया।

‘अब ऐसे चोदता हूं।’ लंड सीधा चूत में घुसा, वह धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। संध्या का सिर पीछे झुका, ‘ओह पवन… गहराई तक… फाड़ दो मेरी चूत!’ पवन ने स्पीड बढ़ाई, लंड पूरी ताकत से अंदर जा रहा था। ठंडी हवा उनके पसीने को सुखा रही थी, लेकिन आग सुलग रही थी। आखिरकार पवन चिल्लाया, ‘आ रहा हूं भाभी!’ और गर्म वीर्य चूत के अंदर छोड़ दिया।

संध्या भी कांप गई, orgasms की लहर दौड़ गई। दोनों थककर लेट गए, कपड़े पहने। लेकिन ये रिश्ता बदल चुका था। घर लौटकर वे चुपके-चुपके मिलने लगे। पवन ने संध्या को अपनी बना लिया, वे पति-पत्नी की तरह जीने लगे। रातें गर्म हो गईं, रोज चुदाई होती। एक साल बाद संध्या ने पवन के बच्चे को जन्म दिया। अब वे खुशहाल जोड़ा थे, बाजार की उस ठंडी शाम की याद हमेशा ताजा रहती।

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Ritu Agarwal

हैलो दोस्तों! मैं ऋतु अग्रवाल हूँ - कानपुर विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में मास्टर डिग्री पाने वाली और पिछले 5 साल से हिंदी में वो कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी रूह को छू लें और तन को तड़पा दें। मैं मानव व्यवहार और इंसानी इच्छाओं पर गहरा रिसर्च करती हूँ ताकि हर कहानी असली और दिलकश हो। मेरी कहानियाँ लाखों पाठकों ने पढ़ी हैं और हर कोई वापस आता है। मैं समझती हूँ आप क्या चाहते हैं - और वही लिखती हूँ जो आपको पागल कर दे। तो चलो, मेरी कहानी से आज की रात को खास बनाते हैं!

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