बॉयफ्रेंड से चुदवाते टाइम पापा ने देख लिया

मेरा नाम निशा है, और मैं दिल्ली के एक पॉश इलाके में रहती हूँ। मेरा घर एक बड़ा-सा बंगला है, जहाँ मैं, मेरी मम्मी, पापा और मेरा बड़ा भाई रहते हैं। मैं आपको अपना फिगर बता दूँ, मेरे बूब्स 32 इंच के हैं, कमर 28 इंच की, और गांड 34 इंच की, यानी मेरा फिगर 32-28-34 है। मेरी उम्र 19 साल है, और मैं दिल्ली के एक नामी कॉलेज में फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट हूँ। Delhi Papa Beti Chudai

मेरा रंग दूध-सा गोरा है, आँखें नैचुरली ब्लूइश ग्रीन हैं, और मेरे घने काले बाल कमर तक लहराते हैं। जो भी लड़का मुझे एक बार देख ले, उसका लंड बिना मुठ मारे चैन नहीं लेता। मेरी स्माइल और कातिलाना अदा किसी का भी दिल चुरा लेती है। स्कूल में मुझे चार लड़कों ने प्रपोज किया था, जिनमें से एक संजीव था, मेरा बॉयफ्रेंड।

संजीव मुझसे दो साल सीनियर है और कॉलेज में थर्ड ईयर में है। कॉलेज में भी छह लड़कों ने मुझे प्रपोज किया, लेकिन मैं संजीव के लिए लॉयल थी। संजीव का स्टाइल, उसकी बातें, और उसका केयरिंग नेचर मुझे बहुत पसंद है। मेरे पापा की बात करूँ तो उनकी बॉडी वेल-बिल्ट है।

चौड़ी छाती, मस्कुलर बाहें, और उनका 9 इंच का लंड, जिसके बारे में मैंने सुना था जब मम्मी और उनकी सहेलियाँ आपस में मस्ती-मजाक में बातें करती थीं। मेरे फीचर्स बिल्कुल पापा पर गए हैं—काले घने बाल, ब्लूइश ग्रीन आँखें, और वही शार्प जॉलाइन। पापा को देखकर कोई भी कह सकता है कि वो जवान दिनों में कितने हैंडसम रहे होंगे।

अब कहानी पर आते हैं। ये बात मेरे 19वें बर्थडे की है। मेरे बंगले में एक ग्रैंड पार्टी रखी गई थी। पूरा हॉल रंग-बिरंगी लाइट्स, फूलों, और बैलून से सजा था। मेरे सारे कॉलेज फ्रेंड्स, स्कूल के दोस्त, और संजीव भी आया था। मम्मी, पापा, और भैया उस दिन घर पर नहीं थे, क्योंकि ये सिर्फ मेरी फ्रेंड्स की पार्टी थी।

म्यूजिक तेज था, डांस फ्लोर पर हर कोई थिरक रहा था, और माहौल में एक अजीब-सी मस्ती थी। मैंने एक टाइट रेड ड्रेस पहनी थी, जो मेरे कर्व्स को परफेक्टली हाइलाइट कर रही थी। मेरी गांड उस ड्रेस में इतनी उभरी हुई थी कि लड़के बार-बार मुझे घूर रहे थे।

रात के 2 बज गए, और धीरे-धीरे मेरे सारे फ्रेंड्स चले गए। लेकिन संजीव रुका था। उसने कहा कि वो मुझे अकेले में एक स्पेशल गिफ्ट देना चाहता है। चूंकि पापा, मम्मी, और भैया अगले दिन आने वाले थे, मैंने उसे रुकने की इजाजत दे दी। हम दोनों मेरे रूम में चले गए, जो सेकंड फ्लोर पर है। मेरा रूम बड़ा है, एक किंग-साइज बेड, डिम लाइट्स, और एक बड़ा-सा काउच। मैं काउच पर बैठ गई, मेरे पैर थकान से चूर थे।

मैं: यार, आज बहुत थक गई हूँ। डांस ने तो कमर तोड़ दी।

संजीव: (हंसते हुए) अरे, तूने तो डांस फ्लोर पर आग लगा दी थी। हर कोई तुझ पर ही फिदा था।

मैं: (मुस्कुराते हुए) अच्छा, अब मेरा गिफ्ट दिखा, कितना इंतजार करवाएगा?

संजीव: (आँख मारते हुए) सब्र कर, मेरी जान। पहले तुझसे एक जरूरी बात करनी है। देख, अब तू 19 की हो गई है, एडल्ट है। हम एक सीरियस रिलेशनशिप में जा सकते हैं। तू मेरे साथ ऐसा रिश्ता चाहेगी?

मैंने उसकी आँखों में देखा, उसका चेहरा इतना सीरियस और प्यारा था। मैंने उसे गाल पर एक हल्का-सा किस किया और कहा: ये भी कोई पूछने वाली बात है? इतने केयरिंग लड़के को कौन छोड़ना चाहेगा?

संजीव ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया, जैसे मैं कोई हल्की-सी गुड़िया हूँ। उसने मुझे बेड पर लिटाया और मेरे ऊपर झुक गया। हम दोनों की साँसें तेज थीं, और कमरे में एक अजीब-सी गर्मी थी। उसने मेरी ड्रेस के स्ट्रैप्स को धीरे-धीरे खींचा, और मेरे बूब्स को टच करने लगा।

हम जस्ट किस और टच में खोए थे कि तभी मेरे रूम का दरवाजा जोर से खुला। पापा ने अंदर आते ही लाइट्स ऑन कर दीं। मैं तो एकदम सन्न रह गई। मुझे याद ही नहीं रहा कि पापा के पास मेरे रूम की डुप्लिकेट की है, और वो कभी भी आ सकते हैं। संजीव ने मेरी ड्रेस पहले ही उतार दी थी, और मेरे शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था।

मैं नंगी थी, और मेरी चूत और बूब्स हवा में खुले थे। हम दोनों इतना डर गए कि मेरी साँस अटक गई। मैंने जल्दी से रजाई खींची और खुद को ढक लिया। पापा का चेहरा गुस्से से लाल था। संजीव सर झुकाए बैठा था, क्योंकि वो पापा के बेस्ट फ्रेंड का बेटा है, और उसे पापा का गुस्सा अच्छे से पता था। पापा ने सख्त आवाज में कहा: बेटा, तुम घर जाओ। मैं कल तुमसे और तुम्हारे डैड से बात करूँगा।

संजीव: (हकलाते हुए) वो… अंकल…

पापा: (गुस्से में चिल्लाए) जाओ!

संजीव ने एक बार मुझे देखा और चुपचाप चला गया। मेरे दिल की धड़कन इतनी तेज थी कि मुझे लग रहा था कि वो बाहर निकल आएगी। पापा मेरे पास आए और मेरे बेड के किनारे बैठ गए। उन्होंने मेरी रजाई हटाई, और मैं अपनी चूत और बूब्स को हाथों से ढकने लगी। मेरी बॉडी काँप रही थी, और मेरी आँखों में डर साफ दिख रहा था।

पापा: (शांत लेकिन सख्त आवाज में) अपने कपड़े वापस पहन लो, और पहनकर मुझे अंदर बुलाना। तुझसे बात करनी है।

पापा बाहर चले गए। मैंने जल्दी-जल्दी में जो कपड़े मिले, पहन लिए। मैंने एक मिनी स्कर्ट पहनी, जो इतनी छोटी थी कि मेरी आधी गांड बाहर झाँक रही थी। ऊपर से मैंने एक टाइट क्रॉप टॉप पहना, जो मेरे बूब्स को मुश्किल से कवर कर रहा था। जल्दबाजी में मैंने ब्रा और पैंटी पहनना भूल गई। मेरे निपल्स टॉप के ऊपर से उभर रहे थे, और स्कर्ट इतनी टाइट थी कि मेरी चूत की शेप साफ दिख रही थी। मैंने पापा को अंदर बुलाया। “Delhi Papa Beti Chudai”

मैं: (रोते हुए) पापा, मैं सॉरी हूँ। प्लीज मम्मी को कुछ मत बताना, प्लीज।

पापा: (अपना ब्लेजर और बेल्ट खोलते हुए) अब गलती की है तो सजा तो मिलेगी न, बेटा।

मैं: (डरते हुए) पापा, आप मुझे मारोगे? (मेरी आँखों में आँसू थे)

पापा: (मुस्कुराते हुए) हाँ, लेकिन एक दूसरा ऑप्शन भी है। (उन्होंने अपना हाथ मेरी इनर थाइस पर रख दिया, और धीरे-धीरे मेरी स्कर्ट के अंदर ले गए।)

मैं: (घबराते हुए) पापा, आप ये क्या कर रहे हैं?

पापा: (आँखों में एक अजीब-सी चमक के साथ) वही जो तू संजीव के साथ करने वाली थी।

मेरा दिमाग सुन्न हो गया। मैंने कहा: लेकिन ये सब गलत है, पापा। मैं आपकी बेटी हूँ। मम्मी को पता चलेगा तो उनका दिल टूट जाएगा। मैं उन्हें धोखा नहीं दे सकती।

पापा: (ठंडी आवाज में) ठीक है, तो फिर मार खा ले।

मैं: (रोते हुए) नहीं, प्लीज नहीं। ठीक है… मैं… मैं सेक्स करने को तैयार हूँ।

मेरे मुँह से ये शब्द निकलते ही मुझे खुद पर शर्मिंदगी महसूस हुई, लेकिन डर इतना था कि मैंने हामी भर दी। पापा ने कहा: चल, आजा। घूम के पेट के बल मेरी गोद में लेट जा, और अपनी गांड दिखा। मैं काँपते हुए उनकी गोद में लेट गई। मेरी स्कर्ट इतनी छोटी थी कि मेरी गोरी, गोल गांड पहले से ही बाहर थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

पापा ने मेरी स्कर्ट को और ऊपर उठाया, और मेरी गांड को सहलाने लगे। उनकी उंगलियाँ मेरी मुलायम स्किन पर फिसल रही थीं, और मेरे शरीर में एक अजीब-सी सिहरन दौड़ रही थी। फिर उन्होंने मेरी गांड को जोर से दबाया, और मैंने एक हल्की-सी सिसकारी भरी। “Delhi Papa Beti Chudai”

अचानक पापा खड़े हो गए। मैं समझी कि अब क्या होगा, लेकिन तभी पापा ने अपनी बेल्ट उठाई और मेरी गांड पर जोर से मारी। “चटाक!” आवाज इतनी तेज थी कि मेरा पूरा शरीर सिहर गया। मेरी गांड पर लाल निशान पड़ गया, और मेरी आँखों में आँसू आ गए।

मैं: (चीखते हुए) पापा! आपने कहा था कि सेक्स करेंगे, मारोगे नहीं!

पापा: (हल्के से हँसते हुए) ओह, सॉरी बेटा। बहुत तेज लगी क्या? (वो मेरी गांड को सहलाने लगे, जैसे दर्द को कम करना चाहते हों।)

फिर उन्होंने मुझे पीठ के बल लिटाया। मेरी साँसें तेज थीं, और मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। पापा ने अपनी उंगली पर थूका और मेरे नुकीले निपल्स पर चिमटी काट ली। “अह्ह… अह्ह…” मैंने कामुक आवाज में चीख मारी। दर्द और एक अजीब-सा मजा दोनों मिल रहे थे।

पापा ने मेरे बूब्स को दोनों हाथों से दबाना शुरू किया। उनकी उंगलियाँ मेरे निपल्स को मसल रही थीं, और फिर वो मेरे बूब्स को चाटने और चूसने लगे। “उम्म… अह्ह…” मेरी सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। मेरे शरीर में गर्मी बढ़ रही थी, और मेरी चूत धीरे-धीरे गीली होने लगी।

15 मिनट तक पापा मेरे बूब्स के साथ खेलते रहे। फिर उन्होंने अपनी उंगलियाँ अपने मुँह में डालीं, उन्हें सलाइवा से गीला किया, और मेरी नन्ही, गोरी, बिना बालों वाली चूत में डालने की कोशिश की। मेरी चूत इतनी टाइट थी कि उनकी उंगली अंदर नहीं जा रही थी। मुझे फिंगरिंग या मास्टरबेशन की आदत नहीं थी, इसलिए मेरी चूत बिल्कुल वर्जिन थी।

उनकी उंगली से मुझे दर्द हो रहा था, और मेरी साँसें और तेज हो गईं। “आह… पापा… धीरे…” मैं सिसकारियाँ ले रही थी। फिर पापा ने अपना मुँह मेरी चूत पर रख दिया। उनकी गर्म जीभ मेरी चूत के छोटे से मोती को चाटने लगी। “उह्ह… अह्ह…” मैं मस्ती में डूबने लगी। “Delhi Papa Beti Chudai”

मैंने अपने होंठों को दाँतों से काट लिया, और अपने हाथों से पापा का सिर अपनी चूत पर दबाने लगी। जब उनकी जीभ मेरी चूत के अंदर गहरे तक गई, तो मैंने अपनी गांड उठा-उठाकर और गहरा लेने की कोशिश की। “पापा… और… और…” मेरी आवाज में एक अजीब-सी बेचैनी थी। मेरी चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी, और कमरे में मेरी सिसकारियों के साथ-साथ “चप-चप” की आवाजें गूँज रही थीं।

मैं: (हाँफते हुए) पापा, प्लीज अब और मत तड़पाओ। अब चोद दो मुझे, प्लीज।

पापा: (हँसते हुए) अभी तो बस शुरूआत है, मेरी जान। पहले तुझे और तड़पाऊंगा, फिर तेरी इस टाइट चूत में अपना 9-इंच का लंड डालूंगा।

मेरे शरीर में एक ठंडी सिहरन दौड़ गई। मैंने कहा: पापा, प्लीज, रियल वाला सेक्स नहीं। बहुत दर्द होगा। मैं वर्जिन हूँ। मैं अभी अपनी वर्जिनिटी नहीं खोना चाहती। प्लीज समझो न।

पापा: (गुस्से में) अरे, वो लड़का भी तो यही करने वाला था। उसे तो तूने नहीं रोका। अपने बाप को मना कर रही है, और उस अनजान लड़के को अलाउ कर रही थी?

मैं: (रोते हुए) मैं उसे रोकने वाली थी, पापा। लेकिन आप आ गए।

पापा: (सख्त आवाज में) अब चाहे कुछ भी हो, आज तो तुझे चोदे बिना नहीं छोड़ूंगा। बड़े दिनों बाद ऐसी टाइट चूत मिली है। तेरी माँ की चूत तो इतनी बार चुद चुकी है कि अब वो ढीली हो गई है। अब उस रंडी को चोदने में कोई मजा नहीं आता। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

उनके शब्द मेरे दिल में चाकू की तरह चुभे। मैंने गुस्से में पापा को धक्का दिया और बेड से उठने लगी। लेकिन पापा ने मेरी कमर पकड़ ली और मुझे वापस खींच लिया।

पापा: (गुस्से में) निशा, आगे से ऐसी बदतमीजी मत करना। नहीं तो भूल जाऊंगा कि तू मेरी बेटी है।

मैं: (रोते हुए) आप तो पहले ही भूल चुके हैं, पापा। जब आपने मेरे साथ ऐसा करने का सोचा, तभी आप भूल गए कि मैं आपकी बेटी हूँ।

पापा: (ठंडी आवाज में) अगर मैं भूल गया होता, तो तेरा बदन दर्द से टूट रहा होता। तू इतनी आसानी से मुझे धक्का नहीं मार पाती।

मैं चुप हो गई। मेरे पास कहने को कुछ नहीं था। पापा मेरे और करीब आए। उन्होंने मेरे फोरहेड पर एक हल्का-सा किस किया और बोले: तू क्यों मुझे इतना परेशान करती है? शांति से मुझे डेढ़ घंटा मेरे मन की करने दे। तू देख, तुझे भी बहुत मजा आएगा। मेरे दिल में डर, गुस्सा, और एक अजीब-सी उलझन थी।

लेकिन मैं चुप रही। मेरी साँसें तेज थीं, और मेरी चूत अभी भी गीली थी। पापा की आँखों में एक ऐसी आग थी, जो मुझे डराने के साथ-साथ कुछ और भी महसूस करा रही थी। मैं बेड पर बैठी थी, मेरी साँसें तेज थीं, और मेरी चूत अभी भी गीली थी। पापा के टच का अहसास मेरे शरीर में बिजली की तरह दौड़ रहा था।

मेरी मिनी स्कर्ट मेरी गांड को मुश्किल से ढक रही थी, और मेरा टाइट क्रॉप टॉप मेरे निपल्स को उभार रहा था। मैंने जल्दबाजी में ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी, और मेरी चूत की शेप स्कर्ट के नीचे साफ दिख रही थी। पापा मेरे सामने खड़े थे, उनका ब्लेजर और बेल्ट फर्श पर पड़े थे, और उनकी शर्ट के ऊपरी बटन खुले थे।

उनकी चौड़ी छाती पसीने से भीगी थी, और उनकी साँसें भारी थीं। कमरे में मेरी सिसकारियों और उनकी साँसों की आवाज गूँज रही थी। मैंने अभी-अभी पापा को धक्का दिया था, क्योंकि उन्होंने मम्मी को “रंडी” कहा था। लेकिन पापा ने मुझे कमर से पकड़ लिया था, और अब वो मेरे और करीब थे। “Delhi Papa Beti Chudai”

पापा: (मेरे कान में फुसफुसाते हुए) निशा, तू इतना ड्रामा क्यों करती है, मेरी रंडी? तू तो जानती है कि तेरी चूत मेरे लंड के लिए तड़प रही है।

मैं: (काँपते हुए) पापा, प्लीज… ये गलत है। मैं आपकी बेटी हूँ। मम्मी को पता चला तो…

पापा: (हँसते हुए) मम्मी को क्या पता चलेगा? उस ढीली चूत वाली रंडी को अब मेरे लंड से कोई मतलब नहीं। लेकिन तू… तेरी ये टाइट चूत… इसे तो मैं आज चोद-चोदकर फाड़ दूँगा। (उन्होंने मेरी स्कर्ट के नीचे हाथ डाला और मेरी गीली चूत को जोर से मसला।)

उनकी उंगलियाँ मेरी चूत पर फिसल रही थीं, और मेरी सिसकारी अपने आप निकल गई। “उह्ह…” मेरे होंठ काँप रहे थे। मेरी चूत इतनी गीली थी कि उनकी उंगलियाँ आसानी से अंदर-बाहर हो रही थीं। “चप-चप” की आवाज कमरे में गूँज रही थी। मेरे दिमाग में संजीव का चेहरा आ रहा था—वो प्यारी स्माइल, जब उसने मुझे सीरियस रिलेशनशिप की बात की थी।

लेकिन मेरी चूत की गर्मी मुझे उसकी यादों से खींच रही थी। मैं डर रही थी, लेकिन मेरा शरीर पापा के टच को रोक नहीं पा रहा था। पापा ने मेरी मिनी स्कर्ट को एक झटके में उतार दिया। मेरी गोरी, गोल गांड हवा में खुली थी, और मेरी चूत उनके सामने चमक रही थी। मेरा क्रॉप टॉप पहले ही इतना टाइट था कि मेरे निपल्स बाहर उभर रहे थे।

पापा ने मेरा टॉप पकड़ा और उसे जोर से फाड़ दिया। मेरे 32 इंच के बूब्स हवा में उछल पड़े, और मेरे निपल्स टाइट हो चुके थे। “क्या मस्त चुचियाँ हैं, मेरी रंडी बेटी,” पापा ने कहा, और उनकी आवाज में एक गंदी भूख थी। उन्होंने मेरे बूब्स को दोनों हाथों से जोर-जोर से मसला, और मेरे निपल्स को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे।

“अह्ह… पापा… धीरे…” मेरी सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। उनके दाँत मेरे निपल्स पर हल्के-हल्के काट रहे थे, और मेरी चूत से जूस टपकने लगा था। पापा ने मेरे बूब्स को छोड़ा और मेरी टाँगें चौड़ी कीं। “देख, मेरी रंडी, तेरी चूत कितनी गीली है। ये तो मेरे लंड को बुला रही है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने अपना मुँह मेरी चूत पर रखा और मेरे छोटे से मोती को चाटने लगे। उनकी जीभ मेरी चूत के अंदर तक जा रही थी, और वो उसे चूस रहे थे जैसे कोई भूखा शेर। “चप-चप… स्लर्प…” की आवाजें कमरे में गूँज रही थीं। “उह्ह… अह्ह… पापा…” मैं अपने होंठ काट रही थी, और मेरे हाथ उनके बालों को जोर से पकड़ रहे थे। “Delhi Papa Beti Chudai”

मेरी गांड अपने आप उठ रही थी, जैसे उनकी जीभ को और गहरा लेना चाहती हो। मेरी चूत इतनी गीली थी कि मेरे जूस बेडशीट पर टपक रहे थे। मैं मस्ती में डूब रही थी, लेकिन मेरे दिल में गिल्ट भी था। मैं सोच रही थी कि मैं संजीव को कैसे मुँह दिखाऊँगी।

मैं: (हाँफते हुए) पापा… प्लीज… अब और मत तड़पाओ… बस… बस चोद दो मुझे…

पापा: (हँसते हुए) अरे, मेरी चुदक्कड़ बेटी, इतनी जल्दी है? अभी तो तेरी चूत को और गर्म करना है। तेरी इस रसीली चूत को चाट-चाटकर इसका सारा रस पी जाऊँगा।

उन्होंने अपनी शर्ट और पैंट उतार दी। उनका 9 इंच का लंड मेरे सामने था—मोटा, काला, और नसों से भरा हुआ, जैसे कोई लोहे का रॉड। मैं उसे देखकर डर गई। मेरी चूत टाइट थी, और मुझे यकीन था कि ये अंदर नहीं जाएगा। पापा ने मेरे चेहरे पर अपना लंड रगड़ा, और उसका प्री-कम मेरे होंठों पर लग गया। “चूस इसे, मेरी रंडी,” उन्होंने कहा। “इसे गीला कर, ताकि तेरी चूत में आसानी से घुस जाए।”

मैं: (घबराते हुए) पापा, मैंने कभी ऐसा नहीं किया… मुझे डर लग रहा है…

पापा: (गुस्से में) डर को अपनी गांड में डाल, निशा। मुँह खोल, और मेरे लंड को चूस, वरना तेरी चूत को सूखा-सूखा चोद दूँगा।

मैंने डरते-डरते उनका लंड मुँह में लिया। उसका नमकीन स्वाद मेरी जीभ पर फैल गया, और उसकी गर्मी मेरे मुँह में दौड़ रही थी। पापा ने मेरे सिर को पकड़ा और मेरे मुँह में धक्के मारने लगे। “ग्लक-ग्लक” की आवाजें गूँज रही थीं, और मेरा गला दब रहा था।

मेरी आँखों में आँसू आ गए, लेकिन मेरी चूत और गीली हो रही थी। मैं समझ नहीं पा रही थी कि मेरा शरीर मुझे धोखा क्यों दे रहा था। पापा ने मेरे मुँह से लंड निकाला, और मेरे होंठों पर थप्पड़ मारा। “क्या चूसती है, मेरी रंडी। तू तो जन्मजात चुदक्कड़ है,” उन्होंने कहा।

पापा ने मुझे बेड पर लिटाया और मेरी टाँगें इतनी चौड़ी कीं कि मेरी चूत पूरी तरह खुल गई। “देख, मेरी रंडी, तेरी चूत कितनी टाइट है। आज तो इसे फाड़-फाड़कर इसका भोसड़ा बना दूँगा,” उन्होंने कहा। उन्होंने अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ा, और उसका गर्म टिप मेरे मोती को छू रहा था। मैं डर रही थी, लेकिन मेरी चूत उसे अंदर लेने को तड़प रही थी।

मैं: (रोते हुए) पापा, प्लीज धीरे… मैं वर्जिन हूँ… बहुत दर्द होगा…

पापा: (हँसते हुए) दर्द तो होगा, मेरी चुदक्कड़ बेटी। लेकिन तू मेरी रंडी है, ले लेगी मेरे लंड को।

उन्होंने अपना लंड मेरी चूत के मुँह पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा। “आह्ह्ह!” मैं चीख पड़ी। मेरी चूत में जैसे आग लग गई थी। उनका लंड सिर्फ आधा ही अंदर गया था, लेकिन मुझे लग रहा था कि मेरा शरीर फट जाएगा। पापा रुके और मेरे माथे पर हाथ फेरा। “Delhi Papa Beti Chudai”

“बस, मेरी रंडी, थोड़ा और,” उन्होंने कहा। फिर उन्होंने एक और धक्का मारा, और उनका पूरा 9 इंच का लंड मेरी चूत में समा गया। “चट-चट… फच-फच…” की आवाजें गूँज रही थीं। मेरी आँखों में आँसू थे, और मेरी सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। “अह्ह… उह्ह… पापा… धीरे…”

पापा ने धीरे-धीरे धक्के मारना शुरू किया। हर धक्के के साथ मेरी चूत में दर्द कम और मजा ज्यादा होने लगा। “फच-फच… चट-चट…” की आवाजें तेज हो रही थीं। मेरी गांड बेड पर रगड़ रही थी, और मेरे बूब्स हर धक्के के साथ उछल रहे थे। पापा ने मेरे निपल्स को जोर से मसला, और मेरी चूत में और तेज धक्के मारे। “ले, मेरी रंडी बेटी। ले मेरे लंड को। तेरी चूत को चोद-चोदकर इसका भोसड़ा बना दूँगा,” उन्होंने कहा।

मैं: (सिसकारते हुए) पापा… आह्ह… और… और तेज…

मेरे मुँह से ये शब्द कैसे निकले, मुझे नहीं पता। मेरी चूत अब दर्द की बजाय मजा ले रही थी। पापा ने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से मेरी चूत में लंड डाला। “पट-पट” की आवाजें गूँज रही थीं, और मेरी गांड उनके धक्कों से लाल हो रही थी। पापा ने मेरी गांड पर एक जोरदार चांटा मारा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

“क्या मस्त गांड है, मेरी रंडी। इसे भी चोद-चोदकर फाड़ दूँगा,” उन्होंने कहा। मैं सिसकारियाँ ले रही थी। “अह्ह… उह्ह… पापा… चोदो मुझे…” मेरी चूत उनके लंड को चूस रही थी, और मैं मस्ती में डूब चुकी थी। पापा ने मेरे बाल खींचे और मेरी चूत में और तेज धक्के मारे। “Delhi Papa Beti Chudai”

“ले, मेरी चुदक्कड़ बेटी। तेरी चूत को मेरे लंड का गुलाम बना दूँगा,” उन्होंने कहा। मेरे शरीर में एक गर्मी सी दौड़ रही थी। मुझे लगा कि मैं झड़ने वाली हूँ। “पापा… मैं… मैं…” मैं चीखी, और मेरी चूत ने उनके लंड को जकड़ लिया। मैं झड़ गई। मेरे जूस उनकी जांघों पर टपक रहे थे, और मेरी साँसें इतनी तेज थीं कि मुझे लगा मैं बेहोश हो जाऊँगी।

पापा ने धक्के और तेज कर दिए। “फच-फच… चट-चट…” की आवाजें कमरे में गूँज रही थीं। “बस, मेरी रंडी, अब तेरा बाप भी झड़ेगा,” उन्होंने कहा। उन्होंने अपना लंड बाहर निकाला और मेरे बूब्स पर अपना गर्म, चिपचिपा माल छोड़ दिया। “आह्ह…” उनकी साँसें तेज थीं। मैं हाँफ रही थी, मेरी चूत दर्द और मजा दोनों से भरी थी। मेरे बूब्स पर उनका माल चिपचिपा रहा था, और मेरी चूत से मेरे जूस टपक रहे थे।

पापा मेरे बगल में लेट गए और मेरे माथे पर हाथ फेरा। “क्या चुदाई थी, मेरी रंडी बेटी,” उन्होंने कहा। “तेरी चूत ने मेरे लंड को ऐसा मजा दिया कि मैं भूल गया कि तू मेरी बेटी है।” मैं चुप थी। मेरे दिमाग में सवालों का तूफान था। मैंने अपने पापा के साथ सेक्स किया था।

ये गलत था, लेकिन मेरे शरीर को इतना मजा आया था कि मैं उसे नकार नहीं पा रही थी। मैं सोच रही थी कि संजीव को कैसे मुँह दिखाऊँगी। मम्मी को क्या पता चलेगा? और सबसे बड़ा सवाल—क्या मैं अब पापा को रोक पाऊँगी? अचानक दरवाजे पर एक खटखट की आवाज आई। मेरे दिल की धड़कन रुक गई। “निशा, तू ठीक है?” ये भैया की आवाज थी। पापा और मैं एक-दूसरे को देखने लगे। मेरी साँस अटक गई थी।

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Ritu Agarwal

हैलो दोस्तों! मैं ऋतु अग्रवाल हूँ - कानपुर विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में मास्टर डिग्री पाने वाली और पिछले 5 साल से हिंदी में वो कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी रूह को छू लें और तन को तड़पा दें। मैं मानव व्यवहार और इंसानी इच्छाओं पर गहरा रिसर्च करती हूँ ताकि हर कहानी असली और दिलकश हो। मेरी कहानियाँ लाखों पाठकों ने पढ़ी हैं और हर कोई वापस आता है। मैं समझती हूँ आप क्या चाहते हैं - और वही लिखती हूँ जो आपको पागल कर दे। तो चलो, मेरी कहानी से आज की रात को खास बनाते हैं!

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