ईट भट्ठे की सेक्सी मजदूर आंटी को चोदा

नमस्कार दोस्तों मेरी उम्र 23 साल है और मै मेरठ में एक बिजनेसमैन के लिए काम करता हूं मेरा काम उनके अलग अलग बिजनेस में जाकर देख- रेख करना है मेरी ज्यादातर ड्यूटी कंस्ट्रक्शन साइट ओर फैक्ट्रियों में लगती जहां सिर्फ मजदूर होते क्यों कि उनके काम पे नजर रखना जरूरी होता. Aurat Tight Chut Fucking

उनका एक ईंट का भट्टा था कहे तो ईंट बनाने का कारोबार था अक्सर मै वहां काम देखने जाया करता था. एक दिन सुबह थोड़ी बारिश हो गई तो भट्ठे का काम कम हो गया. लेकिन कुछ मजदूर आ रखे थे जिसमें ज्यादातर औरतें थी. वो काली मिट्टी को ढेर में से उठा कर ईंट बनाने की मशीन में डालती.

वहां मशीन और मैनपावर दोनों तरीकों से ईंट बनती थी. बारिश होने के कारण मशीन चलाने का कोई फायदा नहीं था इसलिए मजदूर खुद ही ईंटे बना रहे थे. मै वहां सुपरवाइज करने चला गया बहुत कम मजदूर आए थे, मै एक किनारे बैठ के काम देख रहा था.

तभी मेरी नजर एक औरत पर पड़ी वो मिट्टी उठा रही थी (मुझे बड़ी उम्र की औरतें बहुत पसंद हैं). उसने ग्रे रंग की साड़ी पहनी थी जो उसके पैरों से थोड़ा ऊपर उचकी हुई थी. उसने डार्क मेहरून रंग का ब्लाउज पहना था उसके बड़े बड़े बूब्स ब्लाउज में कसे हुए थे और बाहर निकल रहे थे.

बारिश और पसीने की वजह से पूरे कपड़े उसके बदन पर चिपक हुए थे उसकी फूली हुई गांड़ हाय… क्या कर्वी बदन लग रहा था उसकी उम्र करीब 40 साल रही होगी. पर इतना गठीला शरीर था कि मेरा हथियार देखते ही सलामी देने लगा. मै कई देर से उसे देख रहा था.

उसको भी ये पता चल गया था वो आते जाते मुझसे नजरे मिला रही थी और मिट्टी उठते हुए अपनी गांड़ हिला रही थी. उसके साथ एक और औरत मिट्टी ले जा रही थी. मैने उसे दूसरे साइड की मिट्टी ले जाने को कहा तो वो वहां चली गई अब ये वहां अकेली थी.

मै उठा और उसके पीछे खड़ा हो गया उसने मिट्टी का टब अपने सिर पर रखा और पीछे मुड़ी. मैने उसके पास जाकर अपने हाथ से उसकी कमर और जांघ को सहला दिया और पीछे हट गया. वो मुड़कर चल दी दुबारा जब वो आई तो उसके पास कोई टब नहीं था.

मै समझ गया ये देने के लिए तैयार है. मै उसके केबिन में ले गया कुंडी लगा कर उसकी उभरी हुई गांड़ को दोनो हाथों से दबाने लगा. इतने में वो बोली साहब जो करना है करना पर मेरी दिहाड़ी बड़ा के देने. मै बोला उसकी चिंता मत कर और उसको चूमने लगा.

मेरे पास ज्यादा टाइम नहीं था तो सीधा उसके बूब्स पर आ धमका. पहली बार मैने इतने बड़े स्तनों को दबाया और चूसा. मैने उसका ब्लाउज खोला उसने ब्रा नहीं पहनी थी वो बड़े बड़े स्तन मुझे पागल कर रहे थे. मै अपना मुंह उनपे रगड़ने लगा वो सिसकिया ले रही थी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

साथ में मै साड़ी के ऊपर से उसकी चूत को दबा रहा था. उसकी सांसे तेज होने लगी थी मैने एक झटके से उकसी साड़ी निकाल दी. उसने पेंटी नहीं पहनी थी अब वो मेरे सामने पूरी नंगी थी. मैं खड़े खड़े अपनी उंगलियां उसकी चूत में डालने लगा फच्छ फच्च की आवाज आ रही थी.

फिर मैने उसकी कुर्सी पर बिठाया और उसकी चूत को चाटने लगा. उसकी चूत भूटी पूरी साफ थी कोई बाल नहीं थे. मै चूत को चाटने लगा उसकी सिसकिया बढ़ने लगी. वो बोली साहब पहली बार पति के अलावा किसी से चुदवाने जा रही हूं. मैने उनको नीचे बिठाया और अपना लन्ड उसके मुंह में दिया.

वो उसके लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी मुझे आनंद आ रहा था. कई देर ब्लोजॉब के बाद मैने उसे टेबल पर बैंड किया और पीछे से अपना हथियार उसके बिल में डाला. सच में उसकी चूत उम्मीद से ज्यादा टाइट थी लगता था इसने काफी टाइम से कुछ नहीं किया.

(मुझे लगा बेचारी किसी चूतीये से बियाह गई) मै उसको ठोकने लगा जब मैं उसके चूतड़ों से टकरा रहा था तो टप तप की साउंड आ रही थी. शायद ये आवाज सुन के उसके साथ वाली केबिन के पास आ गई. हमारा मुंह खिड़की की तरफ था वो अचानक सामने आई और हैरान खड़ी रह गई.

मैने उसे देखा तो इसकी बाल पकड़ लिए और बाल खींचते हुए चोदने लगा. वो बाहर से हटी नहीं और देखती रही हम भी नहीं रुके. फिर मैने इसको पलटा और मेज पर लिटा के चोदने लगा. 10 मिनिट में वो 2 बार झड़ गई थी अब फच फच की आवाजें आने लगी.

मै भी थक गया था तो कुर्सी पर बैठ गया वो मेरे ऊपर आके चुदवाने लगी. बाहर से अभी भी उसकी सहेली कार्यक्रम देख रही थी. अब मेरे में बहुत ज्यादा एक्साइटमेंट आ गई थी. मैने उसे मेज पर बिठाया एक पांव ऊपर उठा कर चोदने लगा. उसकी चूत टाइट होने लगी थी वो झड़ने वाली थी. “Aurat Tight Chut Fucking”

मैने भी धक्के तेज कर दिए उसकी चूत में मुझे गर्मी लगने लगी. मैने और तेज करने थोड़ी देर में हम दोनों एक साथ जड़ गए उसका मूत भी निकल गया. मै भी उसके अंदर ही निढाल हो गया हमने गहरी सास ली. मैने कुंडी खोली और बाहर खड़ी आंटी को अंदर बुलाया. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मै कुर्सी में बैठ गया वो खुद को साफ करने लगी उसका मूत मेरे लन्ड और पैरो पर गिर गया था. वो अपनी साड़ी से उसे साफ करने आई मैने कहा रहने दो मै नहा लूंगा। इतने में उसकी दोस्त बोली कविता तू ये सब वो बोली अरे उषा मेरा तो पति साल शराबी है उसने तो मेरी चूत कभी देखी ही नहीं बस अपना निकलवाने के लिए मेरे पास आता था अब उसमें वो ताकत भी नहीं।

मैने उषा को देखा वो कविता (जिसको मैने चोदा उसका नाम) की तरह गठीले बदन की नहीं थी लंबी और पतला साधारण शरीरी था. लेकिन मैने सोचा अगर इसकी भी मिल जाए तो मजा आ जायेगा. मै कहा उषा तुम्हे भी करना है वो बोली न साहब.

मै बोला देख लो 2 दिन की दिहाड़ी बड़ा दूंगा वो सोचने लगी इतने में कविता बोली सोच क्या रही है तेरा तो पति भी नहीं है कर ले क्या हो बिगड़ जाएगा. उसने हां कर दी मै बोला अभी तो मुझे दूसरी साइट पर जाना है शाम को इस पते पर आ जाना कविता अगर तुम आ सको तो तुम भी आ जाना.

वो बोली हां साहब. मै केबिन में बाथरूम था वहां नहाने चला गया वो दोनों भी काम कर चली गई. साइट से जाते समय मैने दोनों की गांड़ पर थप्पड़ मारी दोनों के मुंह से हा… निकली. उन्होंने मुझे दखा मैने कहा 8 बजे और चला गया. उस रात मैने दोनों को चोदा और कविता की गांड़ भी मारी दोनों को पोर्न दिखाया और दोनों का लेस्बियन सेक्स भी करवाया ये कहानी कभी और.

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Ritu Agarwal

हैलो दोस्तों! मैं ऋतु अग्रवाल हूँ - कानपुर विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में मास्टर डिग्री पाने वाली और पिछले 5 साल से हिंदी में वो कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी रूह को छू लें और तन को तड़पा दें। मैं मानव व्यवहार और इंसानी इच्छाओं पर गहरा रिसर्च करती हूँ ताकि हर कहानी असली और दिलकश हो। मेरी कहानियाँ लाखों पाठकों ने पढ़ी हैं और हर कोई वापस आता है। मैं समझती हूँ आप क्या चाहते हैं - और वही लिखती हूँ जो आपको पागल कर दे। तो चलो, मेरी कहानी से आज की रात को खास बनाते हैं!

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